चमकते आंसू – कंचन श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

तखत पर बैठी अम्मा के आंसू  रुक नही रहे हर कोई उनकी आंखों के सामने से चला जा रहा और वो लाचार बेबस असहाय सी वहीं की वहीं पड़ी  कुछ नही कर पा रही ।करें भी कैसे एक तो उम्र का तकाज़ा दूसरे निगोड़ी कई बीमारियों ने  घर बना लिया देह में , वो भी … Read more

धंधा – : Moral Stories in Hindi

रोज की तरह आज भी शाम का धुंधलका होते ही  बिन्नी रेड लाइट एरिया में ग्राहक के लिए खड़ी थी ।एक ग्राहक से सौदा हुआ । वह उसे  एक होटल में ले गया । वहां के बार में कई जोड़े बैठे थे , जो केवल अपनी रातें रंगीन करने आए थे । इनमें रईस घरों … Read more

जैसी करनी वैसी भरनी – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ सुना तुमने वो शेखर जी के बेटे बहू ने उन्हें घर से निकाल दिया… एक साल पहले तो बीबी चल बसी अब बेटे बहू ने भी मुँह फेर लिया… भगवान जाने अब वो कहाँ जाएगा ?” चिंतित स्वर में रमाकान्त जी ने पत्नी उमा से कहा  “ये बात अब साफ़ हो गई है कि … Read more

ढलती सांझ – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

मेरा बेटा आज बहुत दिन बाद मेरे पास रहने के लिए आ रहा है यह बात सुषमा ने लगभग 10 से 15 लोगों को बता दी घर में अकेले रह रहे बूढ़े मां का सहारा कोई नहीं तीन मंजिला मकान ग्राउंड फ्लोर में खुद रहती है और पूरे कमरों कर किराए पर उठा दिया सुषमा … Read more

आग में घी डालना – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

दोपहर में अचानक से फोन की घंटी बजने से सुधा की नींद टूट जाती है।उधर से फोन पर उसका पति कमल कहता है -“सुधा! तैयार रहना। मैं जल्द आ जाऊॅंगा। पुस्तक मेला देखने प्रगति मैदान चलेंगे।”  “अच्छा” खुश होकर सुधा कहती हैं। सुधा मन-ही-मन सोचती है कि    अब फिर से  कमल मेरी भावनाओं की … Read more

आग में घी डालना – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

रमा ने जब से ससुराल में कदम रखा रसोई ही उसका कमरा हो गया था । वह सिर्फ़ रात को ही अपने कमरे में सोने जाती थी वह भी रात के ग्यारह बजे तक पूरे घर का काम ख़त्म करके। सुबह चार बजे से उठकर सासु माँ बैठ जाती थी और उसके कमरे का दरवाज़ा … Read more

वो सुबह कभी तो आएगी – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

राघव और रचना जब चालीस पैंतालीस उम्र के पड़ाव पर पहुँचते हैं तो रात के सोते समय भी वे दोनों प्यार भरी बातें नहीं करते हैं ।  राघव ने कहा — रचना गैस बंद किया है न अलार्म लगाया है कि नहीं कल  रवी और सुंदर को जल्दी उठना है ठीक है ।  रचना भी … Read more

ढलती सांझ – डा.शुभ्रा वार्ष्णेय : Moral Stories in Hindi

शहर की हलचल और भागदौड़ से भरी इस ज़िंदगी में समय जैसे पंख लगाकर उड़ता है। ऑफिस के लंबे घंटे, परिवार की जिम्मेदारियां और अपने सपनों के पीछे भागते इंसान को शायद ही यह अहसास होता है कि उसकी ज़िंदगी की घड़ी धीरे-धीरे ढल रही है।  यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति, आदित्य मल्होत्रा की है, … Read more

पहाड़ों में कैद रूह – आशा झा सखी : Moral Stories in Hindi

ये जीवन भी अजब दास्तां है। कब क्या किसके साथ हो जाये क्या पता। साथ चलता साथी कब फिसल कर दूर हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता । ये जीवन भी एक पहाड़ की तरह है ,जिस पर चढ़ कर शिखर तक पहुंचना ही जीवन का उद्देश्य लगता है। सभी इसी भावना के साथ  … Read more

घर की इज्जत – सीमा प्रियदर्शनी सहाय : Moral Stories in Hindi

आलोक जी गुस्से से लाल हो रहे थे ।उनकी इकलौती बेटी आखिर इतना कुछ बोलने की हिम्मत कैसे कर सकती है कि उसे ऋषि पसंद है! आज सुबह जब उन्होंने अपने बेटी को अपनी पत्नी के साथ बातचीत करते हुए सुन लिया था। आयुषी को एक दो बार उन्होंने ऋषि के साथ देख लिया था। … Read more

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