माटी की गुड़िया – अनिता गुप्ता
माँ ने अपने हाथों की लकीरें मिटाकर बेटे की तकदीर लिखी थी, लेकिन बेटे के ‘आधुनिक’ घर में उस माँ के लिए कोई कोना नहीं बचा। क्या एक बेटे की तरक्की उसकी माँ के आत्मसम्मान से बड़ी हो सकती है? सावित्री देवी की आँखों से आंसू बह निकले। मूर्ति टूटने का दुख नहीं था, बेटे … Read more