मर्यादा की वेदी पर कुर्बान’ – प्रियंका सक्सेना

सुधा की खबर आते ही घर में मातम छा गया…अम्मा छाती पीट पीट कर विलाप करते हुए सुधा की ससुराल वालों को कोसने लगीं, “कीड़े पड़े उन लोभियों को। मार डाला मेरी बिटिया को। हाय मेरी सुधा, मेरी बिटिया!  गार्गी से जब सहन नहीं हुआ तो वह आँगन में आकर बोली, “अम्मा दीदी को उन … Read more

डॉगी की व्यथा –  बालेश्वर गुप्ता

  कहीं पढ़ा भी था और समझा भी था कि शांति और सम्मान के साथ यदि जीवन यात्रा पूर्ण करनी है तो बुढ़ापे में सहनशील होना और चुप रहने की आदत डाल लेना ही कुंजी है।रमेश ने इन गुर को अपना लिया था।मुन्ना को उसने समझा दिया था बेटा देख हमने तो अपनी जीवन की पारी … Read more

लिव इन – भगवती सक्सेना गौड़

रामेश्वर जी रिटायरमेंट के बाद अपने तिमंजले घर मे सबसे नीचे पत्नी के साथ ही रहते थे। दोनो बेटे बड़े शहरों में व्यवस्थित हो चुके थे।  एक दिन सुबह उठकर उनकी पत्नी सारंगी गार्डन में घूम रही थी, तभी गेट खोलकर कोई लड़के लड़की ने अंदर प्रवेश किया। “सुनिये, किसी ने बताया, आपके घर मे … Read more

अम्मा की सौगात – नीरजा कृष्णा

दो दिनों के बाद उर्मि को  प्रयागराज जाना था। वो बहुत खुथ थीं और फिर चल पडा़ पुरानी यादों का सिलसिला…. उनके छोटे भाई वहाँ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे और उन्होनें सबकी इच्छा के खिलाफ़ आयशा बेगम से विवाह किया था। वो उन यादों की नाव पर सवार होकर हिचकोले खा रही थीं। आयशा के … Read more

मर्यादा का उल्लंघन – लतिका श्रीवास्तव

……मेट्रो ट्रेन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ती जा रही थी….. आज कुछ ज्यादा ही भीड़ थी….सुदीप्ता काफी बेचैनी महसूस कर रही थी खड़े खड़े आज उसके पैर भी दर्द करने लगे थे…तभी अचानक उसे अपने एकदम नजदीक कुछ अनचाहा सा स्पर्श महसूस हुआ…एकदम छिटक कर उसने देखा तो एक स्मार्ट सा बंदा भीड़ का फायदा … Read more

गणिका और सन्यासी – कमलेश राणा

आज नींद कोसों दूर थी आँखों से,,गिनती भी गिन ली, सरहाना भी बदल लिया पर न जाने कहाँ कहाँ के ख्याल आ जाते और फिर नींद उड़ जाती कल्पनाओं के देश में। इसी उहापोह में भोर होने को आई और थक हार कर नींद भी बोझिल पलकों में समा ही गई।  एक बार फिर सपनों … Read more

मर्यादा – कल्पना मिश्रा

“बहुओं को हमेशा मर्यादा में रहना चाहिए। ज़्यादा छूट देने पर वह और ज़्यादा फायदा उठाती हैं।” ऐसा मेरी सासू माँ का कहना था। वह पुरानी पीढ़ी की सोच थी,और ग्रामीण परिवेश से भी थीं ,इसी कारण मैं हमेशा साड़ी में लिपटी,पल्लू लिये रहती थी और सूट तक पहनने के लिए तरस गई। लेकिन मैं … Read more

सवालों का घेरा – पुष्पा जोशी

हमेशा, बहू को मर्यादा में रहने की शिक्षा देने वाली, जानकी देवी को, आज उनकी बहू केतकी ने सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया था। जहाँ प्रश्न और उनके उत्तर देने वाली वे स्वयं थी और निर्णायक भी वे ही थी। केतकी पढ़ी-लिखी,सुसंस्कारी बहू थी।माँ ने उसे हमेशा मर्यादा में रहने की शिक्षा दी … Read more

” पहल” – अनिता गुप्ता

क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया था।” सासु मां ने अपनी बहु रुचिका से कहा। ” लेकिन मां! ” रुचिका ने कहना चाहा। ” लेकिन वेकिन कुछ नहीं। मैं चाहती हूं तुम अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ।इसलिए ही तो तुमको एलएलबी करने के लिए प्रेरित किया था। जिससे तुम बेकसूर पीड़ित महिलाओं … Read more

जुगल – अंकित चहल ‘विशेष’

सुपरमैन शक्तिमान कृष ये रुपहले पर्दे के हीरों देखने में बड़े आकर्षक और बढ़िया लगते हैं, मगर हक़ीक़त में असली हीरो बेहद साधारण होते हैं और हमारे आसपास ही होते हैं जो चुपचाप अपना काम करते हैं । ऐसा ही हीरो हमारी इस कहानी में है। बाबा मनसुख को सांसें खींच खींच कर आ रहीं … Read more

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