क्या, इतना अभिमान ठीक है – मंजू ओमर 

ये तू जूते पहनकर कैसे अंदर आ गया,बाहर उतार गधा कहीं का, रत्ती भर भी तमीज नहीं है ।तू एक नौकर है हम मालिक पता है कि नहीं कुछ तुझे , कैसे मालिक के घर आते हैं,बस दनदनाता हुआ अंदर चला आता है।बस वही गेट पर खड़ा रह रेखा जी जोर जोर से चिल्लाए जा … Read more

किस्मत वाली – उमा वर्मा

सुनीता ने अपने बेटे का ब्याह कर दिया ।कल रात को ही स्वागत समारोह था।खूब अच्छी तरह तैयारी कर ली थी ।लेकिन वह फूली नहीं  समा रही थी जब लोगों ने कहा “कहाँ से लाए ऐसी गुलाब की कली “सचमुच वह बहुत खुश थी।बहुत ही सुन्दर और शालीन बहू के रूप में उसे गौरी मिली … Read more

घर बचाना है तो अहंकार छोटा कर बहू – नीलम गुप्ता 

निखिल ने निशा को एक शादी में देखा था लंबी छर हरी सांवली सलोनी निशा की बड़ी-बड़ी शर्मीली आंखों ने उसे जैसे सम्मोहित कर लिया। पूरे समय वह उसे ही देखता रहा और अवसर पाते ही बोला -हेलो मिस ब्यूटीफुल ! क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं? निशा ने हैरानी से उसे देखा और … Read more

आगे क्या – रश्मि झा मिश्रा 

बस दो महीने ही बचे थे… मरियम के रिटायरमेंट को… सिस्टर मरियम… उम्र से अधिक बूढी दिखने वाली… आंखों पर मोटे फ्रेम का चश्मा… बहुत साधारण सी कद काठी… यही पहचान थी उनकी… भरी जवानी में पति का साया उठ जाने के बाद यह नौकरी मिली थी मरियम को… नर्स की ट्रेनिंग भी उन्होंने नौकरी … Read more

संघर्ष की तपिश – डॉ बीना कुण्डलिया 

रिमझिम अपने पिता बंशी के साथ रोज खेतों पर जाती क्योंकि आजकल उसके स्कूल की छुट्टियां चल रही थी। वो पिता बंशी की लाडली बिटिया थी। उसके आँखों का तारा थी । उसकी मां तो उसे बचपन में ही छोड़ ईश्वर को प्यारी हो गई थी। पिता ने दूसरी शादी नहीं की वो नहीं चाहते … Read more

किस्मत – खुशी

नवीन वर्ष की शुभ कामनाएं उम्मीद करती हूं कि इस वर्ष भी आप सभी मेरी कहानियों को प्रेम देंगे और कोई त्रुटि हो तो क्षमा करेंगे। किशोरी लाल तीन भाइयों का इकलौता भाई था।मां शमा और पिता गुलज़ारी लाल ऐसा परिवार था।गुलज़ारी लाल की परचून की दुकान थी और किशोरी भी बाप की दुकान ही … Read more

किस्मत वाली – रंजना गुप्ता

सीमा चंदनपुर गाँव के सरकारी स्कूल में अध्यापिका बनकर आयी है और गाँव वाले उसका फूलों के हार पहना कर स्वागत कर रहे हैं। उसकी आँखों से आँसू छलकते हैं और होठों पर मुस्कुरुहट। कभी वह इसी स्कूल की छात्रा थी। सब लोग उस पर फूलों की वर्षा कर रहे हैं और तालियाँ बजा रहे … Read more

किस्मतवाली – डाॅ संजु झा

रामलाल   नैना को बेखौफ नन्हें -नन्हें कदमों से ऑंगन में  चहलकदमी करते हुए देखकर सोचते हैं -“किस्मत के खेल भी निराले हैं।कभी एक संतान के लिए पति-पत्नी तरसते थे,आज दो-दो बेटियों से हमारा जीवन गुलजार है!”  रामलाल खुद को भाग्यशाली समझें या बेटियों को किस्मतवाली उनकी समझ से परे है!जिस प्रकार एक नवजात पक्षी अपने … Read more

रीचार्ज – शुभ्रा बैनर्जी 

पचासी साल पूरे कर चुकीं हैं सासू मां।सारे दांत निकलवा लिए है, दर्द से हार कर।अपनी जिंदगी में क्या कुछ नहीं सहा है उन्होंने? उन्हें देखकर तो शुभा खुद से ही लड़ती रहती है।जब मां इस उम्र में अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को खुश रख सकतीं हैं, तो वह क्यों नहीं?  आंखों की … Read more

एक माँ – एम. पी. सिंह

आशा और गोपाल दास के दो बेटे थे, राम और श्याम. दोनों मे 2 साल का अंतर था. घर के पास ही गोपाल जी का अपना किराना स्टोर था और काफ़ी अच्छा कमा लेते थे. सवेरे दुकान पर जाते तो रात को ही वापस आते. लंच नौकर घर से ले जाता था. माँ का प्यार … Read more

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