मैं नहीं चाहती कि मैं नेनी बन कर पूरी जिंदगी बिता लूं… – भाविनी केतन उपाध्याय 

”  भाभी, आज तो आप बहुत देर से उठी… चाय नाश्ता भी बच्चों ने आप के हाथों में लाकर दे दिया । मैं तो इंतजार कर रही थी कि आप आकर अपने बच्चों के साथ साथ मेरे बेटे का टिफिन भी बना लेंगे रोज की तरह…!! आप नहीं आई तो फिर मैंने उसे परांठा और … Read more

“तू मेरा सहारा और मैं तेरा” – ऋतु अग्रवाल

     “सुभीत! आप समझ नहीं रहे। नौकरी करने का उद्देश्य एकमात्र पैसे कमाना नहीं होता। हम काम इसलिए भी तो करते हैं ताकि आत्मनिर्भर बन सकें, कुछ नया सीख सकें, स्वयं को व्यस्त रख व्यर्थ की बातों और उधेड़बुन से दूर रह सकें।” मालिनी अपना पक्ष रख रही थी।        “मालिनी! मैं तुम्हारी बातों से सहमत हूँ … Read more

यादों के सहारे जीवन नहीं कटता –   शकुंतला अग्रवाल ‘शकुन’

उमा अपने कमरे की खिड़की  से क्षितिज को निहार रही है । भास्कर अस्ताचल की ओर डग भर रहे हैं साँझ की लालिमा अपने यौवन पर है रात की अगवानी के लिए। उमा को अपना जीवन भी इस डूबते सूरज-सा लगने लगा। जयंत के जाने के बाद से उसकी हालत भी तो कुछ ऐसी ही … Read more

तुम आ गए हो…… विनोद सिन्हा “सुदामा”

कहते हैं जिंदगी और कुछ नहीं बस यादों का कारवाँ है.खट्टी मीठी भूली बिसरी यादों का कारवाँ…फिर चाहें यादें क्यूँ न हमारे भूले बिसरे दोस्तों की हो.. रिश्तेदारों की हो..हमारी हो…आपकी हो या किसी और की..यादें हर घड़ी हमारे इर्दगिर्द हमारे जेहन में मंडराती रहती हैं.. आज भी अच्छी तरह से याद है मुझे…. मैं … Read more

“बाहरी” – नीरजा नामदेव

अलीना को पढ़ना बहुत पसंद था ।जब भी समय मिलता है पत्रिकाएं पढ़ती। अब तो इंटरनेट पर भी उसे पढ़ने को बहुत सारी सामग्री मिल जाती थी। एक भी दिन ऐसा नहीं जाता जब वह पढ़े बिना रह पाती। आज ही उसने एक पत्रिका में कहानी पढ़ी शीर्षक था ‘आउटसाइडर’ जिसमें बेटा विदेश पढ़ने जाता … Read more

कम्मो – अभिलाषा कक्कड़

माँ हम कहाँ जा रहे हैं ?? माँ को कपड़े बेग में डालते देख नन्ही तीन बरस की कम्मो पुछने लगी ।ममता ने प्यार से बेटी की तरफ़ देखते हुए कहा.. तुम्हारी नानी बहुत बीमार है हम उन्हीं को देखने जा रहे हैं । अभी कुछ ही देर में तुम्हारे पापा आ जायेंगे तो हम … Read more

पति का सहारा पत्नी बन गई  – कनार शर्मा 

रोहन कुछ दिनों से बहुत परेशान था उसके सामने रखी चाय भी ठंडी हो गई… वर्षा ने रसोई से आकर देखा और बोली “अरे आपकी चाय पर तो पपड़ी जम गई है” आपने पी क्यों नहीं?? लाइए दोबारा गर्म कर लाती हूं कप उठाते हुए बोली!! दोबारा से चाय गरमकर उसके सामने रख कहने लगी … Read more

अपनी तरह मुझे भी “सहारा” बना लीजिए !! – मीनू झा 

आज भी काफी मन लगाकर काम कर रही है देखना शाम तक जरूर फिर पांच सौ रूपये की डिमांड आ जाएगी। मैं तो तंग आ गई इनको काम के लिए रखकर दिमाग खराब कर देती है हर आठवें दिन–पति मोहन के लिए ब्रेकफास्ट प्लेट में लगाते लगाते मीरा बड़बड़ाए जा रही थी। अच्छा.. लगता है … Read more

एक दूसरे का सहारा –   मुकुन्द लाल 

शाम के समय रजनी पार्क में अपनी बच्ची पुष्पा के साथ बेंच पर खोई-खोई सी बैठी हुई सोच रही थी कि एक स्त्री के जीवन में ऐसा भूचाल भी आ सकता है? उसने ऐसा कभी सोचा ही नहीं था कि उसका सुगंधित और हर्ष से सराबोर दाम्पत्य जीवन एक झटके में ही ध्वस्त हो जाएगा … Read more

“एक दूजे के सहारे रिश्ते प्यार भरे” – कविता भड़ाना

“प्रिया”, “प्रिया”…. बेटा कहां हो? पुकारती हुई सुलभा जी ने देखा की उनकी नई नवेली बहुरानी ड्राइंग रूम में बैठी ऊंघ रही है….. दिसंबर महीने की कड़कड़ाती ठंड में 5बजे उठ कर नहा धोकर तैयार बैठी अपनी बहु को देख सुलभा जी को बड़ा प्यार आ रहा था, उन्होंने धीरे से जाकर प्रिया को जगाया … Read more

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