लकीर के फकीर  –  डॉ अंजना गर्ग

“अन्नू तुम घर में बैठी हो, क्या नमानी एकादशी के नाम का शरबत गरीबों को पिला आयी या अभी जायेगी ?” संतोष ने अन्नू के घर में घुसते ही अन्नू पर कई प्रश्न दाग दिए। ” नहीं , पर आज ही क्यों संतोष ? अन्नू ने सहज भाव में पूछा। ”  आज के दिन का … Read more

विक्रम- बेताल (भाग 1) – साधना मिश्रा समिश्रा

सरसराती हवा, अमावस्या की रात, जंगल से उठती सांय-सांय की आवाज… कभी कोई  वानर कूद जाता पेड़ की डगाल से सोते-सोते तो ऐसा लगता कि तूफान ही आ गया है । लेकिन विक्रम तो ठहरा हठयोगी, निर्विकार,  निर्विचार…पर निर्विचार तो कोई भी नहीं होता है। हाँ…यह सत्य है कि निर्विचार तो कोई नहीं होता है…कोई … Read more

आत्म विवाह (self marriage) – गरिमा जैन

मांग में सिंदूर ,हनीमून का पैकेज, मेहंदी, हल्दी ,सारी रस्में! पर साथ कोई भी नहीं !हमसफर कोई नहीं!.आज अखबार में जब पढ़ा कि गुजरात की एक 24 वर्षीय लड़की ने आत्म  विवाह यानी खुद से शादी करने का फैसला किया है तो मन बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो गया । ऐसा विवाह भारत के … Read more

समझदार -अनुज सारस्वत

“आकृति आखिरी बार कह रहा हूँ मान जाओ ,तुम्हारे चक्कर में कितना किया है मैने ,अपना शहर छोड़कर तुम्हारे शहर में कोर्स करने के बहाने आया ,चार साल का रिलेशन है ,तुम्हें बहुत चाहा है मैनें और तुम कह रही हो अब कोई रिलेशन नही रखना तुम्हें करियर बनाना है ,अपने घर वालों के हिसाब … Read more

गुलाबजामुन – नीरजा कृष्णा

घर में खूब हँसी खुशी का माहौल है,हो भी क्यों ना! आज रवि की बहू मधु की मुँहदिखाई की रस्म होने जा रही है| पास पडौ़स की महिलाऐं तथा घर की सब बड़ी बुजुर्ग महिलाऐं एकत्रित हो गई थी,अद्वितीय रूप की मालकिन मधु की सब बलैया ले रही थी,वो सबको बहुत पसंद आई ।मालती जी … Read more

भरवाँ बैंगन – नीरजा कृष्णा

“अरे, सुबह से क्या खटर पटर कर रही हो?” अलसाए हुए माधव जी ने अपनी पत्नी मीरा को टोक ही दिया।   “वो… वो…कुछ खास नहीं। आज मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है। फिर आठ दस कुछ देख सुन नहीं पाऊँगी ना।”   वो चिढ़ गए,”इतनी सुबह फ्रिज में क्या हीरे मोती देख सुन रही हो?” … Read more

पापा की परी –  ऋतु अग्रवाल

आजकल यह शब्द बहुत सुनने को मिलता है पापा की परी।तो मेरी कहानी इसी “पापा की परी” पर आधारित है।     मृदुला और निशी अपनी स्कूटी से बाजार जा रहे थे। उनके पीछे वाली स्कूटी पर दो लड़के बैठे थे जो कोई वीडियो बना रहे थे। काफी देर से मृदुल और निशी की स्कूटी आगे-आगे और … Read more

जीम के जाना – सुनीता मिश्रा

मैने सुबह ही होटल से चेक आउट कर लिया।सोचा कंपनी का काम निपट चुका है ,शाम की फ्लाईट है तो पूरा दिन अपने बचपन के दोस्त राकेश के साथ बिताऊँगा ।अपने आने की खबर मैने उसे कल रात मे फोन पर दे दी थी। उसके घर जब मै पहुँचा तो देखा पुराने छोटे से घर … Read more

अमर प्रेम – रंजना बरियार

हरी मख़मली घास की शीतल छुअन निर्मला जी के तन मन को  शीतल कर रही है। तपती दोपहरी, उसपर से बत्ती गुल, किसी तरह से धीमी गति सें पंखे का घूमना.. बड़ी मुश्किल से दोपहर कट पाई थी..अब सूरज का अस्ताचल हुआ है..माली अभी-अभी लॉन में पानी पटा कर गया है, निर्मला जी और राकेश … Read more

उपहार- मनवीन कौर

शांता बाई मेरे आने से पहले ही ऑफ़िस झाड़ पोंछ कर तैयार रखती थी ।सुगंधित ताजे फूलों का गुलदस्ता मेरा स्वागत करता नज़र आता। मेरे आते ही अभिवादन कर अलमारी से फ़ाइल निकाल  कर मेज़ पर रख देती थी ।कोई काम कहो ,”जी मेडम ,”कह कर  तुरंत काम में लग जाती । बड़ी प्यारी  बच्ची … Read more

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