काश तू फिर से मिल जाती… – रश्मि प्रकाश 

राशि अपने पति निकुंज और चार साल की बेटी कुहू और डेढ़ साल के कुश के साथ अभी दशहरे के वक़्त ही नए शहर में आए थे ।  बेटा अभी छोटा था तो काम करने वाली की खोज जारी थी। अपार्टमेंट हो तो आराम से काम वाली मिल जाती है पर छोटी जगहों पर काम … Read more

कैदी नंबर 214 – गीता वाधवानी

लगभग 22 वर्षीय पंकज को पुलिस इंस्पेक्टर सलाखों के पीछे धकेल कर चला गया। पंकज गिरते गिरते बचा और वहीं कोने में बैठकर अपने घुटनों में मुंह छुपा कर रोने लगा। तब इसी कोठरी में बंद 35-36 वर्षीय मनोज ने उसके कंधे को प्यार से सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ भाई,इतना क्यों रो रहे हो? … Read more

मैं किस्मत वाली हूं – मंजू ओमर 

तू कितनी किस्मत वाली है वैशाली, परिवार में कोई भी नहीं है न सास ने ससुर देवर जेठानी ननद अपना आराम से तू और विकास मौज मस्ती में रहते हैं । वैशाली की सहेली भूमि ने कहा। हां सास ससुर है भी तो वो अपने घर में रहते हैं यहां तुम्हारे पास नहीं । अच्छा … Read more

बड़ी बहू होना सम्मान है अधिकार नहीं – सीमा सिंघी

शुभ्रा मैंने तुमसे कितनी बार कहा है । जब भी रसोई में काम करती हो तो पूरा निपटा के ही रसोई से निकला करो। मैं जब भी रसोई में आती हूं तो मुझे रसोई बिखरी हुई ही मिलती है।  न जाने तुम कौन सी दुनिया में खोई रहती हो। जो तुम्हारा काम खत्म होता ही … Read more

रिश्ते अधिकार से नहीं, करुणा से चलते – सिम्मी मल्होत्रा

सविता की तबीयत दिन-ब-दिन अधिक बिगड़ने लगी थी। वह कई दिनों से बस एक ही बात दोहराती रहती—“मेरी बिटिया को देखना है… एक बार उसे देख लूं… बस एक बार।” उस दिन दोपहर के वक्त फोन बजा। नंबर मायके का था। दिल धक से रह गया, लेकिन जैसे ही मैंने रिसीवर उठाया, उधर से भाई … Read more

अहमियत – गरिमा चौधरी 

“तुम दोनों की शक्ल देखकर लग रहा है, बात कुछ बिगड़ी है,” आंगन में तुलसी को पानी देते-देते शारदा देवी की आवाज़ आई। उनकी उम्र अस्सी के आसपास थी, पर आँखों में वही चमक और शब्दों में वही वजन। पास ही बैठी बहू कृति रोटी सेंक रही थी और दामाद-पोती की जोड़ी—नव्या और आर्यन—चुपचाप एक-दूसरे … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – मधु वशिष्ठ

दादी की आवाज जोर-जोर से आ रही थी वह चाची से बात कर रही थी और कह रही थी अरे काहे को अभी से बिटिया के लिए वर ढूंढे है, छोरी को पढने दो और फिर बिट्टो वाले मेहमान जैसा ही कोई लड़का देख लियो।” “क्याआआआआ? दादी ऐसा बोल रही है?” नाचती हुई बिट्टो रुक … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – बबीता झा

आज मैं जब अस्पताल से आ रही थी तो अंदर एक सुकून सा एहसास हो रहा था। आज मैं एक ऐसी शख्स मिली जो मेरा पेशेंट नहीं था, मेरा कोई अपना भी नहीं था, लेकिन पता नहीं क्यों आज उसको देखकर अजीब सी खुशी मिल रही थी।   घर पहुंची तो अजय ने कहा, “दीपा, कितनी … Read more

सम्मान को अधिकार ना समझे। – लतिका पल्लवी

  जाड़े के दिन थे। कड़ाके की ठंड पर रही थी। 1से 5तक की कक्षा विद्यालय नें स्थगित कर दिया था पर 6 से 12 की पढ़ाई चल रही थी। विद्यालय सात बजे की जगह नव बजे से खुलता था पर बच्चों को जाना पड़ता था और जब बच्चे विद्यालय जाएंगे तो उनके खाने के लिए … Read more

घर बचाना है तो अहंकार छोटा कर बहू – नीलम गुप्ता 

निखिल ने निशा को एक शादी में देखा था लंबी छर हरी सांवली सलोनी निशा की बड़ी-बड़ी शर्मीली आंखों ने उसे जैसे सम्मोहित कर लिया। पूरे समय वह उसे ही देखता रहा और अवसर पाते ही बोला -हेलो मिस ब्यूटीफुल ! क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं? निशा ने हैरानी से उसे देखा और … Read more

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