रिटायरमेंट ‘डिप्रेशन’ नहीं है – उमा महाजन

     कल रात देर रात तक अपना आर्टिकल लिखते हुए मिसीज सक्सेना काफी देर से सो पाई थीं। अब उन पर नौकरी के कारण सुबह जल्दी उठने के लिए घड़ी की सुइयों का बंधन तो है नहीं।सो, जैसे ही रोज की तरह घड़ी का अलार्म बजा, उन्होंने हाथ बढ़ाकर अलार्म बंद कर दिया कि थोड़ी देर … Read more

( ना ) जायज़ रिश्ते 

गुड़गांव की आई.टी. सेक्टर की बड़ी कंपनी में शालीन और शैलजा काम करते थे. दिल्ली और एनसीआर में ही नहीं, सभी बड़े शहरों में और अब तो कस्बों और गांवों में भी अनेक प्रेम कहानियां रोज ही बनती और बिगड़ती रहती हैं. मैट्रो ट्रेन में, कैंटीन में, बस स्टॉप पर और ऑफिस में रोज ऐसी … Read more

रिटायरमेंट ‘डिप्रेशन’ नहीं है – उमा महाजन

     कल रात देर रात तक अपना आर्टिकल लिखते हुए मिसीज सक्सेना काफी देर से सो पाई थीं। अब उन पर नौकरी के कारण सुबह जल्दी उठने के लिए घड़ी की सुइयों का बंधन तो है नहीं।सो, जैसे ही रोज की तरह घड़ी का अलार्म बजा, उन्होंने हाथ बढ़ाकर अलार्म बंद कर दिया कि थोड़ी देर … Read more

कर्मों का चक्र – विक्रम की कहानी – डॉ. स्नेहा नीलेश निंबालकर

विक्रम एक बड़े शहर में बिज़नेस करता था। शुरूआत में वह मेहनत से काम करता था, लेकिन जैसे-जैसे पैसा और ताक़त उसके हाथ आई, उसकी नीयत बदलने लगी। वह ठेके लेने के लिए रिश्वत देता, नकली कागज़ बनवाता और घटिया माल बेचकर लाखों रुपए कमाता। धीरे-धीरे उसने और भी बुरे काम शुरू कर दिए—लोगों से … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – के आर अमित

हांजी भैया जी आपकी एक किलो चीनी हो गयी और दूध का पैकेट भी डाल दिया। बोलो तो ये कपड़े धोने का साबुन दे दूं नया आया है बहुत बढ़िया क्वालिटी है आपका काम आसान हो जाएगा। मेरा काम आसान हो जाएगा मतलब?? अरे भैया जी अब इसमें छुपाने की क्या बात है पूरा मोहल्ला … Read more

आपे से बाहर होना – निमिषा गोस्वामी

शालू ऊ ऊ ऊ ऊ तुमने इन बच्चों को मेरे कमरे में कैसे आने दिया। निकालो इन्हें बाहर।सारा कमरा बिखरा दिया। वैभव अपने कमरे को बिखरा हुआ देखकर आपे से बाहर हो गया। वह ज़ोर से अपनी बीवी पर चिल्ला रहा था। शालू किचन में चाय बना रही थी। गैस बंद कर घबड़ाकर भागी।क्या हुआ … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – नीरज श्रीवास्तव

   कुछ तो लोग कहेंगे की हरिया पागल हो गया तो शायद कुछ कहेंगे कि हरिया भाग्यशाली था जो वह ऐसी घटना का साक्षी बना।          हरिया लखनपुर गाँव में रहता था। हरिया के परिवार में उसके अलावा और कोई न था क्योंकि हरिया के माँ-बाप तो बहुत पहले ही हैजा रूपी महामारी के शिकार हो … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे – निमिषा गोस्वामी

एक ऐसे परिवार की कहानी जहां पर औरतों को अकेले घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं थी। चाहे वह बेटी हो या बहु। अमरनाथ का परिवार एक ऐसा ही परिवार है। संयुक्त परिवार होने के कारण घर के सबसे बड़े यानि कि अमरनाथ के पिता सिरोमणी जी का ही आदेश सर्वोपरि होता है। अमरनाथ … Read more

कर्मों का चक्र तो चलता ही रहता है – सोनिया अग्रवाल

आज सुरभि को मायके लौटे हुए पूरे 25 दिन बीत गए थे , मगर अजय को न उसकी परवाह कल थी और न ही आज। कहते है न परवाह भी इंसान उसी की करता है जिसकी उसे जरूरत होती है , उस से प्यार होता है। मगर जब अजय की जिंदगी में पहले से ही … Read more

लोग क्या कहेंगे छोड़ो,बच्चों की खुशी का सोचो – कमलेश आहूजा

“माँ,बंद करो अपना ये नाटक और जल्दी से तैयार हो जाओ।मैंने नेहा के घरवालों को आज होटल में मिलने के लिए कहा है।”रोहित सुषमा पर गुस्सा होते हुए बोला। नेहा रोहित के ही ऑफिस में काम करती थी।रोहित की ही तरह उसने भी बी ई व एम बी ए किया था।देखने में सुंदर थी।परिवार भी … Read more

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