आत्म सम्मान – खुशी

नितिन तुम्हें ये पत्र जब मिलेगा तब तक मैं तुम्हारी दुनिया से दूर जा चुकी होगी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा मेरे जाने से तुम्हारे जीवन में मेरा कोई स्थान नहीं है । रोज अपनी आत्म सम्मान का गला घुट कर मैं नहीं जी सकती इसलिए मैं जा रही हूं अपने आत्मसम्मान के लिए अपनी मानसिक शांति के लिए। दिया ।

सुबह उठकर जब नितिन वह पत्र खोला तब नितिन खुदस ही बोला कहां जाएगी? यही आएगी दो-चार दिन बाद कौन सा ठिकाना है उसका आ जाएगी। नितिन बाहर आया उसकी मां दमयंती ने पूछा अरे आज तुम्हारी महारानी कहां है सुबह से दिखाई नहीं दी सारा दिन सोई पड़ी रहती है अरे मां नाटक कर रही है।

तभी करण और सिया भी आ गए। पापा मां कहा है? तुम्हारी मां जरा 5  -6 दिन तफरी  करने गई है। क्या हां हम तुम्हारी मां  पर बहुत जुलम करते हैं इसीलिए वह हमसे दुखी होकर चली गई। व्हाट इस दिस नानसेंस यह औरत भी ना कब सुधरेंगी। सोसाइटी में से कोई इज्जत ही नहीं है गवार इसने हमारा सम्मान भी खत्म करना है।

मां मां आप परेशान मत हो दो-चार दिन में खुद ही वापस आ जाएगी। सिया बोली  ओह माई गॉड ये लेडी आपकी लाइफ में कैसे आ गई।इट्स ए लांग स्टोरी नो प्रॉब्लम एवरीथिंग इस ओके सबने नाश्ता किया ।करण ने नितिन से पूछा पापा मामा कहां है मुझे उनकी याद आ रही है

बेटा  वो आ जाएगी दो-चार दिन में तुम परेशान मत चलो बस आ गई स्कूल जाओ। आज  सिया बहुत खुश थी। उसने बस में बैठते ही अपनी सहेलियों से कहा टुडे आई एम रेडी एक्चुअली मेरी मॉम कुछदिन के लिए बाहर गई है तो हम पार्टी कर सकते हैं बहुत दिन हुए राहुल कह रहा है उसके फार्म हाउस पर चलने के लिए तो हम सब चल सकते हैं हर बार मेरी मां मना करती थीं बट अब  वह नहीं है तो वी केन गो।

सिया की फ्रेंड  कल्पना ने पूछा आंटी कहां गईं वह तो तुम्हें कभी अलाउड नहीं करती यार तभी तो वह बाहर गई है तो मैं जा सकती हूं तू चल रही है नहीं यार मेरे मम्मी पापा को पसंद नहीं तो मैं नहीं जाऊंगी मां कहती हैं कि इस तरीके की पार्टी अच्छी नहीं होती। यार तेरी मम्मी भी मेरी मम्मी जैसी बात करती है पर वह नहीं है तो मैं जाऊंगी। सिया ने स्कूल में सारा प्रोग्राम सेट कर लिया और अपनी दादी और पापा से परमिशन ले ली। ओपन माइंडेड फैमिली तो किसी ने इनकार भी नहीं किया। सिया बहुत खुश थी उसकी कहानी का विलन नहीं है वह अपनी जिंदगी जी पाएगी।

आज दिया को गए घर से चार दिन हो गए थे किसी को कोई फिक्र नहीं थी सिर्फ करण अपनी मां के बारे में बाकी सब अपनी जिंदगी में मस्त थे। हां कुछ काम टाइम पर नहीं हो रहे थे तो नितिन चिढ़ता पर और नौकर लगा लिये।

अब बात करते हैं दिया की दिया प्रोफेसर राव की गुणी बेटी थी जो संस्कृत में एम ए थी और पीएचडी की तैयारी कर रही थी। राव साहब किसी कान्फ्रेंस के लिए दिल्ली आए थे वहीं उनके धनिष्ठ‌ मित्र प्रकाश मिले । बचपन में  दोनों की शिक्षा एक की ही जगह हुई थी।

राव साहब की माली हालत अच्छी थी तो कहीं बार प्रकाश की फीस और उनके खाने का खर्चा राव साहब ही दे दिया करते थे आज इतने सालों बाद मिलने पर पता चला की राव साहब प्रोफेसर हैं और प्रकाश एक मिल के मालिक इधर-उधर की बातें हुई प्रकाश राव साहब को अपने घर ले गए परिवार में उनकी पत्नी दमयंती बेटा नितिन बेटी पूजा थी। इसके विवाह की तैयारी चल रही थी मां बेटी शायद बाजार से ही आई थी लग रहा था पूरा बाजार खरीद रखा है।

प्रकाश घर में घुसे और सभी से राव साहब का परिचय करवाया। अब तक नितिन ऑफिस से नहीं आया था। प्रकाश के कहने पर दमयंती नहीं कुक से खाना बनवाया क्योंकि वह और पूजा तो बाहर से खा कर आए थे कोई और दिन होता तो प्रकाश को अकेले ही खाना पड़ता है आज राव साहब की बदौलत उसे कंपनी मिल गई थी खाना पीना हुआ हाल में सिर्फ प्रकाश और राव साहब थे।

दमयंती भी अपनी थकान का बहाना कर चली गई नौकरो ने  ही खाना परोसा और सब समेटा । तभी नितिन आया प्रकाश ने राव साहब से  उसका  परिचय करवाया। नितिन अच्छे से मिला फिर सोने चला गया रात भर राव साहब और प्रकाश बातें करते रहे। बातो बातो मे  राव साहब ने  दिया का जिक्र कि्या  और बताया कि उसकी मां का देहांत उसकी १५ वर्ष की आयु में हो गया था। पूरा घर उसी ने संभाल रखा है । प्रकाश ने राव साहब से कहा कि वो अगले हफ्ते उनके घर आएंगे। अगले हफ्ते प्रकाश और नितिन दोनों राव साहब के घर पहुंचे। दिया के लहलहाते बाल बिखरे हुए थे और वो रसोई से बाहर आई। चाय नाश्ता लेकर प्रकाश को पहली नजर में वो नितिन के लिए जच गई।

नितिन ने भी उसे देखा पर वह यह नहीं जानता था कि उसके पिता उसका रिश्ता पक्का करने जा रहे हैं। नितिन अपनी कालेज की दोस्त नम्रता को पसंद करता था उसने उसे प्रपोज किया पर उसने मना कर दिया वो बोली सौरी यार शादी वादी मेरे बस का रोग नही है। मैं आजाद पंछी हूं हम मस्त इंजाय कर तो रहे हैं। इसीलिए नितिन ने दिया से शादी के लिए हामी भरी थी कि बाहर तो नम्रता है। क्यों कि वो प्रकाश की जिद को जानता था इसलिए उसने ंऔर दमयंती  ने ज्यादा कुछ नहीं कहा पर तीनों ही इस शादी से खुश नहीं थे। पूजा की शादी के ३ महीने बाद दिया और नितिन की शादी हो गई। शादी कर के दिया घर आ गई। सुघड़ थी प्रकाश ने उसे घर की जिम्मेदारी सौंपी क्योंकि वह कुक के हाथ का खाना खा कर पक चुके थे।

दिया के हाथ में रसोई जाते ही कायाकल्प हो गया स्वादिष्ट खाना कम तेल मसाले वाला। कुछ खास व्यंजन जो सालों से प्रकाश ने खाए नही थे।अब जरा दमयंती भी बेफ्रिक हो गई थी क्योंकि अब प्रकाश को अच्छा खाना मिलता तो वो उसे रसोई में जाने को ना बोलता। घर , रसोई बाग बगीचे सबको दिया की आदत हो गई। दिया ने अपनी पी एच डी पूरी ना कर पाई।इसी बीच कैंसर से उसके पिता का देहांत हो गया अब दिया अकेली थी पर प्रकाश ने उसे बेटी जैसा प्यार दिया।

नितिन तो शुरू से ही उससे कम बोलता था सिर्फ मतलब की बात और दमयंती के स्टेटस में वो फिट नहीं बैठती थी। दमयंती की किटी पार्टी की सहेलियां भी कहती क्या बहु लायी हो खाना अच्छा बनाती है पर सोसाइटी को मैच नहीं करती। दमयंती और नितिन के व्यवहार से दिया यह समझ चुकी थी कि वो जबरदस्ती इस घर में लाई गई है।समय गुजरा प्रकाश का देहांत हो गया अब तो दिया का इकलौता सहारा भी छीन गया वो दो बच्चों की मां बनी पर उसे वह सम्मान नहीं मिला।‌

बच्चे भी उसका तिरस्कार करते। बेटी तो उसे कभी पीटी एम तक में ना लें जाती।वो अपने पापा और दादी की तरह उसे टीट करती।बेटा फिर भी उसे पूछता क्योंकि वह छोटा था। इस साल सिया 11 में थी उसके बर्थ डे पर नितिन ने उसे फोन ले कर दिया। उसके बाद से तो वो दूसरी दुनिया में ही थी ‌।सारा दिन फोन लेपटॉप बस और कुछ नहीं यदि दिया कुछ कहती तो उल्टा जवाब देती। उसकी इन हरकतों के बारे में दिया ने नितिन से कहना चाहा तो नितिन बोला तुम गवार हो तुम्हें क्या पता सोसाइटी में कैसे मूव करना है छोड़ दो मेरी बेटी का पीछा और फिर नितिन चार दिन के बिजनेस टूर पर चला गया।

बिजनेस टूर तो बहाना था वो तो नम्रता के साथ गया था 4 दिन का कह 6 दिन में आया और आकर सो गया। दिया ने सामान अनपैक्ड किया तो उसमें हाटेल का टैग मिला जो बाली का था जबकि नितिन तो घर में सिंगापुर का कह कर गया था। दिया ने नेट से उस रिजाॆट का नंबर निकाला वो काल करती उससे पहले ही नितिन के फोन पर उसे रिजॉर्ट से कॉल आ गया कि आप अपना ब्रेसलेट भूल आए है। रिसेप्शनिस्ट बोली मैंम आप अपना ब्रेसलेट भूल गईं हैं।आपको हमारा सटे कैसा लगा।

दिया  सोच रही थी मेंरे  साथ कौन सा धोखा हुआ है मुझे पत्नी का सम्मान नहीं दिया किसी और के साथ अइयाशी कर रहा है। दिया वैसे ही बैठी रही जो जब नितिन उठा तो उसने वह फोन कॉल की रिकॉर्डिंग और होटल की पर्ची दोनो उसके हाथ में थमा दी। दिया बोली नितिन तुम्हारी जिंदगी में मेरी क्या हैसियत है। नितिन बोला कछ नहीं तुम्हें अपने बाप की वजह से झेल रहा था। तुम निकल जाओ यहां से ना मैं तुम्हें चाहता ना मेरे बच्चे तुम्हें चाहते तुम्हारी किसी को जरूरत नहीं है और नितिन बाहर चला गया। दिया ने फैसला किया अब यहां नहीं रहूंगी दिन भर अपने काम किए करण का सारा सामान लगा कर रखा।

सिया के पास गई वो किसी से फोन पर बात कर रही थी। चिल्ला कर पड़ी आपको इतनी अक्ल नहीं है कि नाक करके आते है। दिया ने अपनी चार साडि़ियां डाकयूमेट,, और जो राव साहब उसे श्रषिकेश वाले घर की चाबियां सौप गए थे वो लेकर सुबह निकल गई। ऋषिकेश पहुंचकर उसने अपने पिता के मित्र मदन अंकल को फोन किया और उन्हीं के प्रयास  से उसे ऋषिकेश में नौकरी मिल गई । दिया आप अपने जीवन को अपने हिसाबसे अपने आत्म सम्मानके साथ जीना चाहती थी।

उधर सिया अपने दोस्तों के उकसावे पर पार्टी में शामिल हो गई वहां उसे किसी ने डिक में कुछ दे दिया। किस्मत अच्छी थी कि कुछ  ग़लत होने से पहले वहां पुलिस का छापा पड़ गया और और सबको पुलिस अपने साथ था ने लें गई। वहां से रात को नशे की हालत में नितिन सिया को घर लाया । करण बोला ममा इसीलिए इसे  जाने नहीं देती थी। यह मां से कितना लडती थी। उधर नितिन का भी भूत उतर गया उसकी प्यारी नम्रता अपने बॉसके साथ रंगे हाथों पकड़ी गई  और उसने उससे शादी कर ली। आज नितिन अपने आपको हारा हुआ महसूस कर रहा था

जिस औरत की जीवन पर उसने कदर नहीं कि उसने उसका घर संभाल रखा था उसके बच्चे उसे हर चीज जगह पर होती है और आज सब उथल-पुथल शांति थी पर मन अशांत था। नितिन ने दिया का पता करवाया दिया ने साफ आने से मना कर दिया। दिया ने कहा बहुत साल  अप ना आत्म सम्मान खोकर जी हूं बस और नहीं तुम अपनी चकाचौध  वाली जिंदगी में में जाओ। अपना परिवार बच्चे सभालो और जो तुम्हारे जीवन में है उसे अपनाओ।

नितिन मिन्नत करता रहा पर दिया ने अपना फैसला नहीं बदला दिया ने कहा तुमसे तलाक नहीं लूंगी क्योंकि बच्चे मेरे भी है भविष्य में उन्हें जरूरत है तो मैं साथ खड़ी हूं पर घर में वापसी नहीं आप अपनी  घर गृहस्थी खुद संभालो। दमयंती को भी दियाके जाने के बाद समझ आ गया था कि पूरा घर दिया ही चला रहे थी उन्होंने कभी उसकी कदर नहीं की।

दोस्तों इंसान को घर में प्यार की भी जरूरत होती है सब लोग ज्यादातर घर की औरतों को टेक इट  फोर गारंटीड लेते हैं पति तो क्या बच्चे भी मा का सम्मान करना भूल जाते है। इसलिए बहुत जरूरी है यह सबक। 

आपकी सखी 

खुशी

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