आत्मग्लानि (अंतिम भाग) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : बेटा , बस यही वजह थी कि वह घर के कामों से बचने के लिए मुझे भी कहीं आने जाने नहीं देना चाहती थी , मैं जिसे उसका प्यार समझती थी वह उसका स्वार्थी पना था बस ओर कुछ नहीं , मुझे बड़ी देर से सब समझ में आया !! … Read more

आत्मग्लानि (भाग 3) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : एक दिन कावेरी जी फोन पर स्वरा से बोली कि कैसे वह घर के सारे काम काज संभाल लेती हैं और बहु नेहा नौकरी पर जाती हैं !! नेहा मुझसे बहुत प्यार करती हैं बेटा और कहती हैं सासु मां आप इस उम्र में भी कितनी एक्टिव हैं और इतना … Read more

आत्मग्लानि (भाग 2) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : स्वरा की सासू मां गायत्री जी बोली कि उन्हें स्वरा के नौकरी करने से कोई आपत्ति नहीं बस फिर क्या था स्वरा और राहुल का रिश्ता तय हो गया , शादी के बाद पंद्रह दिन तो घूमने फिरने और रिश्तेदारों के यहां आने जाने में निकल गए इसलिए स्वरा के … Read more

आत्मग्लानि (भाग 1) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : पापा नितिन के घरवाले नहीं चाहते कि मैं शादी के बाद नौकरी करूं और अगर नौकरी करूं भी तो घर के सारे काम मुझे ही करने होंगे ऐसा नितिन का कहना हैं इसलिए मैं नितिन से शादी नहीं करना चाहती स्वरा अपने पापा गिरधारी जी से बोली !! गिरधारी जी … Read more

आंगन की दीवार : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  “देखिए शांति जी, मैं प्यार से समझ रही हूं सीधी तरह मान जाइए, वरना गुस्सा मुझे भी आता है।”कस्तूरी ने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को कड़क करते हुए अपनी साथ वाली पड़ोसन शांति से कहा।   दरअसल शांति अपने नाम के बिल्कुल विपरीत थी। हर किसी से ऊंचा बोलना, अपना … Read more

ताउम्र ग्लानि रही : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  ” साहब…आज गरीबों में कपड़े और खाना-दवाइयाँ बँटवानी है।” बहादुर ने अपने मालिक से कहा।   ” हाँ बहादुर, याद है…हाॅल में रखे सभी सामानों को तुम गाड़ी में भरो..मैं अभी आता हूँ।” कहकर अविनाश ने बीस-पचास के नोटों का बंडल अपने पर्स में रखे, गर्म शाॅल अपने कंधे पर डाली … Read more

पैसों की खनक (भाग 2 )- डॉ.पारुल अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : उसका दिल तो बहुत दुखा था पर फिर भी उसने ये सोचा कि पापा ने उसकी पढ़ाई और शादी में बहुत खर्च किया है। पापा ने अच्छी शिक्षा देने के लिए कभी भी उस पर कोताही नहीं की। शायद अब उनकी कोई मजबूरी रही होगी,ऐसा सोचते हुए इस बात को … Read more

पैसों की खनक (भाग 1)- डॉ.पारुल अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : दिव्या के मायके से बार बार फोन आ रहे थे। वैसे तो उसकी शादी के बाद जबसे पापा के रिटायरमेंट हुआ है और भाईयों की अपनी गृहस्थी हुई है तबसे उसको बुलाने के लिए कभी इतने फोन नहीं आए फिर ये पिछले दो दिन से क्यों आ रहे हैं वो … Read more

तुम्हारे लिए …!! –  लतीका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : बधाई हो विष्णु आज तेरी वर्षों की तपस्या त्याग और मेहनत  सफल हो ही गई शिवदयाल ने विष्णुप्रताप को गले लगाते हुए जोर से बधाई दी तो बेटा भड़क उठा हुंह..!पापा की कौन सी त्याग तपस्या मेहनत अंकल!!इन्होंने आज तक किया ही क्या है मेरे लिए ये सब मेरी मेहनत … Read more

अंतर्मन की लक्ष्मी ( भाग – 32) – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

“हे भगवान! कैसी अतरंगी लड़की है। एक हमारी कोयल है, सारे काम नफासत से संभाल लेती है।” बुआ का विनया का कोसना शुरू हो गया और अनजाने में ही कोयल की प्रशंसा में भी कुछ शब्द उनके मुंह ने बरसा दिए। “हें!” कोयल को अपनी सास द्वारा प्रशंसा मिली, लेकिन उसने यह स्वीकारने में कठिनाई … Read more

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