सही फ़ैसला

सुबह का समय था। शहर की सड़कों पर हल्की-हल्की चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। पूजा तेज़ कदमों से बस स्टॉप की ओर बढ़ रही थी। आज उसका नए स्कूल में पहला दिन था—एक शिक्षिका के रूप में। मन में उत्साह भी था और घबराहट भी। बार-बार घड़ी देख रही थी कि कहीं देर न हो … Read more

आख़िरी समय की जीवनसंगिनी

बरामदे की कुंडी खटकी तो रमाकांत ने अख़बार मोड़कर एक तरफ़ रखा। इस वक़्त किसी के आने की उम्मीद नहीं थी। दरवाज़ा खोला तो सामने खड़े व्यक्ति को देख वह ठिठक गए। सामने उनके कॉलेज के पुराने मित्र नरेश खड़े थे—चेहरा उतरा हुआ, आँखों के नीचे गहरे साये और कंधों पर ऐसा बोझ जैसे बरसों … Read more

करुणा का रिश्ता – सीमा गुप्ता

अस्पताल के बरामदे में लगी बेंच पर बैठी सुधा अपने हाथों को बार-बार मल रही थी। दिसंबर की सर्द रात में उसकी उँगलियाँ ठंड से सुन्न हो चुकी थीं और वह काँप रही थी। पर तन से भी ज्यादा उसका मन कांप रहा था। सामने से आती-जाती नर्सों, स्ट्रेचर पर ले जाए जाते मरीजों और … Read more

पछतावे के आँसू – लतिका 

संगीता जी वृद्धाश्रम के कमरे मे लेटे हुए अपने पुराने दिनों को याद कर रही थी। उनके आँखो से बहते आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। नींद आँखो से कोसो दूर थी। जो उनके बहुत चाहने पर भी आ नहीं रही थी।सोच रही थी कि सो जाती तो शायद कुछ देर के … Read more

निर्लज्ज – खुशी

सुहासिनी की शादी एक ऐसे परिवार में हुई जिसमें ससुर जी की बड़ी चलती थी और उसका पति भी अपने बाप से डरता था ।घर में किसी की हिम्मत नहीं थी कि वो ससुर रामबाबू के आगे बोल सके सास राधा भी डरी सहमी रहतीं।बेटी लक्ष्मी तो कुछ बोलती ही नहीं थी। उसकी शादी भी … Read more

ट्रैफिक जाम – एम. पी. सिंह

अरे, बाकी लोग कहाँ है, बॉस आते ही जोर से बोला, 8 बजे का टाइम दिया था, 9 बजे गए है, कब शुरू होंगी पार्टी? मानकी, रोहन,  सुमित और कोमल सब ट्रैफ़िक जाम मे फसे है, बस आते ही होंगे. सोनल की बात सुनकर सब ऑफिस वाले बैंगलोर के ट्रैफिक को कोसने लगे पर खुशी … Read more

जरूरत – लतिका श्रीवास्तव

रमिया क्या कर रही है कब से पुकार रही हूं जल्दी से बर्तन धोकर दे  साहब का लंच भी तो बनना है ।तू है तो सुन ही नहीं रही है मालिनी जी ने पीछे वाले आंगन में तेजी से घुसते हुए जोर से कहा तो देखा रमिया अपने जिद मचाते सुबकते तीन वर्ष के पुत्र … Read more

अपनों से तो गैर भले – रश्मि झा मिश्रा 

“…इस बार सोचती हूं, मां पापा की एनिवर्सरी में उन्हें सरप्राइज दिया जाए… वैसे भी उनके नए घर में मुझे रहने का मौका नहीं मिला है… इसी बहाने चार दिन रह भी लूंगी उनके साथ… ठीक है ना रजत…!” “… जो तुम्हें ठीक लगे… देख लो… टिकट कर लेना, या फिर मुझे बता देना…!”  बात … Read more

अपनों से तो गैर भले – स्वाती जैंन

साहिल के  फोन की स्क्रिन पर किसी मोना नाम की लड़की के मैसेज का नोटिफिकेशन देखकर राखी से रहा नहीं गया और वह फोन हाथ में लेकर चेक करने लगी ! साहिल का फोन लॉक था और सहिल वैसे भी अपना पासवर्ड कभी राखी को बताता नहीं था मगर उपर आए नोटिफिकेशन में मोना का … Read more

मैं भी तो एक बेटी हूं। – सीमा गुप्ता

सुबह के साढ़े चार बजे थे। अभी अँधेरा पूरी तरह छँटा नहीं था। अलार्म की घंटी के साथ अनन्या की नींद खुल गई। वह कुछ पल चुपचाप लेटी रही। पास ही सो रहे पति आदित्य की नींद न टूटे, इसलिए वह धीरे से उठी।  नहाने के बाद उसने तुलसी के सामने दीपक जलाया। हाथ जोड़ते … Read more

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