मैं ऐसी क्यों हूं? – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

“कब तक चुप रहूं “क्या मुझे बोलना चाहिए•••? पिछले 10 सालों से मेरी जुबान बोलने से लड़खारती रही•• ना मैंने अपना दर्द  किसी को बताया और ना ही कभी किसी ने मुझसे पूछा•••! २२ साल की काव्या उदास सी कमरे में  चहल कदमी रही थी।  #अनकहा दर्द उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था।  बड़ी … Read more

अपवित्र कौन ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” हेलो सौरभ और तान्या इनसे मिलिए मेरी वाइफ चेताली !” ऑफिस की पार्टी मे सौरभ के साथ काम करने वाले उसके दोस्त रोहन ने अपनी पत्नी से परिचय करवाया। तान्या ने चेताली को गले लगा लिया। ” हेलो भाभी आपसे मिलकर अच्छा लगा !” सौरभ चेताली से बोला।  सब लोग पार्टी मे एन्जॉय कर … Read more

माधवी लौट आओ – विनय मोहन शर्मा : Moral Stories in Hindi

परेश और माधवी दोनों एक  ही दफ्तर में काम करते थे। परेश माधवी से सीनियर था। उन दोनों में नजदीकियां बढ़ने लगी थी और ये नजदीकियां अब प्यार में कब बदल चुकी थी, इसका उनको पता ही नहीं चल पाया। दोनों के परिवारों की सहमति से उन्हें विवाह के पवित्र बंधन में बांध दिया गया। … Read more

नई रोशनी – सुनीता माथुर : Moral Stories in Hindi

तेजस्विनी हमेशा खुश रहती थी और कोशिश करती थी सभी उसकी बातों से खुश रहें लेकिन “जो दर्द उसने अपने अंदर छुपा रखा था वह किसी से नहीं कह पाती थी”  इस “अन कहे दर्द” को कुछ लोग भांप भी लेते थे बोलते थे क्या बात है आप इतनी खुश तो दिखती हैं, पर—– कहीं … Read more

प्रायश्चित – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

इतने बड़े वर्मा निवास के पीछे वाले कमरे में राजेश जी उपेक्षित से अपने बिस्तर पर अकेले ही लेटे हुए थे। डॉक्टरी रिपोर्ट के अनुसार अब उनको डायलिसिस के लिए प्रत्येक  15 दिन में जाना पड़ेगा। रोज सुबह एक अटेंडेंट उनको नित्यकर्म से निवृत करवाकर रात के लिए डायपर बांधकर चला जाता था। आज जब … Read more

मातृत्व सुख – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

आज अन्वी फिर से उदास थी। वो जब भी बाहर पार्क से आती है , उसका यही हाल होता है।एक अनकहा दर्द उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था। वो किसी से कुछ न कहती पर प्रीत उसका पति उसके चेहरे को देखकर ही समझ जाता कि आज कुछ हुआ है और आज भी … Read more

खिलाड़ी – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

  “कहाँ पर वर्क कर रही हो..,मतलब किस कंपनी में…..”नितिन के फ्रेंड अमित ने पूछा, तो लतिका की आँखों में एक अनकहा दर्द उभर आया, लेकिन अपने को संभाल कर मुस्कुरा कर बोली “कहीं नहीं….”…।.रसोई में आ आँखों के किनारे लटके उस बूंद को साफ कर ली, जो अक्सर उसकी आँखों के कोर पर लटक आते.., … Read more

माँ की ढाल – रश्मि श्रीवास्तव शफ़क़ : Moral Stories in Hindi

मीरा बालकनी में खड़ी बारिश की बूंदों को निहार रही थी और मन में कहीं घनी बारिश का शोर था।अबतक बस सहते चले आना का दर्द इस कदर भर गया था कि कब आँसू छलक कर बहने लगे थे,उसे पता भी नहीं चला अचानक कंधे पर एक स्पर्श पाकर वह चौंकी और सामने अपनी पुरानी … Read more

दूसरा पड़ाव – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

शाम के पाँच बजे ही आसमान में एकदम अंधेरा सा छा गया था। लगता था तेज आंधी या बरसात आने वाली है। घुमड़ घुमड़कर काली घटाएँ आसमान पर चढ़ी जा रही थीं। पंछियों के झुंड किसी आपदा की सी आशंका से समूह बनाकर आकाश में उड़ान भरने लगे थे। “एक रोटी और लाऊं क्या साब।” … Read more

काठ सी सख्त जिंदगी – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

आस्ट्रेलिया से लौटते हुए मिहिका विमान में बैठी अभी दोपहर बाद के बारे में ही सोच रही थी, रह रह कर उसे मिली ये ट्राफी  खुशी का अहसास करा जाती थी। वह सुबह वह दो दिन आस्ट्रेलिया में रही, आस्ट्रेलिया उसे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। … Read more

error: Content is protected !!