बदलाव – उमा महाजन

‘यह क्या छुटकी बहू ! तुम नए जमाने की होते हुए भी मेरी ज्यादा लाड़ली हो, तो इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे पुराने सनातन रीति-रिवाजों में भी दखलंदाजी करने लगोगी । क्या तुमने कभी किसी के विवाह के निमंत्रण कार्ड पर नाना-नानी लिखा नाम देखा-सुना है ? अरे, हमारे जमाने में तो नाना-नानी अपने … Read more

कर्मों का चक्र चलता रहता हैं। – विनीता सिंह

दिल्लीः के प्रगति  के पास आर -के हमसे गाड़ियों को बहुत बड़ा शोरूम था इस शोरूम के मालिक राम कपूर की थे बहुत ईमानदार और बहुत मेहनती और अपने साथ काम करने वालों की बहुत ज्यादा इज्जत करते थे और सब लोग उनकी बहुत सम्मान करते हैं पहले वह भी अपने गांव से आए और … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – दीपा माथुर

उमेश ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा— “नीना, यार सॉरी… अब ये गलती नहीं होगी। चलो, खाना खा लेते हैं। सच में, पेट में तो चूहे कूद रहे हैं।” उनके स्वर में चुहल और मुस्कान दोनों थे। नीना ने आँखें तरेरीं। माथे की उभरी रेखाओं और कड़ी नज़र से गुस्से का आभास साफ़ झलक रहा था। … Read more

सबक सिखा कर रहूंगी – ऋचा उनियाल

“रमा तू आज फिर लेट हो गई? तेरा ये अब रोज़ का नाटक हो गया है, पहले तो ऐसा नहीं करती थी!! ऊपर से तेरी आए दिन की छुट्टी से मैं तंग आ गई हूं। देख साफ साफ कह रही हूं रमा, अगर ऐसा ही चलता रहा ,तो मुझे नहीं करवाना तुझसे कोई काम वाम … Read more

तृप्ति – ऋचा उनियाल

माथे का पसीना अपने दुपट्टे से पोंछती हुई ,नियति किचन से निकल कर आई और लिविंग रूम में रखे सोफे पर, धम्म से बैठ गई।थकान से पूरा शरीर दर्द कर रहा था उसका। सितंबर का महीना था और पितृपक्ष चल रहे थे। आज उसके ससुर जी का श्राद्ध था। बस थोड़ी देर पहले ही पण्डित … Read more

मां के आंसुओं का हिसाब – निमिषा गोस्वामी

शादी के दस बाद हिना को बेटा हुआ । दुनिया भर के ताने सुनने के बाद आज उसे इतनी खुशी मिली कि वह सारी बातें भूल गई बस अपलक अपने बेटे को निहारती रही ।देखा मैंने कहा था न कि एक दिन हमारे आंगन में भी खुशियों के फूल खिलेंगे हिना अपने पति हेमंत का … Read more

तुम सा नहीं देखा भाग – 4 अनु माथुर : Moral Stories in Hindi

अब तक अपने पढ़ा… शौर्य को रघुवीर जी समझते है और इधर यशिका अभिमन्यु से मिलने आती है अब आगे …. अभिमन्यु ने एच .आर. से बात करके वेटर को बुलाया बिल पे करके रेस्टुरेंट के बाहर निकला और अपनी गाड़ी में बैठा ही था कि उसका फोन बजा उसने देखा शौर्य का फोन था … Read more

नई राह – प्रियंका सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रामनगर शहर की भीड़भाड़ वाली गलियों में नलिनी जब भी किताबें दबाए निकलती, मोहल्ले में कानाफूसी शुरु हो जाती — “यही है विमल की विधवा!” “विधवा होकर पढ़ाई करने जाएगी ? शर्म नहीं आती इसे ?” “एक महीना नहीं हुआ पति को गुजरे और चल दी मैडम बन-ठन कर। “ लेकिन नलिनी हर आवाज़ को … Read more

फ़ैसला – डॉ पुष्पा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

पिछले दो दिनों से अपना कमरा बंद किए पड़ी नीलांजना,  अचानक दरवाजा खोल, बाहर आ खड़ी हुई थी- ”बाबूजी, मैंने फ़ैसला कर लिया है, मैं काजल भाभी का साथ दूंगी। अदालत में उनके पक्ष में गवाही दूंगी।“ नीलांजना की घोषणा से पूरे घर में सन्नाटा खिंच गया । बड़े भइया की मृत्यु पर मातमपुर्सी करने … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – विनीता सिंह :  Moral Stories in Hindi

लखनऊ शहर एक नवाबों का शहर है इसी शहर से दूर एक गांव में ठाकुर सूरजप्रतप सिंह जी की हवेली थी। जो कि पहले जमींदार थे लेकिन जब भारत आजाद हुआ उसके बाद में सब की जमीदारी खत्म हो गई हवेली के बहुत बड़े-बड़े फाटक लेकिन उसके अंदर जो जिंदगी थी उसकी कहानी है। सूरज … Read more

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