“माँ की सीख ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“भाभी कैसा खाना बनाया है आपने आपको जरा भी खाना नही बनाना आता क्या हद है पता नही भैया कैसे झेल रहे आपको !” शादीशुदा ननद मायके मे भाभी से बोली। ” दीदी अभी मुझे यहां का हिसाब नही मम्मी जी भी घर पर नही थी और आपको तो पता है मेरी तबियत भी ठीक … Read more

पैसे का गुरूर – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

हमारे मुहल्ले में सप्ताह में दो दिन हाट लगता था।मंगल और शुक्रवार को ।हमलोग अक्सर हाट से एक हफ्ते की सब्जी खरीद लेते थे।उसदिन मंगल वार था और मेरे पति आफिस से खाने के लिए दोपहर में आये तो कहा “लाओ थैला और पैसे, सब्जी ले आता हूँ ।अभी ताजी ताजी सब्जी मिल जायेगी ।मैंने … Read more

संस्कार – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

    ताईजी  आपने हर वस्तु ,हर रिश्ते से ऊपर पैसे रखे है मुझे मम्मी और पापा ने पैसों से ज्यादा इंसानियत को महत्व देना सिखाया है । गगन की बात सुनकर आशा जी कुछ सोच में पड़ गई। सच ही तो है आज गगन को नहीं अपितु उनको ही गगन की जरूरत है। अच्छा चलता हूं … Read more

वो ममतामयी सास तो मैं ममतामयी बहु – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

ट्रिन ट्रिन ट्रिन काॅलवेल की आवाज सुनकर रमा देवी इटके से उठकर बड़बड़ाती दरवाजे की तरफ लपकी अरे भई कौन है? आ रही हूँ …ऐसा नहीं एक बार बजा दें, स्विच पर हाथ रखा नहीं तब तक नहीं हटाते जब तक कि दरवाजा न खुल जाए।दस काम रहते घर में करने को और ऊपर से … Read more

हैसियत ! – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

अंजना देख रही थी कि रागिनी और रमन के पांव आज जमीन पर नहीं पड़ रहे । उनके बच्चे भी खुशी से  इठलाते हुए घर-भर में घूमते फिर रहे थे। खुशी होती भी क्यों न उन्हें ? ‘किराएदार’ शब्द में छिपी सामाजिक अवहेलना तथा उसके कटु अनुभवों को झेलते हुए आज एक लंबे समय के … Read more

गुनाहों का कभी प्रायश्चित नहीं होता – प्रतिभा भारद्वाज ’प्रभा’  : Moral Stories in Hindi

“मां जी क्यों न हम एक बच्चा गोद ले लें….” “बहू, तुम्हें होश भी है कि तुम क्या कह रही हो….बच्चा गोद ले लें…..तुमने ये सोच भी कैसे लिया कि मैं किसी और का बच्चा गोद लेने के लिए मान भी जाऊंगी… ये बात अलग है कि तुम ही हमें बच्चे का सुख नहीं देना … Read more

कुंभ स्नान – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

“मां पापा, मैंने टिकट आरक्षित करवा लिया है। हम सभी कुंभ चल रहे हैं !”  “मगर बेटा वहां तो बहुत ठंड होगी ना और फिर तुम्हें तो पता है कि हम लोगों को कितनी जल्दी ठंड लगती है बगैर होटल के रहना मुश्किल बगैर गाड़ी के चलना मुश्किल तुम्हारा बहुत खर्च हो जाएगा।” “पापा आप … Read more

The Hidden Pain-श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“माई मैं जा रही हूॅंं।” कस्बे के सरकारी स्कूल में टीचर प्रतिभा ने घर का गेट खोलते हुए कहा। “अरे! रुक लाडो। इतनी हड़बड़ी में कहाॅं भागे जा रही है?” “स्कूल जा रही हूॅंं, माई।” “लेकिन, इत्ती सुबह-सुबह। अभी तो 6:00 बजे हैं। स्कूल तो 8:00 बजे लगे हैं ना!” “हाॅं माई। लेकिन, आज हमारे … Read more

मुक्ति- बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

आज पापा की आरिष्टि है।पापा खुद नगर में लोकप्रिय रहे है और मैं स्वयं प्रतिष्ठित डॉक्टर हूँ तो इस कारण नगर के काफी लोग हमारी कोठी के बड़े से लॉन में एकत्रित हुए हैं।एक प्रकार से यह एक शोक सभा हो गयी है।नगर की कई संस्थाओं ने अपने अपने शोक प्रस्ताव भेजे हैं, जिन्हें पढ़ने … Read more

छोटू – विभा गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

एक समय था जब हम सभी को नानी का घर स्वर्ग के समान लगता था।नाना-नानी की गोद में बैठकर कहानियाँ सुनने और मामा-मामी से छोटी-छोटी चीज़ों के लिये ज़िद करने में एक अलग ही आनंद आता था।        चार भाई-बहनों में मेरी माँ सबसे बड़ी थीं, इसलिये  ननिहाल में मैं सबका लाडला था।तीन साल तक तो … Read more

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