संतान सुख – मधु वशिष्ठ

कांता मैडम आज भी ऑफिस नहीं आई? भावना ने पूछा । “नहीं” मीना ने जवाब दिया ,उनकी शायद तबीयत ठीक नहीं है ।कांता मैडम का ऑफिस ना आना ही पूरे दफ्तर में, आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है।सिर्फ वह  ही पूरे ‌ ऑफिस में ऐसी हैं ,जिन्हें जीने का सही तरीका आता था।  हर समय मुस्कुराता सा चेहरा ,50 साल की होने को आई है,

पर कॉटन की सलीके से पहनी हुई साड़ी ,उनके सधे हुए कदम, और शांत व्यवहार सबको मोह लेने के लिए काफी था। शायद ही कोई ऐसा हो जिसकी कि  मैडम ने हेल्प ना की हो। कांता मैडम के अपने कोई बच्चे तो नहीं थे, पर उन्हें सभी अपने लगते थे, वह सब का ही ख्याल रखती थीं।

घर हो या बाहर,अपनी एक जेठानी की बेटी को उन्होंने पाला भी ,पढ़ाया भी ,और उसका विवाह भी करा था। ऑफिस में भी किसी के पास जब भी काम की अधिकता होती थी तो  मैडम काम पूरा होने तक उसके साथ रुकी ही रहती थी। बहुत बुरा लगता था, जब लोग उनके काम करने का एहसान ना मानकर यह कहते थे, “इन्हें क्या फर्क पड़ता है” कौन सा कोई इनके पास में बच्चे हैं ,जो इनको घर जाने की जल्दी हो ।

“यह तो तैयार होकर क्यों नहीं आएंगी, ” यह तो सलीके से रहेंगी ही” घर में बच्चे हो तो पता चले। लेकिन किसी की कोई भी बात का असर कभी  मैडम के चेहरे पर नहीं देखा, उनकी मुस्कुराहट हमेशा जस की तस ही रहती थी। सुबह उठकर ,सैर करना एक्सरसाइज करना, लंच में खाने के साथ सलाद और फल खाने की आदत उन्होंने ही सबको डलवाई थी। अपना और सब का ख्याल करना उन्हें बखूबी आता था।

       लगभग 1 सप्ताह बाद कांता मैडम ने ज्वाइन करा उनकी मुस्कुराहट तो यथावत थी ,पर वह काफी कमजोर लग रही थी । मैडम का हालचाल पूछते हुए कुसुम ने कहा” मैडम आपको अपनी 25वीं एनिवर्सरी पर नजर तो नहीं लग गई, “आप बहुत सुंदर लग रही थी। वह सिर्फ मुस्कुरा दीं ,और बोली, अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है ।

मेरी तबीयत ही खराब थी, बुखार तो था नहीं ,लेकिन कुछ भी काम करने की इच्छा ही नहीं हो रही थी। मेरे हस्बैंड को तो केयर करने की आदत ही नहीं है ,पूरा घर अस्त-व्यस्त  देख कर  वह तो और भी परेशान हो रहे थे। जब डॉक्टर से सारे चेकअप करवाएं, और अल्ट्रासाउंड भी करवाया तो पता चला कि —-“मैं मां बनने वाली हूं”।

कांता मैडम के गाल शर्म से और भी लाल हो चुके थे। उन्होंने बताया ,काफी महीने बीत चुके हैं और अब मैं सिर्फ छुट्टियां लेने के लिए आई हूं,” क्योंकि डॉक्टर ने कहा है पूरा रैस्ट चाहिए “हम सब को बहुत खुशी हो रही थी।कांता मैडम को छुट्टियां मिलने में कोई परेशानी नहीं हुई, क्योंकि उनका काम करने को तो पूरा दफ्तर ही तैयार था। 

         किसी को थोड़े ही पता है ,अगले पल में क्या होने वाला है हर पल का आनंद लेना चाहिए। मैडम इस बात का जीता जागता उदाहरण थीं। उन्होंने किसी के कुछ भी बोलने का कोई असर खुद पर नहीं लिया। अपना, अपने पति का, अपने घर का ,अपने अड़ोस पड़ोस का, अपने घूमने-फिरने का , मैडम ने पूरा ख्याल रखा । मन में आया, वह लोग जिन्होंने कांता मैडम को कुछ भी बोला है ,क्या वह शर्मिंदा होंगे ?या बदलेंगे?

    —खैर छोड़ो  ,कांता मैडम ठीक रहें, और सब कुछ अच्छे से निपट जाए ।सबके मन में उनके लिए यही दुआ थी। कुछ महीने बाद कांता मैडम के पति ने ऑफिस में सूचना दी कि उनके  घर बेटा हुआ है।उनको संतान सुख का मिलना पूरे ऑफिस के लिए खुशी का कारण बन गया था।उन्होंने मिठाई भी भिजवाई थी।

                कांता मैडम के बच्चे के फंक्शन में पूरा ऑफिस गया था। उनकी पूरी कॉलोनी भी खुशी से झूम रही थी। किसी ने सच ही कहा है कि तुम्हारे कर्म ही तुम्हारी पहचान है। पांच महीने के बाद कांता मैडम ने फिर ऑफिस में ज्वाइन करा ,वह अब भी पहले के जैसे ही,” नहीं ” पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रहीं थी ‌‌‌।

सबका ख्याल था कि वह अब रिटायरमेंट ले ही लेंगी ,क्योंकि बच्चे को भी तो संभालना था। तभी भावना ने आकर बोला क्यों मैडम! अब तो पता पड़ गया ,बच्चे के साथ में कितनी मुश्किलें आती है।     “नहीं ”  भावना मैडम, मुझे तो कोई परेशानी नहीं हुई। आपको तो पता ही है कि मेरे हस्बैंड के चाचा जी और चाची जी उनका ख्याल भी हम ही रखते थे ।

चाचा जी अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यार मेरे हस्बैंड को ही करते थे। काफी समय से बीमार तो थे ही,  बिट्टू के फंक्शन के 2 महीने बाद ही वह चल बसे। चाची जी को भी संभालना बहुत मुश्किल हो गया था , भावनात्मक तौर पर भी वह बिल्कुल टूट गई थीं, लेकिन बिट्टू के साथ खेलते हुए वह अपने आप को बहुत सहज महसूस कर रही थीं,

इसलिए मैंने भी रिटायरमेंट लेने का प्लान  छोड़ दिया है। चाची जी अब हमारे साथ ही रहती हैं। शनिवार या रविवार को  मन करता है, तो अपने घर चली जाती हैं। घर अब पहले से भी ज्यादा व्यवस्थित और भरा पूरा है। 

         किसी भी परिस्थिति में विचलित ना होते हुए अगर कोई अपने जीवन में आनंद भर सकता है ,तो वह सदा आनंदित ही रहेगा।

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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