दान का इंतिहान – अर्चना नाकरा
दादाजी की शुद्धि विधिवत संपन्न हो गई थी दादी तटस्थ भाव से बहुत देर तक बैठी रही फिर धीरे से उठ कर उन्होंने दादा जी की अलमारी में से उनके रखे सामान को एक-एक करके निकालना शुरू किया ‘कपड़े जूते.. उनकी छड़ी”! जिसमें “दादाजी की जान बसती थी” और न जाने कितनी चीज विशेषता ‘भीतरी … Read more