उजाला – संध्या त्रिपाठी

     माँ – माँ उठ ना , देख  तो उजाला हो गया ….. मैं जाऊं पटाखा बिनने ? कहां जाएगी बिटिया पटाखा बिनने …..? जहां तू काम करती है ना माँ ….वहीं …  कल देखी थी मेम साहब का बेटा (भैया) खूब पटाखा फोड़े थे….. जरूर दो- चार इधर-उधर बिना फूटे रह गया होगा …!    अरे … Read more

लक्ष्मी पूजन क्यों – संध्या त्रिपाठी

    बेटा पीहू , तू फटाफट रंगोली वगैरह बनाकर घर को सजा ले मैं पूजा की तैयारी करती हूं …और प्रियांश तू भी दीदी का साथ देना..! बाप रे ये दीपावली के दिन भी ना कितना काम हो जाता है …व्यस्तता के बीच निधि ने दीया ठीक से जमा कर रखते हुए कहा ।           मम्मी , … Read more

ईश्वर की माया कहीं धूप कहीं छाया

आज के जमाने में ज़िंदगी भी सोशल मीडिया की तरह हो गई है—कभी चमकदार तस्वीरें, तो कभी अंदर छिपे संघर्ष। अवनी एक युवती थी, दिल्ली में नौकरी करती थी। बाहर से उसकी ज़िंदगी बहुत सुखी दिखती थी—अच्छी सैलरी, स्टाइलिश कपड़े, और हर वीकेंड दोस्तों संग पार्टी। लोग कहते, “वाह! कितनी खुश है अवनी।” पर सच्चाई … Read more

रिश्तो की परख – लतिका पल्लवी

 शाम के वक़्त राहुल जब खेत से लौटा तो अस्मिता नें पूछा सारा धान कट गया या अभी बाकी है?कार्तिक का महीना था।सभी के खेत मे धान लहलहा रहा था।जिसे काटने का काम पांच दिन पहले शुरू हुआ था। राहुल नें कहा दो तीन दिन अभी और लगेगा।राहुल के पास अपनी जमीन बहुत कम थी।पर … Read more

क्या पिता को सुख दुख की अनुभूति नहीं होती – शिव कुमारी शुक्ला

आज दशहरा था और सुखविंदर अपने ट्रक का माल उतरवा रहा था एक अंजान शहर में।वह अंतराज्यीय परमिट से चलने वाले लम्बी दूरी के ट्रक का ड्राइवर था। खाना खा वह तन्हा लेटा था तो अपने घर पत्नी, बच्चों की याद आ गई। आज त्योहार के दिन वह अकेला इस अनजान शहर में पड़ा है … Read more

सोने का कंगन – परमा दत्त झा

आज दीपावली के अवसर पर रिया को सास ने नये सोने के कंगन दिये थे।वह अकचका गयी और सास को देखती रह गई। मांजी आप और यह-वह बड़ी मुश्किल से बोली। बहू तेरे श्वसुर कहा करते थे देखना ममता मैं अपनी बहू को सोने का कंगन दूंगा ,मगर वह तो रहे नहीं।सो आज उनकी मृत्यु … Read more

बहु – खुशी

जानकीनाथ चार भाई और तीन बहने थी। जानकी नाथ जी का बर्तनों का कारोबार था। बाजार में उनकी पांच दुकान थी चारों भाई मिलकर एक ही घर में रहते ।नंदा और मंदा दोनों की शादी हो चुकी थी।विजय नाथ ,राजीवनाथ और श्यामनाथ चारों मिलकर दुकान संभालते थे।पत्नियों में भी एका था जानकी नाथ की धर्मपत्नी … Read more

क्या? सारी जिम्मेदारी बहूओं की ही है – मीनाक्षी गुप्ता

दिनेश जी और मालती देवी दिल्ली के एक सामान्य उच्च-मध्यम वर्गीय परिवार थे। उनके दो बेटे—विक्रांत, रोहित—और एक बेटी अनीता थी। मालती देवी की उम्र हो चली थी और उनका स्वास्थ्य अब उतना साथ नहीं देता था। बड़े बेटे विक्रांत की शादी कामिनी से हुई। कामिनी बहुत ही सरल और अच्छे स्वभाव की थी। शादी … Read more

नेग का लालच – रश्मि प्रकाश

“ ये क्या कह रही हो दीदी आप…. सच में बड़ी भाभी ने ऐसा कहा…?” आश्चर्य से बड़ी बड़ी आँखें कर राशि ने नीति से पूछा  “ तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ….. जब उन्होंने कहा है तभी तो आपसे कह रही हूँ….हाँ अब विश्वास करना ना करना आपके उपर है।” कह नीति वहाँ … Read more

मुझे बर्दाश्त नहीं है अब अनु का निरादर – मंजू ओमर

सुमित्रा जी एक लोटा पानी लेकर आई और गणेश लक्ष्मी जी की पूजा में बैठे बेटे दीपेश के सामने जलते हुए दीपक में पानी डाल दिया। बेटा दीपेश चौक गया ये क्या किया मां पगला गई हो क्या ,इन जलते दीपक पर पानी क्यों डाल दिया । तुमने गणेश लक्ष्मी जी का अपमान किया , … Read more

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