इंसानियत – परमा दत्त झा

आज दुखन पर पंचायत बैठा था।कारण दुखन श्वसुर होकर बहू का हाथ पकड़ा और गोद में उठा कर—! मधुबनी जिले का वह सोनवर्षा गांव जहां करीब चालीस घर मंडल परिवार है उसी में एक दुखन मंडल का घर है। पूरा भगवान के कोप से शापित अभागा परिवार।दुखन दो भाई और सात बहनें सबसे बड़े भाई … Read more

असहाय नहीं हूं मैं…- बबिता झा

आज सुबह उठने में देर हो गई बगल में देखा तो यह भी बिस्तर पर नहीं थे आज तो रविवार है फिर आज यह सवेरे कैसे उठ गये ,मैं भी उठकर बालकनी में चली गई ,तभी मेरे हाथों में चाय थमाते हुए बोले गुड मॉर्निंग, मैं भी चाय की प्याली हाथ में  ले मुस्कुराने लगी … Read more

रिश्ते की गर्माहट -शिव कुमारी शुक्ला

सुबह ऑफिस जाते बेटे को टिफिन पकड़ाते हुए मम्मी विमला जी ने कहा बेटा नीरज मुझे कुछ रुपयों की जरूरत है यदि तुम दे देते तो मैं भी अपना काम कर लेती। क्या मम्मी कितने रुपयों की जरूरत है आपको। यही कोई पंद्रह हजार। क्या पंद्रह हजार। इतने रुपयों का आप क्या करेंगी।ऐसी कौन-सी आवश्यकता … Read more

मानवता – बालेश्वर गुप्ता,

        रात्रि के नौ बजे होंगे, दरवाजे  पर कॉल बेल का स्विच लगा होने के बावजूद कोई दरवाजा जोर जोर से पीट रहा था. ये तो समझ में आ गया था कि निश्चित ही कोई बड़ी परेशानी है. तभी तो दरवाजा पीटने की व्यग्रता है, यह स्वाभाविक ही होता है. मेरे सामने धर्म संकट आ खड़ा … Read more

समय सबका आता है – उषा भारद्वाज

      पूरा हाल लोगों से भरा हुआ था। सबकी नज़रें मुख्य अतिथि यानी आई•ए•एस• सविता सिंह के आने की प्रतीक्षा में लगी थी। आर्ट गैलरी के उद्घाटन के लिए उनको बुलाया गया था। तभी कुछ लोग दौड़ते हुए गेट के पास पहुंचे। एक कार वहां आकर रुकी उससे बाहर प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालकिन सविता सिंह उत्तरी। … Read more

रिश्तों का गणित – सरोज माहेश्वरी 

         रोज़ाना की तरह रवि ने अपने ऑफिस में प्रवेश किया और अपने सभी सहकर्मियों से हाय हैलो करता हुआ अपनी टेबल तक आ गया। आज उसके सहकर्मी अजय का जो कि उसका मित्र भी है, चेहरा थोड़ा सा मुरझाया हुआ था जबकि हमेशा दिलकश मुस्कान के साथ खिला रहता है।वह उसकी उदासी का कारण समझ … Read more

इंसानियत – खुशी

गीता जी एक सीधी साधी महिला थी उनके पति थे गोपाल।गीता जी बीटेक थी और उन्हें कंप्यूटर की बहुत अच्छी नॉलेज थी ।शादी से पहले वो नौकरी करती थी परंतु शादी के बाद गोपाल को घर में रहने वाली बीवी चाहिए थी जो घर का मां पिताजी का ध्यान रखें सब काम टाइम पर हो … Read more

असमर्थ नहीं हूं मैं – मंजू ओमर 

रुक्मणि जी, रूक्मिणी जी, हां कहां खोई हुई हो आप कब से आवाज दे रही हूं सुन ही नहीं रही है। हां बेटा वो बस ऐसे ही ,बोलो क्या बात है,वो गोविंद आया है नये स्वेटरों का आर्डर देने और पिछले पैसे देने आफिस में बैठा है । अच्छा अच्छा आ रही हूं मैं, इतना … Read more

अपनो से गैर भले – के आर अमित

दो साल बाद जब भी छुट्टी आता तो उसकी भाभी उसे जाने से हफ्ता दस दिन पहले कोई न कोई लड़की शादी के लिए दिखा देती और कहती कि अब रिश्ता हो गया है जब अगली बार आओगे तो धूमधाम से शादी करवा देंगे। चन्द्र खुश हो जाता और बापिस विदेश चला जाता मगर हर … Read more

आश्रिता – शुभ्रा बैनर्जी 

“देखिए ना,हमारे ऊपर तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी है,कहीं भी आना-जाना नहीं कर सकते हम।आप लोगों की तरह मैं स्वतंत्र तो हूं नहीं।मंहगाई है कि बढ़ती जा रही है,और खर्च है कि कम होते ही नहीं।बुढ़ापे में बीमारी भी बिन बुलाए मेहमान की तरह आ जाती है।मैं तो आप लोगों के साथ ट्रिप पर नहीं जा … Read more

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