आशीर्वाद – रेनू अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

बड़ी बहू यानी जेठानी की तबीयत कुछ अधिक ही ख़राब हुई तो छ: साल पुरानी देवरानी ने बहुत सेवा की ।घर का हर काम सँभाल  लिया और जेठानी को पूरा आराम दिया । जेठानी को हैरानी थी कि कभी मुझ से ठीक से बात ना करने वाली , घर के काम में मदद ना करने … Read more

बड़ा दिल – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” : Moral Stories in Hindi

सागरिका का मुस्कुराता हुआ चेहरा और बोलती हुई आंखें!! चाहे जितनी गंभीर क्यों न हो….? लेकिन ऐसा लगता कि जैसे मुस्कुरा रही हो। छोटी सी छोटी बात पर बहुत जोर से ठहाका लगाती …। उसके हंसने से मानो आसपास की चीजें भी हंसने लगती। एक तो बला की खूबसूरत ऊपर से हंसमुख चेहरा… सोने पर … Read more

मेम से दीदीजी बन गई – चाँदनी झा  : Moral Stories in Hindi

“ऊषा मन नहीं कर रहा है तो छोड़ दो, अगले बार अच्छी जगह मिलेगी तो प्रमोशन लेना।”  ऊषा के पति अमित ने कई बार समझाया। ऊषा सरकारी विद्यालय में शिक्षिका है, उसका प्रमोशन हुआ, एक स्लम एरिया में। घर से काफी दूर, अविकसित जगह में, जो बाजार से काफी दूर, एक सुदूर देहात में, सुदूर … Read more

“बड़ा दिल” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा  : Moral Stories in Hindi

अपना और अपनी पत्नी का सामान दोनों हाथों में टाँगे मैं लंबी -लंबी डग भरते हुए चल रहा था। बीच-बीच में पलटकर देख भी ले रहा था कि विभा मेरे पीछे है या नहीं! कभी-कभी वह बहुत पीछे रह जाती थी तो मैं जोर से आवाज लगा रहा था….विभा…..विभा आ रही हो ना!  वह तुनक … Read more

इत्ती सी परवाह (भाग -2) – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बेटा पापा को फोन किया था तुमने हाल चाल लेते रहना मुझसे तो बात ही नहीं करते हैं जाने इस उमर में कौन सी क्लास ज्वाइन किए है ….शिमली दोपहर से बहुत उद्विग्न थी। मां पापा एकदम मजे में है रिनी के घर में । जीजाजी बहुत ख्याल कर रहे हैं उनका आप क्यों चिंता … Read more

इत्ती सी परवाह – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

पापा  अब तो आप रिटायर हो गए हैं अब फुर्सत से हमारे घर चलिए और रहिए थोड़ा चेंज हो जाएगा आपको अच्छा लगेगा मेहुल छोटे दामाद इस बार पीछे ही लग गए थे। मुकुंदजी की रिटायरमेंट पार्टी में पूरा परिवार इकठ्ठा हुआ था।सबके आ जाने से पूरा घर उल्लसित हो उठा था।अब धीरे धीरे सबके … Read more

नया स्वेटर – कविता झा ‘अविका’ : Moral Stories in Hindi

अंबिका हैरत भरी नज़र से दरवाजा खोलते ही अपने पति शशांक को देखती है… जो दिसंबर की इस कड़कड़ाती ठंड में बिना स्वेटर  के ऑफिस से घर आ रहे थे। सुबह तो नया स्वेटर… जो अंबिका ने बड़े प्यार से उसके लिए बनाया था… पहनकर गए थे। “तुम्हारे हाथों में जादू है अंबिका। बहुत ही … Read more

वक़्त पर अपने ही काम आते हैं पड़ोसी नहीं – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा  : Moral Stories in Hindi

प्राइवेट नौकरी में सब कुछ है पैसा है, रुतबा है, शोहरत है। अगर नहीं है तो बस समय और सुकून नहीं है। आदमी अपने ही घर में पड़ोसी सा हो जाता है। लेकिन किया भी क्या जा सकता है जिंदगी जीने के लिए घर की चौखट लांघ कर परदेसी बनना ही पड़ता है। आज के … Read more

लंचबॉक्स – प्रियंका सक्सेना  : Moral Stories in Hindi

शहर से दूर एक छोटे से शहर नूरपुर में सुबह होते ही बच्चे अच्छे धुले साफ़ सुथरे कपडे पहनकर हाथों में बस्ता लेकर विद्यालय की ओर चल पड़े।  सरकारी विद्यालय नूरपुर में छठी कक्षा में मास्टरजी के आते ही सभी बच्चों ने समवेत स्वर में गाकर उनका स्वागत किया। होने को तो बच्चे अभिवादन कर … Read more

और बोलो मीठे बोल? – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

अच्छा, गोलू की 15 दिन की छुट्टी हो गई? वाह! यह तो अच्छा हुआ, तो फिर तू आ जा ना यहां! सुमन जी ने फोन पर अपनी बेटी कंचन से कहा  कंचन:  क्या मां आप भी.? आपका बस चले तो मैं वही रहूं, पर भाभी? उनसे भी तो पूछ लो? वह क्या सोचेगी जब देखो … Read more

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