अनोखा बंधन – पूजा अरोड़ा

बारात बड़ी धूमधाम से निकली थी, सब लोग बहुत मस्ती कर रहे थे, घोड़ी पर बैठा वेद बहुत खुश था, खुश होता भी क्यूँ ना आखिर एक लंबी लड़ाई जीतकर तो इस खुशी को प्राप्त करने में सफल हुआ था | सबसे अधिक खुशी उसे अपनी दादी को देखकर हो रही थी जो धीमी गति … Read more

बेटी का ससुराल – शुभ्रा बैनर्जी

मधु की छोटी ननद की शादी तय हो गई थी।सभी रिश्तेदारों के पास जा-जाकर कार्ड देने शुरू हो चुके थे।घर के बड़े पिता-बड़े फूफा,मामा, चाचा,के घर-घर जाकर कार्ड मधु ही गई थी,पति सुनील के साथ।सारे रिश्तेदार आस-पास ही थे।शादी की तैयारियां भी शुरू कर दी गईं थीं। मधु ने सास(उर्मिला जी)से पूछा”मां,मेरी मां को कार्ड … Read more

संस्कारित घर की बेटी – लतिका पल्लवी

माँ जी आप ठीक तो है? कहते हुए सास की चिल्लाने की आवाज को सुनकर बहू समीरा रसोई से दौड़ते हुए अपने सास के कमरे मे आई और आकर देखा कि सास पलंग के नीचे गिरी हुई है।उसने मदद देकर उन्हें उठाने की कोशिश की पर वे बेहोश थी इसलिए समीरा उन्हें उठा नहीं पाई। … Read more

इज़्ज़तदार घराना – सेल्वीन गोहेल

समीर महेरा कम सालों में करोड़ों की संपति के मालिक बन गए थे। वह शहर के इक सब से बड़े इज़्ज़तदार घराने से ताल्लुकात रखते हैं। वह घराना जो प्राण प्रतिष्ठा, अनुशासन, न्याय और वचनो का पालन करने के लिए जाना जाता हैं। अपनी ऑफिस में काम में व्यस्त थे की, रिसेप्शनिस्ट का फ़ोन आया। … Read more

इज्जतदार – बीना शुक्ला अवस्थी

राजेन्द्र जी घर के बरामदे में बैठे अखबार पढ रहे थे। मातंगी अपने स्कूल गई थी। अचानक उन्होंने देखा कि बाहर का गेट खोलकर बेटा समर्थ और बेटी सुचित्रा अन्दर आ रहे हैं। राजेन्द्र खुश हो गये – ” अरे…. आओ,…. आज एक साथ….. और बच्चे, बहू और दामाद कहॉ हैं? “ ” हॉ, पापा। … Read more

इज्जतदार – सीमा गुप्ता

“नवीन जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी समय पर मदद से मेरा बेटा बिल्कुल ठीक हो गया… वरना हम तो घबरा ही गए थे।”  “मिसेज़ एंड मिस्टर नवीन, थैंक्यू सो मच फॉर योर कोऑपरेशन!” फंक्शन में आए पड़ोसी, नवीन और उसकी पत्नी नीरू की ओर मुस्कुराते हुए सिर हिलाकर आभार जता रहे थे। यह दृश्य जितना सहज … Read more

इज्जतदार – सुदर्शन सचदेवा

आजकल की दुनिया चकाचौंध से भरी है—लाइटें, लाइक्स, फॉलोअर्स और दिखावे की दौड़। इसी दुनिया में रहता था राघव, जो एक छोटी-सी पारिवारिक दुकान संभालता था। दुकान साधारण थी, पर राघव की पहचान उसके पहनावे या मोबाइल से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती थी। मोहल्ले में लोग उसे “इज़्ज़तदार लड़का” कहते थे—क्योंकि उसके बोल … Read more

इन आंखों में ही जिंदा है मेरा बेटा – डॉ बीना कुण्डलिया 

देख नहीं सकती, अरे अंधी है क्या ?  जाने कैसे कैसे लोग सड़क पर उतर आते हैं ?  तेज रफ्तार फराटे दार भागती गाड़ी में से गर्दन निकाल उस नवयुवक के बोल सुनकर उसकी गाड़ी के धक्के से नीचे गिरी कंचन ने खुद को तो बहुत ही मुश्किल से संभाला ।  कंचन बड़बड़ाई मैं तो … Read more

इज्जतदार – डाॅ संजु झा

वक्त का कुछ भी नहीं पता चलता है।एक समय गोविन्द जी का परिवार काफी इज्जतदार था। आस-पास के गाॅंवों में भी उनके परिवार की काफी इज्जत थी।यह इज्जत उनके पुरखों ने अपने सत्कर्मों से कमाई थी, परन्तु अप्रत्याशित  रूप से वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि उन्हें अपनी जन्मस्थली तक छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। … Read more

सपने – रेखा जैन

“कुसुम चाय बन गई क्या?” सुबह सुबह में सासु मां की तीखी आवाज आई। “लाई मां, बस जरा अनु का टिफिन पैक कर लूं फिर मैं आपको आपकी चाय देती हूं!”  “लो सुबह सुबह में इस लड़की के पढ़ाई के नाटक शुरू हो गए। जाने कौनसी कलेक्टर बनाएगी इसे! इतना ज्यादा लड़कियों को नहीं पढ़ाना … Read more

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