सूद समेत – अर्चना सक्सेना : Moral Stories in Hindi
इतने बरसों बाद अपने पौत्र को अपने सम्मुख खड़ा देखकर एकबार तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ सुहासिनी जी को, जब उसने आगे बढ़कर चरणस्पर्श किये और पूछा- “कैसी हो दादी?” तो आशीर्वाद देने को उनके दोनों हाथ उठ गये और अविरल अश्रुधारा बह निकली उनके नेत्रों से परन्तु मुख से बोल नहीं … Read more