माँ के बाद… बाबूजी का ‘मायका’ – रमा शुक्ला
“माँ के जाने के बाद बेटी को लगा कि अब मायके के दरवाजे उसके लिए बंद हो चुके हैं, वहां अब सिर्फ भाई-भाभी का राज होगा। लेकिन जब उसने ‘पराई’ होकर उस घर की देहरी लांघी, तो एक बूढ़े पिता ने अपनी कांपती हथेलियों में कुछ ऐसा थाम रखा था, जिसने ‘मायके’ की परिभाषा ही … Read more