घर कब आओगी – मधु वशिष्ठ   : Moral Stories in Hindi A

ऐसा बिल्कुल नहीं था कि भावना जी अपनी बहू नीता को प्यार नहीं करती थीं या उसे कमतर समझती थीं, बस यह उनकी बहुत पुरानी आदत थी कि वह अनुशासनहीनता या कोई भी गलती सहन नहीं कर पाती थीं और उसे ठीक करने की पूरी कोशिश करती थीं। यूं भी वह गर्ल्स स्कूल की रिटायर्ड … Read more

खानदान की इज्जत बेटी नहीं बेटे के हाथ में भी होती है। – अर्चना खंडेलवाल   : Moral Stories in HindiA

आज वर्मा परिवार में रौनक लगी थी, उनकी बेटी सलोनी की सगाई का समारोह था, पूरा घर फूलों से महक रहा था, सबके चेहरे खुशी से चमक रहे थे, बड़ी मुश्किलों से सलोनी का रिश्ता हुआ था।  शशि जी अपनी पोती की बलाइयां ले रही थी, और बीना जी अपनी बेटी की नजर उतार रही … Read more

मायके का मोह –  विभा गुप्ता   : Moral Stories in HindiA

    ” राजन..तुमने पापा से बात किया.. क्या कहा उन्होंने ..I know, मना नहीं करेंगे।”     ” रिया..माँ कह रहीं थी कि…।”    ” माँ को तो मैं मना लूँगी…अभी डैड को कह देती हूँ कि हम कल वहाँ शिफ़्ट कर रहें हैं..मैं सामान लेकर सुबह चली जाऊँगी और तुम ऑफ़िस से सीधे वहीं आ जाना।” कह कर … Read more

सलाह – पुष्पा कुमारी “पुष्प”   : Moral Stories in HindiA

“बेटा!.मेरे चश्मे का शीशा टूट गया है,.इसे रख लो! दफ्तर जाते वक्त बनवा देना!” राजिव की मांँ अंजना जी अपना चश्मा वहीं टेबल पर रख कर अपने कमरे के भीतर चली गई। दफ्तर जाने के लिए तैयार हो रहा राजीव अपनी मांँ का टूटा हुआ चश्मा उठाकर अपनी शर्ट की ऊपर वाली जेब में रख … Read more

अपनापन का ढोंग क्यों ..? – अर्चना सिंह   : Moral Stories in Hindi

“क्षमा चाहूंगी मुझे किसी की बेटी के बारे में उंगली उठाना अच्छा नहीं लगता पर आपलोगों ने तीन दिनों से मुँह खोलने पर मजबूर कर दिया । मेरे घर में बैठकर आपलोग मेरे ही परिवार वालों की बुराई कर रहे हो । मसोस करके सुन रही थी सब तब तक ठीक था लेकिन आपलोगों ने … Read more

अपना घर अपना घर ही होता है। – मधु वशिष्ठ   : Moral Stories in HindiA

अपना घर अपना घर ही होता है। नीता मन ही मन यूं ही बड़बड़ा रही थी, लड़कियों का तो कोई घर ही नहीं होता मां कहती थी की ससुराल ही तुम्हारा घर है और यहां हाल देखो?  लगभग एक सप्ताह होने को आया, सासु मां की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण वह तो बिस्तर … Read more

खानदान की इज्जत… – रश्मि झा मिश्रा   : Moral Stories in Hindi

“दुनिया में और कोई काम नहीं बचा… कोई कोर्स नहीं रह गया करने को… ले देकर तुम लोगों की सुई वहीं अटक जाती है… अरे भाई कुछ नाम कमाने वाला हुनर सीखो ना… सिखना ही है अगर तो… नहीं तो बैठो घर… पढ़ाई लिखाई खत्म हो गई… ब्याह की जिम्मेदारी मेरी है… मैं ढूंढ रहा … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन ( अंतिम भाग ) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

इधर राघव और यशोदा दोनो कुछ देर बाद बैकुंठी गांव पहुंचे और सबसे पूछते हुए रामेश्वर जी घर पहुंचे …. कौन? एक अधेड़ वायक्ति उम्र करीब 50,55 के बीच का घर के दरवाजे से ही पूछता है राघव और यशोदा दोनो इस व्यक्ति को देखकर नमस्ते करते है तो वो व्यक्ति उन दोनो को अंदर … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–12) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

उस रोशनी के पीछे कोई और नही बल्कि स्वयं माता वैष्णो देवी थी और केवल देवकन्या और वैष्णवी को दिखाई दे रही थी बाकी यशोदा और राघव उनको देख पाने में असमर्थ थे। देवकन्या ने माता को प्रणाम किया और पूछी … माता आपने मुझे रूप बदलने की शक्ति से वंचित कर रखा था फिर … Read more

कच्चे धागे-एक पवित्र बंधन (भाग–11) – शशिकांत कुमार : Moral Stories in Hindi

एक बहुत ही सुंदर करीब 30 वर्ष की कुमारी कन्या उसके सामने जिसके पूरे शरीर के चारो तरफ एक दैवीय औरा चमक रहा था… ऐसा लग रहा था जैसे मानो देवलोक से कोई परी उसके सामने उतर आयी हो आ..आ ..आप कौन है? (यशोदा बोली) मैं तुम्हारी बुढ़िया माता न …न… नही ऐसा कैसे हो … Read more

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