अपनों से गैर भले – सुदर्शन सचदेवा

अभी-अभी की ही तो बात है। सुबह ऑफिस के लिए निकलते समय आईने में खुद को देखा तो मानो कोई और चेहरा दिखा—थकी आँखें, बुझा हुआ मन। साक्षी ने मोबाइल उठाया। माँ के पाँच मिस्ड कॉल थे। वह जानती थी—अब पूछताछ नहीं, हिदायतें आएँगी। उसने मोबाइल साइलेंट कर दिया। ऑफिस पहुँचकर भी मन वहीं अटका … Read more

रिश्ते की नई सुबह – संजय अग्रवाल

सुबह सुबह आश्रम के कार्यालय में हम बैठे थे, सावित्री मौसी के बारे में पूरी जानकारी देते। मौसी खामोशी से किनारे बैठी हुई है। मैनेजर ने कहा भाई साब काश ऐसे लोग और हो तो इन बुजुर्गों को कभी भीख न मांगना पड़े। बहुत बुरा लगता है हमें भी, मगर क्या करें नियमो से बंधे … Read more

मायका – शुभ्रा बैनर्जी 

“सुमन! ओ सुमन, मधु आ रही है कल दामाद जी के साथ।सुबोध से कहना, छुट्टी ले ले दो चार दिन की।” सुमित (पति)ने फोन रख दिया था।सुमन समझ नहीं पा रही थी कि बेटी के आने की खुशी क्यों नहीं महसूस हो रही थी उसे? ऐसा नहीं कि मधु पहली बार आ रही थी राखी।पांच … Read more

बंधन मुक्ति – बीना शुक्ला अवस्थी

घर में सुबह से हलचल मची थी जिसका कारण था सबके मोबाइल पर एक मैसेज। भानुजा का मोबाइल भी कमरे में ही रखा था। कहॉ गई भानुजा? किसी को कुछ पता नहीं था, कल रात तक सब कुछ सामान्य था। तीन महीने पहले ब्याह कर आई नववधू अर्चिता भी अचंभित थी।  इन तीन महीनों में … Read more

इतना अभियान सही नहीं – विनीता सिंह

पहाड़ों का जीवन बहुत ज्यादा कठिन होता है। कब पहाड़ गिर जाए कब रास्ते बन्द हो जाए। कुछ पता नहीं ऐसे ही दो पहाड़ियों के बीच में एक गांव था उस गांव में नदी थी उस नहीं के ऊपर एक पुल था पता नहीं कब गिर जाए कहा नहीं जाता।उसी गांव में अरूण नाम का … Read more

आंखों का पानी ढालना – नाज़ मन्नत

श्यामलाल एक कस्बे में रहने वाला व्यक्ति था। वह न तो मेहनती था और न ही ईमानदार, परंतु उसमें एक विशेष गुण अवश्य था—उसे किसी भी बात की लज्जा नहीं आती थी। लोग कहते थे कि उसने तो पूरी तरह आंखों का पानी ढाल दिया है। वह बिना शर्म किए झूठ बोलता, दूसरों का हक … Read more

आत्मग्लानि – गरिमा चौधरी 

कमला जी हमेशा से अपने परिवार की धुरी थीं—तीन बेटों की माँ, घर-आँगन की मालकिन, और मोहल्ले में सभी के सुख-दुख की साझेदार। घर में उनकी बात पत्थर की लकीर मानी जाती थी। लेकिन बीते दो सालों से उनके चेहरे की कोमलता में एक खिंचाव आ गया था। कारण सिर्फ एक—बहू मालिनी को संतान का … Read more

अदालत का अनोखा फैसला – एम. पी. सिंह 

आनंद ने एक हाथ से डोर बेल बजाई, दूसरे हाथ मै मिठाई का डिब्बा और नज़रे नेम प्लेट पर टिकी थी, जहाँ लिखा था ” रिटायरड जज ठाकुर अरविन्द सिंह”. जज साब ने दरवाजा खोला, और आनंद को सामने खड़ा देखकर बोले, मैंने तुम्हे पहचाना नहीं? आनंद ने आगे बढ़कर पाँव छुए और बोला, मै … Read more

आंखों का पानी ढलना – सुदर्शन सचदेवा

शहर के एक नामी अपार्टमेंट में रहने वाली अनन्या को लोग “सक्सेसफुल” कहते थे। बड़ी कंपनी, ऊँचा पद, चमकती कार और सोशल मीडिया पर परफेक्ट तस्वीरें। मगर इस चमक के पीछे कहीं कुछ सूख गया था—उसकी आँखों का पानी। एक समय था जब अनन्या छोटी-छोटी बातों पर भर आती थी। किसी की पीड़ा देखकर उसका … Read more

दरार -पूजा अरोड़ा

शादी का माहौल था चारों तरफ गहमा गहमी थी। एक ओर हलवाई कड़ाही में गर्मा गर्म पूरिया तल रहे थे तो दूसरी ओर टेंट वाला फूलों से सजावट कर रहा था।  सब काम सुचारू रूप से चल ही रहे थे परंतु फिर भी यूं लग रहा था जैसे कुछ काम नहीं हो रहा..! यही तो … Read more

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