ढलती सांझ – खुशी : Moral Stories in Hindi

दोस्तों जब हम जवानी में होते हैं तो हमें लगता है हम हमेशा ऐसे ही रहेंगे कभी हम बूढ़े ही नहीं होंगे हमें किसी की जरूरत नहीं होगी हमारा सब बहुत अच्छा होगा पर ऐसा नहीं है जब हमारे पास अपने होते हैं हम उनकी कदर नहीं करते और जब भाग दौड़ से निजात मिलता … Read more

मौन सामंजस्य – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

 आज भी शाम की सैर के समय मेरा ध्यान अपनी सैर में कम और उस वरिष्ठ दंपति की धीमी गति से चल रही सैर की ओर ही अधिक था। उन पति महोदय के एक पैर में संभवतः कुछ तकलीफ थी क्योंकि वे अपने दूसरे पैर पर तनिक अधिक दबाव बनाते हुए अत्यंत धीमी गति से … Read more

ढ़लती शाम – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

पूरा घर अस्त व्यस्त कपड़ों से फैला हुआ था। असली घी के मेवा डालकर बनाए हुए लड्डू यूं ही परात में रखे हुए थे। माधवी अंधेरे कमरे के अंधेरे कोने में बैठकर पुरानी यादों में खोई आंसू बहा रही थी।     कितने समय से वह राजेश के दुबई से आने का इंतजार कर रही थी। … Read more

“ढलती सांझ” – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

बाल कनी मे बैठ कर रमा चिड़ियो को देख रही है ।जो इस ढलती सांझ को अपने बसेरे पर लौट रहे हैं ।सोच रही है वह ,उसकी जिंदगी की भी तो यह ढलती सांझ ही है, पता नहीं कब उड़ने को तैयार होना पड़े ।चाहे जीवन कितना भी आगे बढ़ जाये, अतीत कहाँ पीछा छोड़ता … Read more

चमकते आंसू – कंचन श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

तखत पर बैठी अम्मा के आंसू  रुक नही रहे हर कोई उनकी आंखों के सामने से चला जा रहा और वो लाचार बेबस असहाय सी वहीं की वहीं पड़ी  कुछ नही कर पा रही ।करें भी कैसे एक तो उम्र का तकाज़ा दूसरे निगोड़ी कई बीमारियों ने  घर बना लिया देह में , वो भी … Read more

धंधा – : Moral Stories in Hindi

रोज की तरह आज भी शाम का धुंधलका होते ही  बिन्नी रेड लाइट एरिया में ग्राहक के लिए खड़ी थी ।एक ग्राहक से सौदा हुआ । वह उसे  एक होटल में ले गया । वहां के बार में कई जोड़े बैठे थे , जो केवल अपनी रातें रंगीन करने आए थे । इनमें रईस घरों … Read more

किचन किंग – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

अरे वाह भाभी… मजा ही आ गया… बड़ा ही स्वादिष्ट नाश्ता बनाया आपने, जितनी भी तारीफ करो…. कम ही रहेगी,राधव ने अपनी भाभी रूपा के बनाये खाने की तारीफ करते हुए कहा आज तो पेट भर गया मगर नीयत ही नहीं भर रही…. फिर दो कचौड़ियां और अपनी प्लेट में क्या रख… लीं ॽ  पत्नी … Read more

ढलती सांझ – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

मेरा बेटा आज बहुत दिन बाद मेरे पास रहने के लिए आ रहा है यह बात सुषमा ने लगभग 10 से 15 लोगों को बता दी घर में अकेले रह रहे बूढ़े मां का सहारा कोई नहीं तीन मंजिला मकान ग्राउंड फ्लोर में खुद रहती है और पूरे कमरों कर किराए पर उठा दिया सुषमा … Read more

ढलती सांझ – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

गर्मियों की दोपहर समय करीब तीन बजे का रहा होगा। मैंने दराती उठाई और खेतों की तरफ निकल पड़ा। गेहूं की फसल पक चुकी थी और खेत लहलहा रहे थे फसल बहुत अच्छी हुई थी इसबारऔर होती भी क्यों न आखिर हर कीटनाशक ,यूरिया की खाद भर भरकर डाला था। खेतों तक पहुंचते पैर तपने … Read more

आग में घी डालना – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

दोपहर में अचानक से फोन की घंटी बजने से सुधा की नींद टूट जाती है।उधर से फोन पर उसका पति कमल कहता है -“सुधा! तैयार रहना। मैं जल्द आ जाऊॅंगा। पुस्तक मेला देखने प्रगति मैदान चलेंगे।”  “अच्छा” खुश होकर सुधा कहती हैं। सुधा मन-ही-मन सोचती है कि    अब फिर से  कमल मेरी भावनाओं की … Read more

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