यह आजकल के बच्चे (भाग-6) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

अब आगे… चिंकी के घर वालों को मना कर रोहन के घर के सभी  लोग गाड़ी में आकर बैठ गए हैं … अभी भी रोहन का मन बेचैन था… वह बोला.. दीदी.. आज तक मैंने  आपकी किसी बात को नहीं काटा… हमेशा आपकी बात मानी है .. बट सॉरी टू  से.. लेकिन आपका इस तरह … Read more

यह आजकल के बच्चे (भाग-5) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

अब आगे… चिंकी रोहन के घर वालों को और शायद रोहन  को भी  पसंद नहीं आई थी.. वह लोग आपस में डिस्कस कर रहे  हैं… चिंकी के घर वाले खाने की व्यवस्था कर रहे हैं … गरमा गरम पूड़िया छन  रही है… तभी चिंकी के घर का लड़का बबलू यह  बात सुन लेता है.. कि  … Read more

यह आजकल के बच्चे (भाग-4) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

अब आगे … चिंकी को घर की दो औरतें लेकर आ रही  हैं.. नजरे झुकी हुई,,हरे रंग की चमक वाली  साड़ी पहने हुए आ रही है चिंकी… जिसे देखकर रोहन हक्का-बक्का रह गया… बैठो बेटा.. वीरेंद्र जी बोले… बटुक नाथ जी की सहमति मिलने पर  चिंकी सामने पड़े सोफे पर बैठ गई… रोहन चिंकी के … Read more

यह आजकल के बच्चे (भाग-3) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

अब आगे.. रविकांत जी ,उनका बेटा रोहन ,पत्नी मीना,बेटी मनोरमा और उसके बच्चे सब गाड़ी में बैठ चुके हैं … अलीगढ़ आ गए हैं .. रास्ते में  उन्होंने अपने बड़े भाई साहब के यहां  रुक कर थोड़ी देर विश्राम किया … फिर उन्हें भी अपने साथ लेकर के  रोहन के लिए लड़की देखने लड़की वालों … Read more

यह आजकल के बच्चे (भाग-2) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

अब आगे … रविकांत जी अपने बेटे रोहन के फोन की चैट पढ़ लेते हैं… वह किसी लड़की से कह  रहा है … कि तुमसे ही शादी कर लेता … तो ठीक था… पीछे अपने पापा  को देखकर रोहन सकपका जाता है … पापा  आप… सब ठीक तो है …?? हां all is ok… ये  … Read more

यह आजकल के बच्चे (भाग-1) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

जीजा जी.. कोई भी लड़की  समझ में आई क्या अपने रोहन को..?? साले संतोष ने अपने जीजा जी रविकांत जी से फोन पर पूछा… तुझे  तो सब पता है… क्या ही बताऊं… हर जगह तो बायोडाटा पड़ा है रोहन का … अखबार में.. न्यूज़पेपर में.. मैट्रिमोनी पर… लेकिन फिर भी कहीं बात नहीं बनती … … Read more

बाप के जतन – प्रवीण सिन्हा : Moral Stories in Hindi

  चाय पीकर मैं अखबार पलट हीं रहा था कि अचानक मोबाईल की घंटी बजी, हलो कहने पर उधर से रोशन लाल के पुत्र की आवाज आई , अंकल दादा जी नही रहे। मेरे लिए क्योंकि उनकी तबियत लम्बे समय से खराब थी बेटा अंतिम संस्कार कब होगा आज ही 12 बजे होगा कह कर मोबाईल … Read more

स्वावलम्बी बेटियां – नेमीचन्द गहलोत, : Moral Stories in Hindi

बालिकाएं अपने सिर पर जल से भरे कलश रख पन्द्रह दिन तक चलने वाले पर्व पर गीत गाते गणगौर पूजने जा रही थी ।  पुराने खेजड़े के नीचे वे कलश रख कर शिव पार्वती के रूप में गवर व ईसर की पूजा करती थी । हरी हरी दूब से पानी की छींटे बरसाकर वरदान मांगती  … Read more

विष उगलना – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

वाह श्रेया वाह, मैंने तुम्हें कभी अपनी नन्द की नज़रों से नहीं, अपनी बेटी की नज़र से देखा है।।  माँ जी के गुज़र जाने के बाद तुम्हें उनकी कमी महसूस न हो इसलिए मैंने तुम्हें अपनी बेटी की तरह पाला, सिर्फ 8 बरस की थी तुम जब माँ जी इस दुनिया से चली गई थी।  … Read more

गुरुर – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” पापा आपको आपके पैसो का बहुत गुरुर है ना तो रखिये इन्हे संभाल कर नही चाहिए मुझे , आपको अपने बेटे से ज्यादा पैसे प्यारे है इसलिए बेटे की खुशी कोई मायने नही रखती आपके लिए कैसे पिता है आप  !” तनुज के इतना बोलते ही सकते मे आ गये पिता राजेश और माँ … Read more

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