बहू जितना होगा उतना ही कर सकती हूँ… – रश्मि प्रकाश 

“ क्या हुआ मम्मी जी आज आपने डिनर नहीं बनाया… और कृष के कपड़े भी नहीं बदले… जबकि कितनी बार कहा है… दिन भर में इसके कपड़े बदलते रहिए…. ।” अपने बेटे को सुबह के कपड़े में ही देख नताशा सासु माँ दमयंती जी पर बरस रही थी  “ बहू आज सुबह ही मन अच्छा … Read more

इंसानियत – डाॅ संजु झा

संसार में इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ‘मानवता परमो धर्म:’हिन्दू सनातन धर्म का आधार है।भारत की सभ्यता और संस्कृति मानवता का उद्गम स्रोत है। इंसानियत के नाते हमारे ऋषियों ने महान-से-महान त्याग किया है।ऋषि दधीचि ने तो अपनी अस्थियाॅं तक दान कर दी थी। आधुनिक समय में भी इतिहास में कुछ ऐसे मनुष्य … Read more

अपमान का दर्द – गरिमा चौधरी 

“देखा, सुधीर… वही लोग… जिनके लिए मैं कभी ‘कम पढ़ी-लिखी’, ‘कम हैसियत वाली’, ‘बस पापड़ बेलने वाली’ थी… आज मुझे ‘बड़ी दीदी’ कहकर ऐसे लिपट रहे थे, जैसे बरसों की ममता उमड़ आई हो।” गीली आँखों के साथ गौरी ने कमरे की दीवार पर टंगी अपने पति सुधीर की तस्वीर से कहा। तस्वीर में सुधीर … Read more

इंसानियत – डॉ. आशा

नवरात्रि के आख़िरी दिनों में मोहल्ले की गलियाँ अपने आप में एक अलग ही रंग ओढ़ लेती थीं। कहीं मंदिर से घंटियों की मधुर आवाज़ आती, कहीं लाउडस्पीकर पर “जय अम्बे गौरी…” गूंजता, और कहीं घरों के आँगन में रंगोली के बीच दिए टिमटिमाते दिखते। दुर्गा नवमी का दिन था—वही दिन जब हर घर में … Read more

असहाय नहीं हूं मैं – नीलम गुप्ता

वह मेरे घर में साफ सफाई का काम करती थी ।लंबी छरहरी ,गोरा रंग ,किसी दिन अच्छी सी साड़ी पहन कर आती तो लगता किसी संभ्रांत घर की बहू बेटी है । तीन बेटे हैं उसके बड़े दोनों तो 22 और 24 साल के हैं दोनों पढ़ लिखकर नौकरी पर लग गए हैं ।छोटा अभी … Read more

इंसानियत – परमा दत्त झा

आज दुखन पर पंचायत बैठा था।कारण दुखन श्वसुर होकर बहू का हाथ पकड़ा और गोद में उठा कर—! मधुबनी जिले का वह सोनवर्षा गांव जहां करीब चालीस घर मंडल परिवार है उसी में एक दुखन मंडल का घर है। पूरा भगवान के कोप से शापित अभागा परिवार।दुखन दो भाई और सात बहनें सबसे बड़े भाई … Read more

असहाय नहीं हूं मैं…- बबिता झा

आज सुबह उठने में देर हो गई बगल में देखा तो यह भी बिस्तर पर नहीं थे आज तो रविवार है फिर आज यह सवेरे कैसे उठ गये ,मैं भी उठकर बालकनी में चली गई ,तभी मेरे हाथों में चाय थमाते हुए बोले गुड मॉर्निंग, मैं भी चाय की प्याली हाथ में  ले मुस्कुराने लगी … Read more

रिश्ते की गर्माहट -शिव कुमारी शुक्ला

सुबह ऑफिस जाते बेटे को टिफिन पकड़ाते हुए मम्मी विमला जी ने कहा बेटा नीरज मुझे कुछ रुपयों की जरूरत है यदि तुम दे देते तो मैं भी अपना काम कर लेती। क्या मम्मी कितने रुपयों की जरूरत है आपको। यही कोई पंद्रह हजार। क्या पंद्रह हजार। इतने रुपयों का आप क्या करेंगी।ऐसी कौन-सी आवश्यकता … Read more

मानवता – बालेश्वर गुप्ता,

        रात्रि के नौ बजे होंगे, दरवाजे  पर कॉल बेल का स्विच लगा होने के बावजूद कोई दरवाजा जोर जोर से पीट रहा था. ये तो समझ में आ गया था कि निश्चित ही कोई बड़ी परेशानी है. तभी तो दरवाजा पीटने की व्यग्रता है, यह स्वाभाविक ही होता है. मेरे सामने धर्म संकट आ खड़ा … Read more

समय सबका आता है – उषा भारद्वाज

      पूरा हाल लोगों से भरा हुआ था। सबकी नज़रें मुख्य अतिथि यानी आई•ए•एस• सविता सिंह के आने की प्रतीक्षा में लगी थी। आर्ट गैलरी के उद्घाटन के लिए उनको बुलाया गया था। तभी कुछ लोग दौड़ते हुए गेट के पास पहुंचे। एक कार वहां आकर रुकी उससे बाहर प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालकिन सविता सिंह उत्तरी। … Read more

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