शारदा जी की एक ही इच्छा थी—उनके घर में एक प्यारी-सी बेटी हो। उनके चार बेटे थे। घर में बेटों की किलकारियाँ तो खूब गूँजती थीं, लेकिन बेटी का सुख उन्हें नहीं मिला था।
शारदा जी को बेटियों से बहुत लगाव था। उन्हें हमेशा लगता कि काश, उनके घर में भी एक नन्ही-सी गुड़िया होती, जिसकी चोटी बनातीं, उसे सजातीं और त्योहारों पर उसके हाथों में मेहंदी लगातीं। सबसे बड़ी कमी उन्हें राखी के त्योहार पर महसूस होती। घर में कोई बहन नहीं थी, इसलिए उनके बेटों की कलाइयाँ अक्सर सूनी रह जाती थीं। कभी किसी चाची या बुआ के घर से कोई लड़की आती, तो वह राखी बाँध देती, वरना भाइयों की कलाइयाँ सूनी ही रह जातीं।
राधा बल्लभ जी की बाजार में एक बड़ी और अच्छी चलने वाली दुकान थी। शारदा जी घर की गृहलक्ष्मी थीं। चारों बेटे पढ़-लिखकर अपने-अपने काम और नौकरी में आगे बढ़ रहे थे। धीरे-धीरे घर में बहुएँ भी आ गईं और परिवार और भी बड़ा हो गया।
तीनों बहुओं की पहली संतान बेटी हो—यह इच्छा पूरे परिवार के मन में थी। खासकर जब छोटी बहू गर्भवती हुई, तो सबकी निगाहें आने वाले नन्हे मेहमान पर टिकी थीं। सबके मन में एक ही प्रार्थना थी—इस बार हमारे घर एक बेटी आए।
और फिर वह शुभ दिन आ ही गया।
घर में एक नन्ही-सी गुड़िया ने जन्म लिया।
उसके आने की खबर सुनते ही पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा लगा जैसे वर्षों से जिस खुशी का इंतजार था, वह आज उनके आँगन में उतर आई हो।
उस नन्ही परी का नाम रखा गया—मीरा।
मीरा बहुत ही प्यारी, चंचल और लाडली बच्ची थी। चारों भाइयों की तो जैसे जान ही बसती थी उसमें। भाइयों को अपनी बहन मिल गई थी और घर को उसकी बेटी। चारों भाई उसे अपनी आँखों का तारा मानते और हर समय उसके साथ खेलने के बहाने ढूँढ़ते रहते।
शारदा जी के लिए तो मीरा उनके जीवन का सबसे खूबसूरत उपहार थी। वह उसे अपनी गोद से उतरने ही नहीं देतीं। मीरा की छोटी-छोटी बातें, उसकी मासूम मुस्कान और उसकी शरारतें पूरे घर को हँसी से भर देतीं।
राधा बल्लभ जी अक्सर कहा करते थे—
“जिस घर में बहन और बेटी न हो, वह घर सूना-सूना सा लगता है।”
मीरा के आने के बाद उनके घर की यह कमी हमेशा के लिए पूरी हो गई। अब घर में उसकी खिलखिलाहट गूँजती थी, भाइयों की कलाइयों पर राखी सजती थी और हर त्योहार उसकी चहक से और भी सुंदर हो जाता था।
मीरा भी अपनी भोली और प्यारी बातों से सबका मन मोह लेती थी। घर का हर सदस्य उसे बहुत चाहता था। सच तो यह था कि मीरा के आने के बाद उस घर की रौनक ही बदल गई थी।
जिस घर में कभी बेटी की कमी महसूस होती थी, उसी घर की सबसे बड़ी खुशी अब मीरा बन चुकी थी।
और इस तरह, एक नन्ही-सी बेटी ने पूरे परिवार के जीवन में प्रेम, खुशियाँ और अपनापन भर दिया।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी — खुशी