घर बंटने से पहले दिल बंटता है – रश्मि प्रकाश 

  सरोजा देवी का छोटा बेटा विवेक, जो दो महीने पहले ही शादी करके आया था, आज सुबह से नज़रें चुराता घूम रहा था। सरोजा देवी मंदिर की घंटी बजाकर बाहर आईं तो देखा कि विवेक बैठक में खड़ा कुछ सोच रहा है।उनके पूछने से पहले ही विवेक ने गहरी सांस ली—“माँ, मुझे आपसे कुछ कहना … Read more

शक से सिर्फ रिश्ते टूटते हैं – हेमलता गुप्ता 

अनन्या को पिछले कुछ दिनों से एक अजीब-सी बेचैनी महसूस हो रही थी।अर्जुन—उसका पति—आम दिनों में शांत, गंभीर और थोड़ा रिज़र्व स्वभाव का इंसान था।लेकिन पिछले पंद्रह-बीस दिनों से वह किसी अनदेखी खुशी से भरा हुआ घूम रहा था। ऑफिस जाने से पहले गुनगुनाना,देर रात तक मोबाइल पर मुस्कुराते रहना,और अक्सर अचानक कहीं बाहर निकल … Read more

बड़ी बहू होना सम्मान है, अधिकार नहीं। – अर्चना खंडेलवाल  

वृषाली रसोई में खड़ी सब्जी काट रही थी। सुबह-सुबह का समय था और घर में हलचल शुरू हो चुकी थी। उसका मन काफी हल्का-फुल्का था क्योंकि आज वह अपनी सास मालती देवी की पसंद की बैंगन की स्वादिष्ट सब्जी बनाने वाली थी। उसने बड़े मन से तैयारी की, गैस हल्की रखी और बाहर आकर आँगन … Read more

हरिया चाचा – के आर अमित

स्कूल के छोटे बच्चे उनके आसपास बैठकर शरारतें किया करते कभी उनके औज़ार छुपा देते कभी जूते में छोटी कंकड़ डालकर चाचा को हँसी में परेशान करते। कभी कभी तो चाचा के थैले से निकालकर उसकी रोटी और आचार भी खा जाते। हरिया चाचा भी मुस्कुराकर सब सह लेते जैसे वो बरगद का पेड़ हों … Read more

फैसला – एम पी सिंह

अशोक अपने बेटे और माँ के साथ दिल्ली मैं रहता था और प्राइवेट बैंक मैं क्लर्क था. अशोक कि शादी 6 साल पहले कमला से हुई थी, शुरू के 2 साल तक सब कुछ ठीक था. फिर कमला के पॉव भारी हुए और घर मैं खुशियों का माहौल बन गया. धीरे धीरे समय बीतता गया … Read more

दिखावटी रिश्ता – मीरा सजवान ‘मानवी’

घर से बाहर निकलते ही सब-कुछ कितना परफ़ेक्ट लगता था— हाथों में हाथ डाले मुस्कुराता हुआ एक जोड़ा, जो दूर से देखने वालों को आदर्श जीवन की मिसाल लगता। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें चमकती थीं—कभी कैफ़े में कॉफ़ी, कभी पहाड़ों पर घूमना, कभी एक-दूसरे को समर्पित लम्बी भावुक पोस्टें। लेकिन असलियत उन मुस्कुराहटों के … Read more

मैंने अपना फर्ज़ निभाया – लक्ष्मी त्यागी

बारिश की हल्की बूंदें, पुराने छप्पर पर टपक रही थीं। बाहर ठंडी हवा थी, मगर भीतर रामसिंह के दिल में एक तपिश थी—जो सालों से जल रही थी, न बुझी थी, न कम हुई थी । आज उसने अपना पुराना ट्रंक खोला, जिसमें कुछ फटी हुई फाइलें रखी हुई थीं, एक पुलिस टोपी, और एक … Read more

कबूल – बीना शर्मा

कथा स्थल पर कथा वाचक और  श्रोतागण काफी देर से एक जोड़े के आने का इंतजार कर रहे थे मगर काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब वह नहीं आए तो एक वृद्ध महिला राधिका से बोली”जिन्होंने सुबह श्रीमद् भागवत की पूजा करवाई थी वह दोनों खाना खाकर सो गए हैं मेरे काफी द्वार  … Read more

भाग्य – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

किराये के मकान और विषम यानि (आर्थिक) परिस्थितियों से जूझते जूझते रेखा की बेटियां कब जवान हो गईं उसे पता न चला, एक रोज रीना की मम्मी (पड़ोस वाली भाभी) ने ऐसे ही बातों बातों में पूछ ली अरे भाई शहनाई कब बज रही  आपके घर ईश्वर की कृपया से बच्चियों की पढ़ाई भी  पूरी  … Read more

रिश्ते – खुशी

मौलिक और रति दोनो एक लॉ फर्म में काम करते थे।वो फर्म मौलिक के पिता राजनाथ सहाय जी की थी ।राजनाथ के 3 बेटे और 1 बेटी थी।तीनों बेटे विवेक,विनय और मौलिक तीनों पिता के साथ फर्म में थे। पत्नी राजेश्वरी एक कॉलेज में हिंदी की अध्यापिका थी और फिर प्रमोशन लेकर प्रिंसिपल बन गई। … Read more

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