आसमान की ओर मुस्कान – ज्योति आहूजा :

कविता की आदत थी कि हर रात सोने से पहले छत पर जाकर आसमान देखे। टिमटिमाते तारों को ताकते हुए उसके मन में एक ही सवाल बार-बार उठता— “अगर मैं कल न रही… तो मेरे बच्चों का क्या होगा?” उसका जीवन बच्चों में ही बसता था। सुबह से लेकर रात तक उनकी हँसी, उनकी पढ़ाई, … Read more

सीख – नीरज श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

“झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती। सूझबूझ और संघर्ष का नाम जिंदगी है। जो जीवन में इतिहास रचते हैं वह लोगों की परवाह नहीं किया करते। वह तो बस अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं।…….”          नीरज ने अभी इतना ही कहा था कि रोहित वहाँ से नाराज हो उससे दूर चला गया। नीरज ने … Read more

पता नहीं तुम लोगों को कैसे संस्कार मिले हैं – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

वैसे तो मंजूजी अपने पोतों, पारस और मानस से बड़ा लगाव रखती थीं पर जब भी उनसे नाराज़ होतीं,तो अपनी बहू आभा को ज़रूर लपेट लेती थीं। आभा चाहे उस जगह पर मौजूद हो या न हो,अगर बच्चे कुछ भी शैतानी करते,तो बच्चों को डांटने के साथ साथ उनसे कहतीं,”पता नहीं तुम लोग कैसे हो,हमारे … Read more

आईना – गीतू महाजन, : Moral Stories in Hindi

मालती तैयार होकर आईने के सामने खड़ी थी। सलीके से बंधी साड़ी और हल्के मेकअप में उसका व्यक्तित्व निखर उठा था। आज आईने में एक सफल बिज़नेस वूमेन और समाज सेविका का प्रतिबिंब था.. जिसके चेहरे पर उसकी सफलता की चमक और समाज के लिए कुछ कर पाने की तसल्ली झलक रही थी। आईना वही … Read more

क्या दो दामाद भी आपस में जलन रखते हैं – गीतू महाजन : Moral Stories in Hindi

मेहरा परिवार में आज सुबह से चहल-पहल थी।सुधाकर जी और उनकी पत्नी सुधा जी कल से ही तैयारियों में लगे थे।बेटा वैभव और बहू शालिनी भी उनके साथ कामों में मदद करवा रहे थे।दरअसल बात यह थी कि सुधाकर बाबू की छोटी बेटी प्रीति और दामाद देवेश जी अहमदाबाद आ रहे थे।देवेश जी को दफ्तर … Read more

सेवा

“अब तो यही दिन देखना बाकी रह गया था!” — बड़ी बहू रागिनी घर में घुसते ही जोर से बोली। रविवार की शाम थी, सभी लोग घर पर ही थे। “अब क्या हो गया? क्यों सबकी शाम खराब कर रही हो?” — गुस्से से अंकित ने रागिनी से पूछा। “इतने दिन तक तो मैंने मुंह … Read more

सजना है मुझे सजना के लिए – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“यार, इस कोरोना ने तो त्योहारों का मजा ही किरकिरा कर दिया है।”निधि ने अपनी फ्रेंड नीतू से कहा। “सही कहा।हफ्ता भर बाद ही तो करवा चौथ है, लेकिन ना पार्लर ना शॉपिंग।हर बार तो कितनी धूमधाम होती थी। नीतू ने हाँ में हाँ मिलाई। “क्या बातें हो रही है?” तभी मीनल ने उनके पास … Read more

पता नहीं तुम लोगों को कैसे संस्कार मिले हैं – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

वैसे तो मंजूजी अपने पोतों, पारस और मानस से बड़ा लगाव रखती थीं पर जब भी उनसे नाराज़ होतीं,तो अपनी बहू आभा को ज़रूर लपेट लेती थीं। आभा चाहे उस जगह पर मौजूद हो या न हो,अगर बच्चे कुछ भी शैतानी करते,तो बच्चों को डांटने के साथ साथ उनसे कहतीं,”पता नहीं तुम लोग कैसे हो,हमारे … Read more

आत्मनिर्भर – अंजना शर्मा : Moral Stories in Hindi

श्रीमती शुक्ला अभी कुछ माह पहले ही केन्द्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई है। शुरू से ही क्योंकि मायके में भी पिताजी हेडमास्टर थे मिडिल स्कूल के तो घर का वातावरण बहुत अनुशासित था, तो सुनीता शुक्ला जी को भी आदत थी अपने सभी काम समय पर और ख़ुद से ही करने की । अब बेटा … Read more

बिखरी हंसी, बिखरा मन – ज्योति आहुजा : Moral Stories in Hindi

सुबह के 6:00 बजे थे। अलार्म की घंटी लगातार बज रही थी। “उफ्फ! अदिति। अलार्म की घंटी कब से बज रही है, इसे बंद करो। मेरी नींद खराब हो रही है।” आधी नींद में बड़बड़ाते हुए अर्जुन ने अदिति से कहा। अदिति ने जैसे-तैसे अलार्म बंद किया और बहुत ही बेमन से उठी और हाथ-मुँह … Read more

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