अधिकार कैसा? – सीमा गुप्ता

राघव और प्रीति की शादी को लगभग बाईस–तेईस साल हो चुके थे। दोनों ने जीवन की धूप–छाँव साथ देखी। छोटे-से सरकारी क्वार्टर में बिताए कई वर्ष, राघव की सीमित तनख़्वाह और फिर दो बच्चों की परवरिश। संघर्ष बहुत थे, पर दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर घर संभाला। धीरे-धीरे हालात बदले। राघव की पदोन्नति हुई, … Read more

चाभियाँ… और एक और मौका – पूजा अरोड़ा

शरद की हल्की-ठंडी सुबह थी। बरामदे में नीम की पत्तियाँ गिर रही थीं। बड़े ठाकुर घर में हलचल हमेशा की तरह थी…संयुक्त परिवारों में ऐसी हलचल तो सामान्य बात है..! रसोई में चूल्हे की आवाज़, अंदर से बच्चों के उठने का शोर और ऊपर से आती जेठानी चाँदनी भाभी की तेज़,  लेकिन व्यवस्थित आवाज़ “सिया, … Read more

अमीरी – खुशी

मधु तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।पिता एक छोटी सी साड़ी की दुकान पर काम करते थे।मां घर में ब्लाउज सिलती पीको फॉल का काम करती। मधु कॉलेज के दूसरे वर्ष में थी वहां कॉलेज के एनुअल फंक्शन में रतिराम जी आएं थे जिनका कारखाना था समाज के प्रतिष्ठित लोगों में उनकी गिनती थी। … Read more

जीवन धुन – लतिका श्रीवास्तव 

अनय की आँखें नम हो रहीं थीं आज।सुबह सुबह ही उसे एक रजिस्टर्ड पत्र मिला जिसमें उसका प्रोजेक्ट कैंसिल कर दिया गया था।वह प्रोजेक्ट था गरीब बस्ती में संगीत स्कूल खोलने का लेकिन इसकी जगह प्रोजेक्ट अप्रूव हुआ था सलिल का जिसने शहर में जिम खोलने का प्रस्ताव लगाया था। अनय को संगीत से बेहद … Read more

एक और मौका – सुदर्शन सचदेवा

रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। शहर की सड़कें लगभग सो चुकी थीं, लेकिन रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर 3 पर बैठी भावना की आँखें अभी भी जाग रही थीं। उसके सूटकेस पर धूल जमी थी और चेहरे पर थकान… पर असली थकान उसके दिल में थी—हार मान लेने की। आज उसकी ज़िंदगी जैसे … Read more

एक और मौका – सीमा गुप्ता

“वंशु बेटा, कल ही रक्षाबंधन है, आपने पर्व और हर्ष के लिए राखी तो भेजी है न! हम सब बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।” मेघा दूर के शहर में रह रहे अपने जेठ की बेटी वंशिका से फोन पर पूछ ही रही थी कि तभी डोरबेल बज उठी। “अरे! वंशिका का भेजा पार्सल आ … Read more

ये मेरा अधिकार है – मंजू ओमर 

बहू , बेटा हर्षिता सुबह-सुबह की सैर करके आ गया हूं।आज कुछ ज्यादा ही दूर चला गया था, बहुत थक गया हूं , मुझे एक कप चाय और नाश्ता दे  दो बेटा। बहुत जोर की भूख भी लग रही है। सन्तोष जी के आवाज़ देने पर भी कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने दोबारा आवाज … Read more

इज्जत – खुशी

इज्जत एक बहुत बड़ा शब्द है अमीर की हो तो लाखों की गरीब की हो तो दो कौड़ी की।सारंग राजस्थान के राजपुताना खानदान का चश्मों चिराग जो लाडो में पला।जिसके मुंह से बात निकली कि पूरी घर में मां बाप 2 भाई भाभी,बुआ दादा दादी ऐसा परिवार ।दादा सूरजमल का मार्बल का कारखाना था जो … Read more

आजादी की चाह या बड़ो की सीख !! – स्वाती जैंन

इस घर में मुझे कभी शांती मिलेगी या नहीं , रोज रोज तुम सास- बहु का क्लेश सुनकर कान गर्म हो गए हैं मेरे , मानव अपना ऑफिस का बैग पटकते हुए बोला , ऑफिस से थककर घर आता हुं और यहां तुम दोनों की किचकिच सुनने को मिलती हैं ! मानव के पिता राजेश … Read more

इज्जतदार – सुनीता माथुर  

विश्वनाथ राजस्थान में माने हुए व्यापारी थे कपड़ों की कई दुकानें थीं। और बहुत प्रसिद्ध थीं वह ठाकुर खानदान के इकलौते बारिस थे और बहुत बड़े “इज्जतदार” घराने के थे। विश्वनाथ को बस एक ही दुख था—– कि उनके कोई औलाद नहीं थी पर वह—– अपनी पत्नी प्रेरणा को बहुत चाहते थे समय बीतता जा … Read more

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