सौम्या , यह क्या तुम तो आराम से यहां बैठकर खाना खा रही हो , रात में मेरे बेटे अंशु ने गाजर का हलवा बनाने कहा था , तुमने अभी तक हलवा नहीं बनाया ! जेठानी रीटा अपनी देवरानी सौम्या से बोली !
सौम्या घबराहट से बोली – बस दीदी , अभी बना देती हुं आज सुबह मैंने नाश्ता नहीं किया था इसलिए बहुत भुख लग गई थी तो सोचा पहले खाना खा लूं !
रीटा ने तुरंत सौम्या के आगे पड़ी खाने की थाली छिन ली और बोली पहले मेरे बेटे के लिए गाजर का हलवा बनाओ ,बाद में खाना खा लेना ,वैसे भी तुम दोनों मां- बेटी बस मुफ्त की रोटियां तोड़ती हो , काम तो कुछ होता नहीं हैं तुम लोगो से ! यह सुनकर सौम्या की आंखों में आंसू आ गए ! पति के गुजरने के बाद एक दिन ऐसा नहीं बीता जब जेठानी ने कोई ताना ना मारा हो , पति के दुनिया से चले जाने के बाद सौम्या इस घर की बस नौकरानी बनकर रह गई थी उपर से जेठ सुरेश की गंदी नजरे हर वक्त उसे घूरती रहती ! एकाध- दो बार तो सुरेश ने उसका हाथ पकड़ने या कभी उसका रास्ता रोकने की कोशिश भी की हैं जिसका सौम्या ने दृढ़ता से सामना किया ताकि फिर कभी वह ऐसी हरकत करने की कोशिश ना करे मगर सुरेश की गंदी नजरो का सामना उसे अब भी करना पड़ रहा था जिस वजह से वह हर वक्त डरी सहमी सी रहती !
सौम्या रीटा का व्यवहार देख चुपचाप उठकर पहले गाजर का हलवा बनाने लगी ! थोड़ी देर में अंशु स्कुल से आ गया ! रीटा सौम्या को किचन में आवाज लगाकर बोली अरे भाई गाजर का हलवा अब तक बना या नहीं और अगर बन गया हो तो मेरे बेटे के लिए यहां बाहर ले आ !
अंशु अपना बैग पटक कर बोला- मैंने गाजर का हलवा आपसे बना ने बोला था मम्मी, आपने चाची से गाजर का हलवा क्यों बनवाया ?
उतने में सौम्या किचन से गाजर का हलवा लाकर बोली – बेटा यह ले गर्मागर्म गाजर का हलवा !
अंशु बोला- मुझे तुम्हारे हाथ से बना गाजर का हलवा नहीं खाना , तुम अब इस घर की नौकरानी हो और मैं नौकरानी के हाथों से बना खाना नहीं खाऊंगा !
यह सुनकर सौम्या स्तब्ध सी खड़ी रह गई और बोली – बेटा तू ऐसी बातें क्यों कर रहा हैं ? तुझे मैंने अपने हाथों से खाना खिलाया हैं और आज तू मुझे नौकरानी कह रहा हैं !
अंशु गुस्से में बोला – हां आप नौकरानी हो तो नौकरानी ही बोलूंगा ना ! यह सुनकर अंशु के माता- पिता हंसने लगे !
अंशु फिर से गुस्से में बोला- अगर इतना ही बुरा लग रहा हैं तो यह घर छोड़कर चली क्यों नहीं जाती ?
रीटा हंसते हुए बेशर्मी से बोली अरे बेटा , यह इस घर से कहीं नहीं जाने वाली , हमारे अलावा इसे कौन मुफ्त की रोटियां देगा ?
उन्नीस वर्षीय अंशु से अपमान के शब्द सुनकर सौम्या की आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे ! जेठ- जेठानी के अत्याचारो से वह वैसे भी त्रासित थी , धोखे से यह घर भी जेठ ने अपने नाम करवा दिया था और आज तो अंशु की कड़वी बातो ने उसे यह घर छोड़ने के लिए मजबुर कर दिया था ! सौम्या भरे गले से बोली – मैं मुफ्त की रोटियां नहीं खाती बेटा , उसके बदले में कोल्हू के बैल की तरह दिन भर काम करती हुं बोलकर वह अपने कमरे में आकर फुट फुटकर रोने लगी और सोचने लगी ऐसी जिल्लत की रोटी किस काम की जहां एक बच्चा भी अपमान कर दे और उसके माता- पिता वहीं बैठकर मुस्कुरा रहे हैं ! उसने तुरंत अपना और अपनी बेटी का सामान पैक कर दिया ! सौम्या की छः वर्षीय बेटी रानी बोली – मम्मी , हम कहां जा रहे हैं नानी के घर ? सौम्या की नजरो के आगे उसके भाई- भाभी की जलती नजरें घूम गई लेकिन फिलहाल वह कर भी क्या सकती थी ? वह बोली – हां बेटा , हम वहीं जा रहे हैं ! वह सामान पैक करके जैसे ही बाहर निकली उसकी जेठानी रीटा सामने आकर तन कर बोली – कहां जा रही हो महारानी ? मेरे बेटे की बातों का बुरा लग गया क्या ? अगर घर छोड़कर जा रही हो तो सुन लो मैं वापस तुम्हें इस घर में कभी आने नहीं दूंगी ! अरे नौकरानी ही सही कम से कम यहां तुम्हें दो वक्त का खाना मिल जाता हैं , सर छुपाने की जगह हैं और दुनिया की गंदी नजरो से सुरक्षित हो तुम समझी और तुम्हें क्या चाहिए ? आज सौम्या से रहा नहीं गया वह बोली- आपने मुझे दो वक्त की रोटी के लिए नौकरानी बनाया और आपके पति की गंदी नजरों ने मुझे घर में भी शांती ना दी यह कहकर वह तीर की दरवाजे से निकल गई ! यह सुनकर रीटा स्तब्ध सी पति सुरेश को देखती रह गई , बाद में दोनों पति- पत्नी में भयंकर झगड़ा हुआ मगर सुरेश यह बात मानने को तैयार ही नहीं था वह बोला झूठ बोल रही थी सौम्या और मुझ पर झूठा इल्जाम लगा कर गई हैं ! रीटा के मन में संदेह का कीड़ा घर कर गया था , उसमें और सुरेश में एक दूरी आ गई थी ! अंशु भी बस पुरे दिन पढ़ाई में डुबा रहता !
अंशु भीतर से बहुत गंभीर होते जा रहा था जो उसके माता- पिता को बिल्कुल दिखाई नहीं दिया !
सौम्या मायके तो आ गई थी लेकिन उसके भैया- भाभी उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे !
सौम्या ने गांव आकर काम ढूंढना शुरू कर दिया ! गांव के मुखिया भले आदमी थे उन्होंने सौम्या को आंगनवाडी में काम दे दिया ! सौम्या घर में पैसे लाने लगी थी इसलिए उसके भैया- भाभी भी उसे कुछ बोलते नहीं थे ! हां अक्सर, उसकी भाभी सौम्या की पुरी तनख्वाह से घर खर्च निकाल लेती थी मगर यहां सौम्या किसी की नौकरानी नहीं थी उल्टा घर खर्च उसी की तनख्वाह से चलता ,खाने- पीने में भी कोई कटौती नहीं होती थी और उसकी मां तो थी ही उसका साथ देने के लिए ! धीरे- धीरे समय बीतता गया लगभग छः साल बीत गए ! एक रोज दरवाजे के बाहर एक कार आकर रुकी जिसमें से एक नौजवान उतरा और बाहर खड़ी रानी के सिर पर हाथ फेरकर बोला – रानी, मम्मी कहां हैं ? रानी बोली आप कौन ? वह नौजवान घुटनो के बल बैठ गया और बोला – जाओ पहले मम्मी को बुला लो फिर बताता हुं मैं कौन हुं ? उतने में सौम्या बाहर आई और उसे देखकर चकित होकर बोली – अंशु तुम ? यहां क्यों आए हो ? अंशु बोला- चाची मैं आपको और रानी को लेने आया हुं ! सौम्या बोली – अब क्या लेने आए हो मुझे ? तुम्ही ने तो मुझे नौकरानी कहकर मेरे हाथो से बना गाजर का हलवा खाने से मना कर दिया था याद हैं ? अंशु की आंखें आंसुओं से भर उठी और वह बोला – चाची जब मैं दिन- रात आपको घर में नौकरानी की तरह काम करते देखता था तो मुझे अच्छा नहीं लगता था ! उस दिन मैंने गुस्से में इसलिए कहा ताकि कम से कम मेरी वजह से मां आपको परेशान ना करे मगर मुझे नहीं पता था कि आपको इतना बुरा लग जाएगा कि आप वह घर ही छोड़ दोगी , उसी दिन मैंने यह सोच लिया था कि जिस दिन मैं बड़ा हो जाऊंगा सबसे पहले आपके दुःख दूर करूंगा , आपको आपका अधिकार दिलवाऊंगा , फिलहाल तो घर पापा के नाम पर हैं उसका मैं कुछ नहीं कर सकता मगर मैं अपनी कमाई से आपको सुख भरी जिंदगी जरूर दे सकता हुं ! यह सुनकर सौम्या की आंखें भर आई और वह बोली – मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा ! तेरी बातो से घायल होकर ही तो मैं आज आत्मसम्मान की जिंदगी जी रही हुं ! आज मेरे पास किसी चीज की कमी नहीं है , आज मैं अपनी बेटी को भी अच्छे से पढ़ा रही हुं ! मैं आत्मनिर्भर बनकर अपनी जिंदगी खुद के दम पर जी रही हुं , मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा लेकिन अंशु नही माना और बोला मैंने खुद की कमाई से आपके लिए एक फ्लैट लेने का निर्णय किया हैं और वह फ्लैट आपके नाम पर ही रहेगा और आप इंकार नहीं कर सकती ! हम जिस घर में रहते हैं उसमें आपका भी हिस्सा था मगर पापा ने धोखेबाजी करके वह घर अपने नाम पर कर लिया इसलिए मैं आपके लिए एक फ्लैट लेना चाहता हुं जो सिर्फ आपका होगा ! सौम्या इंकार करती रही मगर अंशु नहीं माना और सौम्या को अपने साथ लेकर गया और वहां शहर में एक फ्लैट दिखाया और कहने लगा आगे चलकर पापा के नाम वाला फ्लैट मेरा हो जाएगा मगर तब तक बहुत देर हो जाएगी इसलिए मैं आपको आपका अधिकार अभी से देना चाहता हुं ! चाची सबसे बड़ा धन परिवार हैं जो मुझे मेरे माता- पिता से ज्यादा आपमें नजर आता था और वह भी बचपन से , सौम्या की आंखें बार- बार भर जाती उसे तो लगा था ससुराल में उसका कोई नहीं , उसे तो कोई अधिकार भी नहीं मिला था लेकिन आज अंशु की वजह से उसे भी लग रहा था कि ससुराल में उसका भी कोई हैं ! वह अंशु को बार- बार आर्शीवाद दे रही थी ! कुछ ही दिनों में फ्लैट की रजिस्ट्री उसके नाम पर हो गई और वह अपनी मां और बेटी के साथ इस फ्लैट में रहने लगी ! उसे अब अपने पैसे भाई- भाभी को देने की जरूरत नही थी इसलिए उसके पैसे अब वह अपनी बेटी और अपने उपर खर्च करती थी ! अंशु भी बीच बीच में चाची से मिलने आता रहता ! उसी बीच खबर आई कि अंशु के माता- पिता तलाक ले रहे हैं ! यह खबर सुनकर सौम्या स्तब्ध रह गई , बाद में पता चला कि उसके जेठजी का कहीं बाहर अफेअर चल रहा था इसलिए जेठानी ने तलाक लेने की जिद पकड़ ली थी ! दोनों का रिश्ता टूट गया था ! यह बात की खबर आग की तरह फैल गई थी जिससे उसके जेठजी भी डिप्रेशन में आ गए थे क्योंकि समाज में उनकी बहुत बदनामी हुई थी ! धीरे धीरे जेठ सुरेश को कई बीमारियों ने जकड़ लिया और वह दुनिया छोड़कर चले गए ! जेठानी रीटा अपने मायके जाकर बैठ गई थी जहां उसके भाई- भाभी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे ! एक समय उसने अपनी देवरानी को ताने मारे थे और आज वह खुद ऐसी जिंदगी जीने को मजबुर हो गई थी ! अंशु को भी अपनी मां से कुछ खास लगाव नहीं था क्योंकि उसने देखा था अपनी मां को चाची को सताते हुए ! अंशु को पता था यह सब जो आज उसकी मां भुगत रही हैं यह उनके ही बुरे कर्मो की सजा हैं ! अंशु चाची सौम्या को भरपुर मान- सम्मान देता था और अब अपनी शादी की जिम्मेदारी भी उसने सौम्या को दे दी थी क्योंकि वह उसे ही अपना अभिभावक मानता था ! सौम्या भी अंशु के लिए रिश्ते देख रही थी !
दोस्तों ,अंशु ने अपनी चाची के लिए वह सारे फर्ज निभाए जो उसके माता- पिता की जिम्मेदारी थी और जिन लोगो ने सौम्या के साथ गलत किया था उन्हें उनके हिस्सों की सजा मिल चुकी थी ! आपको यह कहानी कैसी लगी कमेंट करिएगा !
आपकी सहेली
स्वाती जैन