धड़ाम! – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

दोपहर का काम खत्म करके रमा अपनी जेठानियों के साथ गप्पें मार रही थी। सासू माॅं मालादेवी भी अपने कमरे में आराम कर रही थी। तभी किचन से खूब जोर की धड़ाम! की आवाज आई।आवाज़ सुन मालादेवी और उनकी बहुऍं किचन की ओर दौड़ पड़ी। वहाँ रमा के ससुर जी(बाबूजी) मुँह में लड्डू ठूँसे दोनों … Read more

स्वार्थ – खुशी : Moral Stories in Hindi

मीता शादी हो कर आई तब घर में सास ससुर पति धीरज और ननद  रीमा जो शादी शुदा थी पर हर समय मायके में ही रहती थीं । मीता ने शुरू शुरू में तो सबको बहुत प्यार से बांधने की कोशिश की पर जल्द ही उसे समझ आ गया कि उसकी सास एक स्वार्थी महिला … Read more

यात्रा, फुटपाथ से घर तक की – मनु वाशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

आज जो मैं बताने जा रही हूं, वह कोई कहानी नहीं, बल्कि एक हकीकत बयां करता फुटपाथ से घर तक की यात्रा का प्रसंग है। ट्रिंग ट्रिंग… किसी अपरिचित का फोन था, तीन या चार जुलाई 2024 को, अशोक वाशिष्ठ ने व्यस्तता के चलते फोन रिसीव नहीं किया।अगली सुबह उन्होंने ट्रू कॉलर पर देखा तो … Read more

ढलती सांझ – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“अपने जीवन की ढलती सांझ में प्रभु से एक ही विनती है कि शारीरिक कष्ट चाहे कितना ही दे देना, पर चलते हाथ-पांव की अवस्था में ही उठा लेना। हे प्रभु! बस शैय्याग्रस्त न होना पड़े। बच्चों को हमारी वजह से कष्ट न उठाना पड़े।” संगीता जी ने कहा। “संगीता, ये तो तुम सही कह … Read more

‘ढलती सांझ और घर के बुजुर्ग एक समान होते हैं’ – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

“मां, आज पेरेंट्स टीचर मीटिंग है” “हां, मुझे याद है, चलूंगी, वैसे भी तेरी शिकायतें सुनने से ज्यादा कुछ नहीं होता वहां…तुझे कितना भी समझा लो कि शैतानी मत किया कर, पढ़ाई में मन लगा लेकिन तुझे समझ ही नहीं आता…तैयार हो जाना 9 बजे तक…” वरुण और उसकी मां माधवी जैसे ही विद्यालय में … Read more

ढलती सांझ – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

हेलो ,हेलो कनक ,बोलो  कुणाल ,अब किस लिए कॉल किया है? कनक  दो दिन बाद हमारा तलाक हो जाएगा । हमको पता है कुणाल ,मै टाइम से पहुंच जाऊंगी । नहीं नहीं मै कह रहा था क्या कल का दिन हम दोनो एक साथ गुजार सकते है? कनक ने बोला क्यों? किस लिए? वो बस … Read more

मजाक – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

“अब देखती हूं बुड्ढा कैसे बुढ़िया के साथ जाता है?”कैसे मम्मी का हाथ अपने हाथ में लेकर सच्चे प्रेमी का नाटक करते हुए कहते थे शकुंतला यदि तुम्हें कुछ हो गया तो मैं तुम्हारे बगैर जी नहीं पाऊंगा..… तुम्हारे साथ ही मेरी अर्थी निकलेगी….. ऐसे कोई अपनी पत्नी के साथ नहीं जाता… मैं अभी ससुरजी … Read more

ढलती सांझ और ये जिम्मेदारियां – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

“बधाई हो शशि जी अब तो तीनों बच्चों की शादी हो गई, सारी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई आप। “ “देखते हैं सुलोचना जी जिम्मेदारी से मुक्त हुई हूं या जिम्मेदारी बढ़ेगी समय के साथ…” “अरे भाग्यवान अब कौनसी जिम्मेदारी बढ़ेगी तुम्हारी? अब तो ढलती सांझ है हमारी जिंदगी पता नहीं कब भगवान से घर … Read more

रिश्तों में अहंकार लाता अलगाव – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

काव्या अभी बच्चों को पढ़ा कर क्लास से निकली ही थी कि उसके पति का फोन आ गया… अरे ये आज कैसे फोन कर दिए सोचते हुए उसने जैसे ही हैलो कहा… उसे सुन कर रोना आ गया …उसे पति की बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था अपनी तसल्ली के लिए खुद को … Read more

ढलती सांसें – कविता झा ‘अविका’ : Moral Stories in Hindi

अपनी अपनी सीट पर बैठे सभी श्रोता उठकर ताली बजाने लगे और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा जब सुहासिनी का गीत खत्म हुआ और उसने एक गहरी सांस भरी। उसकी सांसें किसी समय भी उसका साथ छोड़ सकती है इसका इल्म है उसे पर अंतिम सांस तक कुछ कर गुजरने की इच्छा और उसका … Read more

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