होली क़ी यादें – एम. पी. सिंह

होली का त्योहार आते ही मेरे बचपन की यादें ताज़ा हों जाती है. ये बात है ज़ब में कॉलेज मे पढ़ता था. मेरा दोस्त राहुल अपने ही कॉलेज की एक लड़की सुनीता से दिल ही दिल प्यार करता था, पर इज़हार करने से डरता था. उसने होली पर सुनीता के साथ होली खेलने ओर प्यार … Read more

*कभी भी किसी पर आंख बंद करके भरोसा मत करना* – तोषिका

आप ही कहते थे ना *कभी भी किसी पर आंख बंद करके भरोसा मत करना* तो फिर आपने कैसे आंख बंद कर भरोसा कर लिया पापा एक लड़के की रोती हुई आवाज आई। एक दम से किशन अपनी नींद से जगा और देखा वो एक बुरा सपना था। किशन के बेटे राजीव को गुजरे हुए … Read more

भरोसा – खुशी

मेरी मां हमेशा कहती थी कि किसी पर भी आंख मूंद भरोसा मत करना और मै और पिताजी मजाक बनाते क्या मां? पिताजी कहते तुम्हारे साथ हुआ है इसलिए क्या सारे ही लोग गलत हो गए फिर शुरू हो गई तुम आज बेटे का खास दिन है और तुम आज भी शुरू हो गई।आइये पहले … Read more

सबसे बड़ा घाव तो अपने ही देते है – मंजू ओमर

आज उपासना और अखिलेश जी बेटे की शादी की बधाई देने प्रमोद जी के घर पर आए थे। क्योंकि उपासना और अखिलेश जी प्रमोद और आशा के बेटे की शादी में आ नही पाए थे। और आंटी अकंल कैसी रही रोहित की शादी बहुत मजा आया होगा। क्या बताऊ हम लोग आ नहीं पाए थे … Read more

बुढ़ापा तो सबको आता है!! – संजय सिंह

गोपाल और उमा अपने परिवार का पालन पोषण करते-करते कब अपनी जिंदगी के इस के इस मोड़ पर आ गए हैं कि उन्हें यह तक याद नहीं रहा कि उन्होंने अपना जीवन कभी खुशी से जिया या नहीं ।बस जो किया वह अपने बच्चों की खुशी और तरक्की के लिए ही किया। गोपाल और उमा … Read more

मायके की देहरी – विनीता सिंह

समीर ने अपना लैपटॉप बंद किया और लापरवाही से कंधे उचकाते हुए बोला, “अरे यार नव्या, तुम भी छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बनाती हो। माँ कह रही हैं तो चली जाओ। उनकी अपनी मान्यताएं हैं। वैसे भी मेरी इस महीने बहुत बिजी शेड्यूल है, तुम जाओगी तो मुझे भी थोड़ा काम पर फोकस करने का … Read more

ज़िंदगी की कड़वी चाय – प्रियंका नाथ

सुमित्रा जी से अपनी बेटी की यह हालत देखी नहीं जा रही थी। तभी घर की बड़ी बहू, काव्या, रसोई से बाहर आई। काव्या न सिर्फ इस घर की बहू थी, बल्कि श्रुति की एक बहुत अच्छी दोस्त भी थी। सुमित्रा जी ने काव्या का हाथ पकड़ा और रुंधे हुए गले से बोलीं, “बहू, तुम … Read more

संस्कारों का आईना – शारदा सक्सेना

 निर्मला देवी और सुमित, शालिनी का यह रूप देखकर सन्न रह गए। निर्मला देवी ने चिल्लाते हुए कहा, “जुबान लड़ा रही है तू मुझसे? ये हैं तेरे संस्कार?” “संस्कार!” शालिनी की आँखों से आंसू छलक पड़े, लेकिन उसकी आवाज़ में कोई कंपन नहीं था। “संस्कारों की बात आप मत ही कीजिए माँ जी। जब मैं … Read more

पिंजरे की खुली उड़ान – मोहिनी मिश्रा

देविका, जो अब तक चुपचाप यह सब तमाशा देख रही थी, उसके भीतर का सोया हुआ ज्वालामुखी अचानक फट पड़ा। उसे उस बंद दरवाज़े के पीछे रोती हुई काव्या में अपनी ही परछाई नज़र आने लगी। बाइस साल पहले जब देविका ने अपने मायके में कॉलेज ट्रिप पर जाने की ज़िद की थी, तो उसके … Read more

मुखौटे के पीछे का सच – हर्षिता सिंह

 अंजलि रुकी नहीं, उसने आगे कहा, “समीर, दोस्ती निभाना बहुत अच्छी बात है, लेकिन क्या तुम्हें याद है जब दो साल पहले तुम्हारे पिताजी का एक्सीडेंट हुआ था? तब हमें अस्पताल में तुरंत एक लाख रुपये की ज़रूरत थी। तुमने वैभव को फोन किया था। उसने क्या कहा था? यही ना कि उसके व्यापार में … Read more

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