स्नेह का बन्धन – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

गुरुग्राम की ऊँची इमारतों के बीच “गैलेक्सी हाईट्स” नाम की एक सोसाइटी थी। ऊपरी मंज़िल पर रहने वाली अन्विता मेहता की ज़िंदगी चमचमाती लाइटों जैसी थी—शानदार, तेज़ और ख़ूबसूरत। उसके पिता रजत मेहता बड़े उद्योगपति थे और माँ संध्या मेहता समाजसेवा से जुड़ी थीं। इसी सोसाइटी की सबसे निचली मंज़िल पर कमला देवी अपने परिवार … Read more

ईर्ष्या – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

 गीता का  घर के किसी भी काम मे मन नहीं लगता था.। माँ के कहने पर वह बिना मन के जैसे तैसे कर के काम निबटा देती थी। देखने मे भी वह साधारण ही थी। उसके रवैये से उसकी माँ परेशान रहती थी तथा चिंता करती थी कि पता नहीं इसकी शादी कैसे होंगी, इसे … Read more

स्नेह का बंधन – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

   कल राखी है। समझ नहीं आ रहा है कि माधुरी के लिए उपहार कहाँ से लाऊंगा? बिजनेस पूरा ठप पड़ा है। अब तो घर खर्च के लिए भी सोचना पड़ रहा है। समय अनुकूल हो तो सभी मित्र होते है लेकिन जैसे ही परिस्थिति विपरीत होती है सगे संबंधी भी पराये हो जाते है। जाने … Read more

बुआ दादी की पोटली – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

इस बार ये पहला मौका है जब भाभी की अनुपस्थिति में मायका जाने का मौका मिलेगा । पाँच साल हो गए सुमित्रा भाभी को गुजरे हुए तब से इस बार भाभी के पोते की शादी में जाने का निमंत्रण आया है । जाना तो पड़ेगा ही, भतीजे की शादी के बाद ये पहला मौका होगा … Read more

रिश्ते- स्नेह प्यार और परिवार – शैलेश सिंह “शैल,, : Moral Stories in Hindi

संयोगिता का विवाह  एक बड़े घराने में तय हो हुआ था। घर में रौनक ही रौनक थी। लड़के वालों को जैसी लड़की चाहिए थी संयोगिता बिल्कुल वैसी ही थी। संयोगिता के दूर के फूफा जी ये रिश्ता करवा रहे थे। बार-बार पूछने के बाद भी अभी तक फूफा जी ने राजेश जी को दहेज का … Read more

दहन – डॉ ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

    “बहू! मीता!” कमरे में बैठी मीता की सास दमयंती ने मीता को पुकारा।         “जी! आ रही हूँ, मम्मी।” साड़ी का आँचल कमर में खोंसती मीता ने रसोईघर से उत्तर दिया।          “आकर क्या करेगी? ग्यारह बज रहे हैं। अभी तक होली- पूजन के पकवान नहीं बने। बताओ तो ज़रा, कब होली पूजने जाएँगे हम? मुझे तो … Read more

सुबह का भूला – संजय मृदुल : Moral Stories in Hindi

फाइव स्टार होटल जैसा बड़ा अस्पताल, लॉबी में भीड़-भाड़ के बीच अल्पना अकेली बैठी है, कॉफी शॉप की एक टेबल पर। कॉफी से उठता धुँवा अल्पना की आंखों में उतर आया है। अल्पना के चेहरे पर तनाव झलक रहा है। अस्पताल का माहौल ऐसा होता है कि वहां अच्छे भले इन्सान का दिल बैठ जाए। … Read more

स्नेह का बंधन – ऋतु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मां तुम बाबू जी को मना लो ना…. कम से कम एक बार तो अपने बेटे बहू के पास आकर रहें। यदि मन नहीं लगे तो बेशक मैं खुद वापस गांव छोड़ने चला आऊंगा। विभु ने अपनी मां कल्याणी जी से ऐसा कहा तो कल्याणी जी ने जबाव दिया…. बेटा तू तो जानता ही है … Read more

स्नेह का बंधन – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

अखिल से मैं जब भी परिवार के बारे में बात करती हूँ वे मुझ पर यह कहकर भड़क जाते थे कि तुम मेरे परिवार को पसंद नहीं करती हो इसलिए उनके बारे में अनाप शनाप बोलकर मेरा दिल तोड़ देना चाहती हो । उनसे मुझे दूर कर देना चाहती हो जो मैं नहीं होने देना … Read more

मायके की तुलना – गीतू महाजन : Moral Stories in Hindi

छोटी बहू की डोली आंगन में आ चुकी थी।नलिनी जी बाकी औरतों के साथ घर के द्वार पर बहू के स्वागत के लिए आ गई थी।प्यार से बहू को घर के अंदर लेकर आई और बाकी सारी रस्में निभाकर वह अब मन ही मन बहुत खुशी और संतोष अनुभव कर रही थी।उन्हें लग रहा था … Read more

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