बहू रात के जुठे बर्तन सिंक में धोकर रखा करो!!  – मनीषा भरतीया

सविता जी वैसे तो बहुत ही सरल स्वभाव की थी |उन्हें किसी भी चीज में उंगली करने की आदत नहीं थी |लेकिन उनके कुछ अपने नियम थे|, जिनसे वह समझौता नहीं करना चाहती थी| सविता जी अपने पति ,बेटी ,बेटा और बहू के साथ सविता निवास में रहती थी| वह बेटी और बहू में कोई … Read more

 आसमान की सैर – मनीषा भरतीया

#एक_टुकड़ा साधना अपनी 2 साल की बेटी स्वीटी को लेकर ट्रेन लाइन पर आगे बढ़ते चले जा रही थी….. यह सोचते सोचते कि आखिर साहिल ने आत्महत्या क्यों की यूं हमें रोते हुए अकेला क्यों छोड़ गया??? वह तो बहुत बहादुर था उसने तो जब मैं जिंदगी से निराश और हताश होकर आत्महत्या करने जा … Read more

सरप्राइज गिफ़्ट –   किरण केशरे

करोना के कारण लम्बे लाकडॉऊन के बाद अब कुछ छूट मिली थी ,शहर में।  नीता अपनी बेटी मिनी का , जन्मदिन धूमधाम से मनाना चाहती थी, और क्यों नहीं मनाए , वैसे भी लड़कियों के लिए सोलहवाँ साल बड़ा मायने रखता है ।आसपास के सभी बच्चों और कुछ मिनी की और अपने कुछ पारिवारिक मित्रों … Read more

मीठी सी मिट्ठी – लतिका श्रीवास्तव

मम्मा मम्मा…. देखो ना मेरी फ्रेंड ने मुझे ब्लॉक कर दिया अचानक कल तक तो सब ठीक था अभी सुबह मैने देखा तो ब्लॉक!!!!अब मैं क्या करूं आप ही बताओ इससे बात किए बिना मैं एक दिन तो क्या एक घंटे भी मैं नहीं रह सकती ….. अत्यधिक परेशान कुहू के बोलने पर शुभा की … Read more

अनाथ – विनय कुमार मिश्रा

“सर जी! मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूँ..कोई काम मिलेगा क्या आपके पास” मैंने गौर से देखा उसे। लगभग 14 साल का होगा। थका हारा पर आँखों में उम्मीद और शायद परिवार की जिम्मेदारी दोनों थी। अपना बचपन याद आ गया जब माँ बाप गुजर गए थे और मनोहर भी छोटा था। तब पुजारी बाबा … Read more

मन का मिलन – सीमा वर्मा | Moral Short Story In Hindi

आज शाम से ही रुक -रुक कर बारिश हो रही है। चार कमरे वाले विशाल फ्लैट की बलकॉनी में शिवानी उमस भरी गर्मी में बेचैन सी टहल रही है। पति सुधीर ऑफिस के टूर से मुम्बई गये हैं। अचानक उसे कुछ याद आया उसने कमरे के टेबल पर आ कर देखा , ” यह क्या … Read more

बड़ा कौन? – प्रतिभा गुप्ता

एक आदमी था।उसका नाम था राजेश वह बहुत महत्वाकांक्षी था।उसके पास सब कुछ होने पर भी उसके मन में और अधिक पाने, कमाने का लालच समाया रहता था।वह एक एक रूपए की कंजूसी करने में विश्वास करता था। कभी किसी भिखारी को देख लेता तो मुंह घुमा कर निकल लेता।यदि कभी किसी ने आवाज लगा … Read more

“आठवां फेरा” – संगीता अग्रवाल

” भाई साहब हमे तो आपकी बेटी बहुत पसंद आई। जैसी बहू की हमने कल्पना की थी बिल्कुल वैसी है आपकी काशवी!” अपने बेटे के लिए लड़की देखने आई मधु जी लड़की यानी की काशवी से मिलकर बोली। ” जी बहनजी ये तो बहुत अच्छी बात है अब काशवी की मां तो है नही सास … Read more

चितकबरी….. सीमा बत्रा

मंजूला अपनी माँ बाप की नौ संतानो में से 7वें नंबर पर थी। 6बहने 3 भाई, दादा और दादी से भरा पूरा घर था। मारवाड़ी परिवार में किसी भी चीज की कमी नही थी। पिता घन्श्याम अग्रवाल 1950-60 में भी कीफी प्रोगेसिव विचारों के थे। उन्होंने अपने बच्चों में कोई भेदभाव नही किया। तब लड़कियों … Read more

बेटा – गरिमा  जैन 

मां यह एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर कानो को ही नहीं आत्मा को भी सुकून मिलता है पर आरती के लिए यह शब्द दिल को सुकून देने वाला कभी रहा ही नहीं ।आज सुबह जब पापा का फोन आया तब उन्होंने रोती हुई भराई आवाज में कहा “आरती तेरी मां बहुत बीमार है, डॉक्टर … Read more

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