समझदार बच्चे,नासमझ मां – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

राखी की हम उम्र ननद (सुजाता) ने फोन पर बताया कि वह अपनी बेटी के साथ आ रही है।राखी की शादी के समय वह कुंवारी थी।ससुराल में आकर वही एक सच्ची सहेली बनी थी।राखी और सुजाता की खूब पटती थी। ससुराल में सास-ससुर और पति के साथ सामंजस्य बिठाने में,सुजाता ने अपनी भाभी की बहुत … Read more

पराया अपना क्यों लगता है? – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

कोई है? हेलो! कोई है अंदर? नेहा खुले दरवाजे को देखती उस अनजाने घर में घुसती चली जा रही थी। बड़ी सुंदरता से डेकोरेट हो रखा है ये घर..जिसका भी है उसका सुरुचिपूर्ण स्वभाव है,उसने प्रशंसा के भाव लाते इधर उधर झांका पर कोई दिख नहीं रहा था वहां। जिज्ञासा से वो एक अधखुले कमरे … Read more

उपहार की कीमत नहीं देनेवाले की नीयत देखी जाती है – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

गोल्डन पब्लिक स्कूल की  बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी। अचानक   एक रजिस्टर  लेकर आए क्लर्क   धीरज भैया से  आकांक्षा ने पूछा ये क्या है भैया ?   धीरज भैया हँसते हुए बोले खुद देख लीजिए मिस  पता नहीं क्या है । आकांक्षा ने रजिस्टर लेकर पढ़ना शुरू किया ।  डियर टीचर्स  प्लीज … Read more

उपहार की कीमत नहीं दिल देखा जाता है – राजेश इसरानी : Moral Stories in Hindi

मां आज मेरी सबसे खास सहेली का जन्म दिन है। उसने शाम को सात बजे अपने घर पार्टी में बुलाया है।  क्या तोहफा लेके जाऊ, बताओ न मां। वो बहुत अमीर लोग है तुम उनके लिए क्या लेके जाओगी। वहां सब बड़े बड़े लोग आयेंगे बड़े बड़े तोहफे लेके उनके सामने तुम्हारा तोहफा कुछ मायने … Read more

सूरज का भ्रूण! – कुसुम अशोक सुराणा : Moral Stories in Hindi

भोर की आहट के साथ ही स्वरा ने गुदढी को दूर फेका और वह नित्य कर्म से मुक्त हो कर गुसलखाने की ओर बढ़ गई! कड़कड़ाती ठंड में भी वह बर्फ से ठंडे पानी से नहाई और बालों को झटक कर सूखाने लगी! घुंघराले बालों की लटों से मानों ओस की बुंदे गालों पर लुढ़क … Read more

तोल-मोल – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

रेखा जी अपनी बेटी शमा के साथ बैठ एक-एक उपहार खोलकर तोल-मोल कर रही थी। नव विवाहिता बेटा बहू घुमने गये थे। शमा भी हर उपहार पर अपनी टिप्पणी दे रही थी। “मम्मी, देखो ये पुराने जमाने का पर्स। कलर भी कितना फीका-फीका है। लगता है, चार सौ, पांच सौ से ज्यादा नहीं होगा।” ” … Read more

स्नेह का बंधन – मीरा सजवान ‘मानवी’ : Moral Stories in Hindi

गर्मियों की वह शाम हल्की सुनहरी धूप में नहाई हुई थी। गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बुज़ुर्गों की चौपाल जमी थी और पास ही बच्चे उछल-कूद कर रहे थे। वहीं, चौपाल से थोड़ा दूर, आँगन में बैठी शुभा अपने पुराने संदूक में कुछ तलाश रही थी। संदूक की लकड़ी वक्त के साथ … Read more

स्नेह का बंधन – नेमिचन्द गहलोत : Moral Stories in Hindi

घर के मुख्य दरवाजे पर गाड़ी की आवाज सुनकर साक्षी की छोटी भतीजी रतन ने भागकर मैन गेट खोला तो खुशी से झूम उठी ” लाडू आई … लाडू आई ।”  उसने उसे अपनी बुआ से लेकर अपने सीने से लगा लिया । दो वर्ष की बच्ची भी रतन से स्नेह पूर्वक लिपट  गयी । … Read more

अनजानी – प्रशांत तिवारी : Moral Stories in Hindi

जान पहचान मिलना जुलना रिश्ते संबंध सब पहले से तय है  मगर कुछ लोग जो अचानक जीवन में आते हैं उसके पीछे कोई कारण ज़रूर होता है वो इंसान या तो कुछ सबक दे कर जाता है या सीख  आइए जानते हैं मेरी इस अनोखी कहानी में जिसे लिखने का एक छोटा सा प्रयास मेरे … Read more

बहू से तो हमेशा का स्नेह का बंधन होता है। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

शिखा तुम यहां धूप में क्यों बैठी हो? नई नवेली बहू ने घर से बाहर कर दिया क्या? देखो तो भला इस समय कौन इस तरह पार्क में बैठता है, घर में दस काम होते हैं, अभी तो यहां कोई सहेली भी नहीं है, जिसके साथ बैठकर गप्पे लड़ा सकें, मनिता जी ने हंसते हुए … Read more

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