माफी – खुशी

लवली एक मस्त मौला लड़की थी जो एक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखती थी।पापा वीरेन्द्र जिनका डिपार्टमेंटल स्टोर था  मां विम्मी हाउस वाइफ बड़ा भाई सुरेन्द्र जो पापा के साथ ही काम करता था। लवली का फैशन और मेकअप में बहुत इंटरेस्ट था इसलिए उसने 12 वी पास  करते ही  मीनाक्षी दत्ता का स्टूडियो ज्वाइन … Read more

विश्वासघात – बिमला रावत जड़धारी

राधिका जी शाम की चाय पी रही थी कि तभी गेट की घंटी बजी, देखा तो श्यामा जी थी। राधिका जी ने श्यामा जी का बडे गर्मजोशी से स्वागत किया। करती भी क्यों नहीं, दोनों की दोस्ती पचास साल पुरानी थी। राधिका जी ने श्यामा जी से कहा, ‘तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बना … Read more

शर्म नहीं गर्व हूं मैं – सोमा शर्मा 

यह मेरी अपनी आपबीती हैं ।जब मैं सिर्फ ११ बर्ष की एक चंचल और नटखट बच्ची थी और अपने मम्मी पापा भैया की दुलारी थी। मेरा नाम आभा हैं और यह कथा मेरे जीवन की एक ऐसी सच्चाई हैं जो मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल देती है। आभा छठी कक्षा की एक होनहार … Read more

ममता की छाँव – उप्मा सक्सेना

दिल्ली का ट्रैफिक और सुबह को ऑफिस की भागम-भाग। तीन दिन पहले मेरा स्कूटर जरा सा संतुलन खो बैठा और नतीजा हेयर लाइन फ्रैक्चर। ऑफिस मे सभी ने भरपूर सहयोग किया।डाक्टर को दिखाना प्लास्टर चढवाना। मुझे वर्क फ्राम होम की सुविधा भी मिल गयी थी ।तो छुट्टी की चिंता भी नही थी ।पर मम्मी पापा … Read more

अपनत्व की छांव – परमा दत्त झा

आज सुबह सबेरे ममता अकचका गयी जब रात के तीन बजे श्वसुर जी इधर आते दीखे।उसका जी धक से रह गया।आज का जमाना खराब है,ऊपर से कितने श्वसुर —। मगर वह बाथरूम जा रहे थे, अचानक रूके और बाहर से कंबल लाकर अच्छे से ओढ़ा दिया।फिर कछुआ छाप जला दिया और आस्ते से लाईट बंद … Read more

लाडो – सविता गोयल

रामानंद आज बहुत खुश था। घर में कदम रखते ही सब को आवाज लगाई। उनकी एक आवाज पर ही सब भागे चले आए।  “क्या बात है जी बहुत खुश लग रहे हैं?” रामानंद की पत्नी ने रसोई से निकलते हुए पूछा।  अपनी सबसे छोटी बहन राधा के सर पर हाथ फेरते हुए उन्होंने कहा, “हमाारी … Read more

अच्छाई अभी भी जीवित है – शिव कुमारी शुक्ला 

रचना जी मेडिपल्स हास्पिटल जोधपुर के वेटिंग हॉल में बैठीं थीं।उनका नम्बर बहुत पीछे  था सो करीब दो से तीन घंटे लगने वाले थे।वे बैठीं -बैठीं इधर -उधर नजर दौडा रहीं थीं।नये मरीज आ रहे थे और पुराने दिखा कर लौट रहे थे। अच्छी खासी भीड़ जमा थी। वेटिंग हॉल बीच में था और एल … Read more

खतरा टल गया – गीता वाधवानी

 शांतनु अपनी माताजी का अस्थि विसर्जन करने हरिद्वार गए थे। जैसे ही वह कार्य पूरा करके वापस मुड़े सीढियों पर किसी ने उनकी टांगों से लिपट कर कहा -” पापा पापा, आप मुझे छोड़कर कहां चले गए थे, सुबह से आपको ढूंढ रही हूं, अब तो मुझे डर लग रहा है। देखो ना कितनी देर … Read more

प्रशंसा –  संध्या त्रिपाठी

” प्रशंसा एक ऐसी औषधि है जो मृतप्राय हौसलों में एक नई जान फूंक देती है ” … ।   बच्चों के व्हाट्सएप स्टेटस में पुरस्कार प्राप्त करते हुए अपना फोटो और नीचे कैप्शन में लिखा …” प्राउड ऑफ यू मम्मी ” देख कर सच में बहुत खुशी हुई…..! मैंने भी तपाक से जवाब में लिख … Read more

अधूरी रह गई हसरत सोनेके कंगन पहनने की – मंजू ओमर

ये लो बहू ये सोने के कंगन अब तुम रखो,अब ये मेरे किस काम का है‌।बहू रिया ने खुशी खुशी हाथ फैलाए कंगन लेने को लेकिन कंगन पुष्पा जी हाथ में कंगन लिए हुए ही कहीं खो गई। मां मां कहां खो गई आप ये कंगन तो मुझे दे रही थी न , लेकिन ये … Read more

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