अपनत्व की छाँव – सीमा गुप्ता
“मम्मा, आपसे एक बात पूछूं?” मेरी नई नवेली पुत्रवधू आस्था ने मुझसे कहा। उसकी आंखों में जिज्ञासा और स्वर में हल्का सा रोष था। “अरे बेटा! अपनी मां से बात करने के लिए अनुमति की क्या ज़रूरत?” मैंने मुस्कराकर कहा। आस्था ने कहा, “मम्मा, ये बताइए कि आकृति दीदी की ननद के घर दीवाली का … Read more