ऐसे धब्बे की परवाह नहीं* : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : नित्या को ससुराल छोड़ आये देख दादी उस पर गुस्सा हो रही थी। बार बार कह रही थी-  “चौधरी परिवार पर धब्बा लगाएगी तलाक का।  आज तक इस परिवार में कभी किसी ने तलाक नहीं लिया है।  सब ने चाहते न चाहते हुए एडजस्ट किया है । अपनी बुआ रानो … Read more

इज्जत : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “अरे यह काम वाली नहीं आ रही। घर में कितना काम है।”  ‌‌मनीषा झल्लाते हुए कहती है। मनीषा की सास सावित्री जी पलट कर कहती हैं,”इन कामवालियों पर तो बहाने ही होते हैं। नैना की गोद भराई है परसों। कौन संभालेगा इतना काम” अगले दिन काम वाली बाई मुंह को … Read more

चारधाम की यात्रा – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : सुमन जी और उनके पति गोविन्द जी जिस‌ मोहल्ले में रहते थे,उस मोहल्ले में सभी लोग धार्मिक प्रवृत्ति के थे। हमेशा धार्मिक आयोजन जैसे सुन्दरकाण्ड का पाठ, अखण्ड रामायण पाठ, भजन संध्या, संत महात्माओं के प्रवचन आदि होते रहते थे, सभी सामुहिक रूप से उसमें भाग लेते, और भक्तियुक्त वातावरण … Read more

माँ या बदनुमा धब्बा – वीणा सिंह  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : भीखू ईंट भट्ठा के चिमनी पर दिहाड़ी मजदूरी करता था. पत्नी दुलारी दो बेटी शीला और संजू एक बेटा संतोष पांच लोगों का परिवार.. दुलारी घर घर बर्तन साफ करने और झाड़ू पोंछा का काम करती थी.. शीला ग्यारह साल की थी और संजू सात साल की संतोष चार साल … Read more

उम्मीद – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

डाक्टर साहब शुभि कैसी है? अभी होश आने मे टाइम लगेगा। एक्सीडेंट मे काफी खून बह गया है। खून चढ़ाना पड़ेगा। आप खून की व्यवस्था करिए यदि खून नही मिला तो आपकी बेटी की जान खतरा हो सकता है। डाक्टर साहब की बातें सुनकर सुजाता की धड़कन बढ़ जाती है तो वो कुर्सी पर बैठ … Read more

मायका कभी बूढ़ा नहीं होता – वंदना सिंह

वक्त के साथ सब बदल जाता है, मा‌ँ–बाप बूढ़े हो जाते हैं पर, मायका कभी बूढ़ा नहीं होता……   बचपन की ज़िद बदल जाती है समझौते में, न चाहते हुए भी ओढ़ लेती हैं जिम्मेदारियां, सब कुछ बदल सा जाता है पर मायका कभी बूढ़ा नहीं होता…..   कोमल हाथों के स्पर्श आज भी वही … Read more

उम्मीद के बादल – अर्चना कोहली “अर्चि”

“सुनो जी । लगता है, इस साल भी बरसात नहीं होगी। जमीं में फटी दरारें देखकर लगता है इस साल भी सूखे की मार झेलनी होगी। बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं। उन्हें देखकर कलेजा मुँह को आता है”। “कमली कलेजा तो मेरा भी फटता है, जब मुनिया और राजू मेरी और उम्मीद भरी नजरों … Read more

अब समझ आया पतिदेव – संगीता अग्रवाल

” ये क्या है श्रुति कितना अस्त व्यस्त रहने लगी हो तुम ये ढीले ढाले कपड़े श्रृंगार विहीन चेहरा और थका हुआ जिस्म कौन कहेगा हमारी शादी को एक साल ही हुआ है अभी !” ऑफिस से लौटे तनुज ने सोफे पर बैठी श्रुति से कहा। ” तनुज मैं मां बनने वाली हूं ये तुम … Read more

उम्मीद भरे हाथ – लतिका श्रीवास्तव

..आज फिर उम्मीद लगा बैठी थी सुरम्या कि कोई उसे मनाने आयेगा बिना बताए ही समझ जायेगा कि उसके मन को कौन सी बात मथ रही है लेकिन सुबह से शाम और रात हो गई सब अपने अपने में व्यस्त हैं रात में उसने खाना भी नहीं खाया विराग ने कुछ चिंता से पूछा था … Read more

सम्वेदना : बेटी की माॅ के प्रति – शिव कुमारी शुक्ला  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : मीता  तैयार हो ऑफिस के लिए निकल ही रही थी कि तभी पापा विजय जी की आवाज सुनवाई दी ।मीतू इधर आओ  बेटा मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है।  मीतू – पापा अभी मुझे देर हो रही है ऑफिस का समय हो गया है शाम को बात करते हैं।  … Read more

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