थोड़ा समय मुझे भी चाहिए – मुकेश पटेल
“बस, अब और नहीं, निखिल… आज तो मुझे बोलने दो,”सिया ने बरामदे में कपड़े फैलाते-फैलाते अचानक बाल्टी ज़मीन पर रख दी। उसकी आवाज़ में रोना भी था और थकान भी। निखिल ने अख़बार से सिर उठाया, चश्मा थोड़ा नीचे खिसका,“क्या हुआ फिर से? सुबह-सुबह तने हुए चेहरे का मतलब है, कुछ ना कुछ शुरू होने … Read more