विषवृक्ष – रवीन्द्र कान्त त्यागी

छोटे से कस्बे में मेरा आई.आई.टी में उच्च श्रेणी प्राप्त करना कई दिन चर्चा का विषय रहा था. पहले महीने ही एक अंत्तराष्ट्रीय कंपनी में अच्छे पॅकेज की नौकरी लग जाने के बाद पिताजी ने वधु तलाश कार्यक्रम शुरू कर दिया था और ये स्वाभाविक भी था. महानगर की एक पौष कॉलोनी में प्रशासनिक अधिकारी … Read more

अपहरण का बदला – रवीन्द्र कान्त त्यागी

रात के दो बज रहे हैं। आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं है। मेरी पत्नी अनुष्का अपने तीन साल के वैवाहिक जीवन को ठोकर मार कर चली गई है। बरसों से मेरे हृदय में उसके लिए बसे अगाध प्रेम, समर्पण और विश्वास को एक तीन पंक्ति के कागज के पुर्जे से तार तार करके, मेरी … Read more

ये गंवार तुम्हारी मां है – मंजू ओमर

हेलो हेलो मां हां, हां बेटा कैसी है मां ठीक है ,और बेटा तू कैसा है कब आएगा तू ,कब से तेरे आने की राह देख रही हूं। बेटा बस जल्दी ही मिलूंगा मां, मां मैं शादी कर रहा हूं।दो दिन बाद मेरी शादी है बड़े होटल से । मां बस तुम तैयारी करके रखना … Read more

मंदाकिनी – बीना शुक्ला अवस्थी

आज मंदाकिनी एक अजीब सी खुशी और सन्तुष्टि अनुभव कर रही है। उसे ऐसा अनुभव हो रहा है कि उसने अपने जीवन भर के दुःखों, पीड़ा, तड़प और ऑसुओं का थोड़ा सा प्रतिकार ले लिया है।  कल गिरीश को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी है लेकिन उसका हृदय रो रहा होगा। उसके अपनो ने ही … Read more

रिटायरमेंट – हेमलता गुप्ता

जानकी… ऑफिस वाले कह रहे हैं बाबूजी अगले महीने रिटायर हो जाओगे तो घर में बैठकर भी क्या करोगे आप चाहो तो दोबारा यहां पर ही काम कर सकते हो अभी तो आप शारीरिक और मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हो, तो मैं सोच रहा था सही कह रहे हैं वह अभी तो मैं ऐसा … Read more

इंसानियत: कोई अपना सा – श्वेता अग्रवाल –

स्नेहा फटाफट सुबह के काम निपटाए जा रही थी| एक तो लॉक-डाउन की वजह से कामवाली भी नहीं आ रही थी ऊपर से पति मयंक का वर्क फ्रॉम होम, अंशुल की फरमाइशें और उसकी खुद की ऑनलाइन क्लासेस| सुबह के समय वह अच्छी खासी बिजी रहती थी। स्नेहा हाई स्कूल में मैथ्स की टीचर है … Read more

रिटायरमेंट – विनीता सिंह

आज सुबह का मौसम बडा सुहावना धीरे धीरे आसमान में से सूरज निकल रहा था। चारों ओर किरणों अपनी रोशनी फैला रही थी पक्षी की चहचहाहट की आवाज कानों में आ रही थी। एक बड़ा सा स्कूल तभी वहां एक पुरानी सी साइकिल लिए एक धोती कुर्ता और पैरों में चमडे की चप्पल पहन रखी … Read more

जैसी करनी वैसी भरनी – विमला गुगलानी

“ चाहत बहू, मेरा चशमा ठीक करवा ला बेटा, चार दिन से एक शीशे से पढ़ रही हूं, सिर दर्द होने लगता है”। बल्कि एक चशमा और ही बनवा दो, ताकि एक टूटे तो दूसरा काम आ जाए, सविता ने बड़े प्यार से बहू चाहत से कहा।       ओह माताजी, आपके काम ही खत्म नहीं होते, … Read more

आओ_जी_लें_जरा – सपना चन्द्रा

सूने से घर में पति-पत्नी के अलावा अब कोई नहीं था। खामोशी में लिपटी दरों-दीवार की चमकदार रंगत किसी काम की नहीं।कभी-कभी ऐसी खामोशी कि जिसे भेदना भी मुश्किल।दो जोड़ी आंखें किसी के आने की आस में रास्ते निहारते तो थे पर खुद को दिलासा देकर पलकें बंद भी कर लेते।दीवारों पर लगी तस्वीरें ही … Read more

सोन चिरैया – बंदना श्रीवास्तव

आज भी मुझे याद है रमा ने अपने  पति का परिचय मेरे कार पार्किंग में कराया था । “बंदना ,ही इज माई हसबैंड मिस्टर राज “मैंने औपचारिकता बस उनसे हाथ मिलाया और हेलो कहां । मिस्टर राज  ने एक हाथ में लैपटाप बैग पकड़ा हुआ था । दूसरी हाथ से  मुझसे हाथ मिलाते हुए हेलो … Read more

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