नई राहें – लतिका श्रीवास्तव

दिसम्बर का उत्साह पूरे उफान पर था।शायद अपनी बारी की प्रतीक्षा करते करते अंत में वहीं बचता है अकेला पूरे वर्ष का भर ढोने वाला।पूरे वर्ष सारे महीनों ने जो उम्मीदें पूरी नहीं की उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी का बोझ उठाता दिसंबर कभी निराश नहीं दिखता।मेरे साथ यह वर्ष खत्म हो जाएगा इसका दुख … Read more

अहंकार – खुशी

प्रिया एक पढ़ी लिखी लड़की थी जो आत्मविश्वासी थी ।एक बड़ी आईटी कंपनी में मैनेजर थी ।घर में मां आराधना और पापा मयंक थे।मयंक घर जमाई थे क्योंकि आराधना के पापा का बहुत बड़ा बिज़नेस था और आराधना उनकी इकलौती बेटी थी जो मयंक के साथ पढ़ती थी और वो मयंक को पसंद करती थी। … Read more

इंसानियत – सीमा सिंघी 

आज लाजवंती का सुबह से ही मन बहुत उदास था। वह करने को सुबह से चूल्हे में आग धरना, लाल चाय बनाना, साग बनाना सब कर तो रही थी मगर उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। वह बार-बार यही सोच रही थी ।  जब किसी के पास थोड़ा धन आ जाता … Read more

किस्मत वाली – के आर अमित

क़िस्मत के खेल की ऐसी कहानी जिसपर भरोसा करना  तो मुश्किल है मगर ये बिल्कुल हुआ एक छोटे से गांव में। कहते हैं न कि समय और किस्मत कब बदल जाए किसी को नही पता इसलिए किस्मत को आजमाते रहना चाहिए। हिमाचल की पहाड़ियों के बीच बसा है छोटा सा गांव धारकोट। चारों ओर देवदार … Read more

साथ चलोगे – संजय मृदुल

सुनो! तुम कुछ कहना चाहते हो? रुचि ने अंशुल को रोक कर कहा। अंशुल हतप्रभ खड़ा रह गया, समझ नही आया क्या जवाब दे, क्या कहे? पूरे छः साल के बाद ये पूछा था रुचि ने। अंशुल को असमंजस में देख कर रुचि ने ही कहा, शाम को मिल सकते हो, वहीँ? जी जरूर। इतना … Read more

एक और मौका । – उमा वर्मा

सुमी का ससुराल में आज पहला दिन था।कल ही एक हाॅल में शानदार तरीके से शादी हुई थी ।रात भर शादी की धूम धाम थी अभी अभी घर आई थी।मुँह दिखाई की रस्म चल रही थी ।बगल में सास मीता बैठ कर सबसे परिचय करा रही थी।तभी कानों में किसी ने धीरे से कहा “अपनी … Read more

बचपन – एम. पी. सिंह

रोहन एक सीमेंट फैक्ट्री में टेक्निशियन था और उसकी एकलौती बेटी कान्ता क्लास 8 में पड़ती थी. फैक्ट्री केम्पेस में कम्पनी का 2 बेड रूम का मकान. उसकी क्लास में एक नया एडमिशन हुआ, जिसका नाम था पायल. पायल के पिता फैक्ट्री में सीनियर अधिकारी थे, कम्पनी का बड़ा बंगला, नौकर चाकर, कारें ड्राइवर, गार्ड … Read more

इंसानियत अभी जिंदा है – मंजू ओमर 

कल्लू वो कल्लू कहां घूम रहा है। कितने दिनों से तुम्हें फोन लगा रहा हूं ,पर फोन बंद था रहा है।कहां था इतने दिन से ।बस बाबूजी फोन रिचार्ज नहीं था ।आजकल कहीं काम नहीं मिल रहा था पास में  पैसे नहीं थे तो रिचार्ज नहीं कर पाया ।अच्छा इधर आ घरमें कुछ काम  कराना … Read more

यह रिश्ता टूटता ही नहीं -शुभ्रा बैनर्जी 

“मां,कल हम लोग आ रहें हैं।वकील अंकल को बुलवा लीजिएगा।घर के पेपर्स तैयार हैं ना?मैंने दो साल पहले ही कहा था आपसे।अब ना -नुकुर मत करिएगा।इस बार आप आ रहीं हैं हमारे साथ बैंगलुरू।और हां ,हमारा कमरा तो काली है ना,या उसमें भी बच्चे रहते हैं? मैं अपने कमरे में कोई भी बदलाव नहीं देखना … Read more

इंसानियत अभी जीवित है – गीता वाधवानी

महानगर मुंबई, एक छोटी सी खोली में रहने वाले तीन दोस्त। नवीन, अजय और सुनील। नवीन किसी कंपनी के ऑफिस में पिओन का काम करता था। अजय और सुनील एक जूते बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। तीनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे और मिल बांटकर गुजारा करते थे। तीनों को घर पर … Read more

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