*अपने और पराए – वक्त ने बताए* – तोषिका

आज मुझे *अपने और पराए – वक्त ने बताए* वरना मैं हमेशा ही धोखे में ही रहती रोते हुई मुस्कान बोली। उसकी साथ बैठी दोस्त रूपा ने उस से पूछा “ऐसे क्यों बोल रही हो? क्या हुआ? किसी ने कुछ कहा क्या?” मुस्कान चाह कर भी अपने मुख से एक शब्द भी नहीं निकाल पा … Read more

अपनेपन की छांव का अहसास – डॉ बीना कुण्डलिया 

दरवाजे पर खटखटाहट और एक बुलन्द सी आवाज की चहक कुरियर कुरियर को सुनकर माया जी ने दरवाजा खोला कुरियर वाले से कुरियर लेकर अभी सोच ही रहीं थीं क्या होगा ? किसने भेजा होगा । दरवाजे पर आवाज सुनकर शुलभ बाबू भी जल्दी से बहार आ गये। अरे माया दिखाओ तो सही जरा किसने … Read more

खामोश ढाल: एक अनकहे समर्पण की दास्तान

सुहासिनी अक्सर खिड़की के पास बैठकर बाहर के कोलाहल को देखती रहती थी। शादी के छह साल बीत चुके थे, लेकिन उसे लगता था जैसे उसके और उसके पति, समर के बीच एक अदृश्य दीवार सी खड़ी है। समर एक बेहद शांत, काम में डूबा रहने वाला और कम बोलने वाला इंसान था। सुहासिनी को … Read more

**सोने का पिंजरा: एक खोखली मुस्कान का सच**

बारिश की बूंदें कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियों पर टकरा रही थीं। शहर के सबसे पॉश इलाके में बना ‘मल्होत्रा विला’ बाहर से जितना भव्य और खूबसूरत दिखता था, आज अंदर से उतना ही शांत और सर्द महसूस हो रहा था। इटालियन मार्बल से सजे उस विशाल ड्रॉइंग रूम में बैठी नंदिनी के हाथ में कॉफी … Read more

 खामोश दीवारों का दर्द – अर्चना खंडेलवाल

खिड़की के बाहर सावन की झमाझम बारिश हो रही थी, लेकिन काव्या के अंदर जैसे एक सूखा रेगिस्तान पसर चुका था। उसकी छोटी बहन श्रुति, जो अपनी कॉलेज की छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए दीदी के घर रहने आई थी, सोफे पर बैठी स्तब्ध थी। उसने अभी-अभी जो देखा था, उस पर उसे यकीन … Read more

**चमकते ख्वाब और घर की चौखट** – अर्चना खंडेलवाल

“निहारिका, इस तरह आधी रात को अचानक घर छोड़ कर जाना ठीक नहीं होगा,” अनिरुद्ध की आवाज़ में गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरी पीड़ा थी। “अभी बाबूजी और माँ सो गए हैं, सुबह उठकर जब वे तुम्हारे बारे में पूछेंगे तो मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा? वे सब तुमसे कितना प्यार करते हैं, तुम्हारा कितना … Read more

अदालत का फैसला – एम. पी. सिंह

जीवन भोपाल के पास एक छोटे से गावं मैं रहता था और पशु आहार का कारोबार करता था. पंजाब से माल आता था ओर आस पास के छोटे पशु पालक माल ले जाते थे. बिक्री बहुत ज्यादा नहीं थीं पर कमाई काफ़ी ज्यादा थीं. जीवन की पत्नी ज्योति अपना घर ओर  बच्चे नीता व नितिन … Read more

किसी पर आखं बद करके भरोसा न करें – मंजू ओमर 

मत रो बेटा अपने आसूं पोछ ले। कैसे पोछ लू अपने आसूं माँ, वन्दना ने मेरे साथ बहुत गलत किया। उसने मेरी दुनिया ही उजाड दी। कोई बहन अपनी सगी बहन के साथ ऐसा करती है क्या। गलती तो मेरी भी है मैंने आखं बदं करके वन्दना के ऊपर भरोसा कर लिया। मुझे नहीं पता … Read more

बुढ़ापा तो सबका आता है। – दीपा माथुर

दादा जी आप रोज रोज ये गीता सत्र क्यों देखते हो? डोरेमॉन आपको पसंद नहीं है क्या? दादा जी शुभ की इस मासूमियत पर खिलखिला दिए बोले ” देख तो सकता हु पर सिर्फ आपके साथ ही आप दिखाते ही नहीं हो? शुभ ने एक बात गर्दन नीचे झुकाई ओर तुरंत शरारती ढंग से दादा … Read more

“उपकार ” – कमलेश आहूजा

“आज ऑफिस से आने में देर क्यों कर दी?”-रिया गैस पर चाय चढ़ाते हुए पति रोहित से बोली। “अरे,एक कलिग(सहकर्मी) की फेअरवेल पार्टी थी इसलिए देर हो गई।अपने पिता को अकेला छोड़कर विदेश जा रहा है।” “रोहित,तुम्हारी माँ को तो हमारा एहसानमंद होना चाहिए हमने उन्हें अपने पास रखा हुआ है।अच्छा खाना,कपड़ा और सारी सुविधाएं … Read more

error: Content is protected !!