अपना घर – मनमोहन तिवारी
“लो, तुम फिर यहाँ अँधेरे में खड़ी आँसू बहा रही हो… अब क्या हुआ? अभी तो अंदर सब कितना हँस-बोल रहे थे, समीर की प्रमोशन की खुशी मना रहे थे और तुम अचानक उठ कर यहाँ बालकनी में आकर रोना चालू हो गई।” पति, विवेक ने झुंझलाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में चिंता कम और … Read more