स्वर्णा – गीता वाधवानी
आज जब स्वर्णा कंप्यूटर इंजीनियर बन कर मेरे सामने आई तो, मैं खुशी से अपलक उसे निहारती ही रह गई। कितनी प्यारी और सुंदर लग रही थी हमारे स्वर्णा। अपने नाम के अनुरूप उसने गुण भी पाए थे। वह सचमुच सोना है सोना, खरा सोना। हंसमुख, दयालु, कुशाग्र बुद्धि, थोड़ी चंचल चप्पल, खट्टी मीठी और … Read more