पति-पत्नी या दोस्त – डॉ उर्मिला सिन्हा
कमरे की हवा में मोगरे और रजनीगंधा के फूलों की महक थी, लेकिन उस महक में एक अजीब सा भारीपन घुला हुआ था। यह वो रात थी जिसे दुनिया ‘सुहागरात’ कहती है, लेकिन काव्या के लिए यह एक ‘समझौते की रात’ से ज्यादा कुछ नहीं थी। वह पलंग के एक किनारे पर बैठी थी। उसकी … Read more