नीता की रिश्तेदारी में लड़कियों की ही संख्या ज्यादा थी और सभी बहनें लगभग हम उम्र ही थी। चाची जी ताई जी नीता की मम्मी और बुआ सब अपनी अपनी लड़कियों के लिए लड़के देख रहे थे। हालांकि ताई जी और बुआ जी की लड़कियां नीता से काफी बड़ी थी।
नीता के पिता को दफ्तर में वर्मा जी ने ही नीता के लिए अपने बेटे का रिश्ता सुझाया। यूं भी एक ही दफ्तर में काम करने के कारण और क्योंकि दोनों ही सरकारी मकान में ही रहते थे इसलिए दोनों के घर भी ज्यादा दूर नहीं थे ।नीता के पापा और वर्मा जी एक दूसरे को जानते भी थे। इसलिए कुछ ज्यादा पूछ परख भी नहीं करनी थी।
नीता भी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी और वर्मा जी का बेटा रजत भी एक प्राइवेट कंपनी में ही कंप्यूटर प्रोग्रामर था ।वह सरकारी नौकरियों के लिए भी परीक्षा दे रहा था।आज के समय में ऐसा जाना पहचाना रिश्ता मिला तो दोनों ने बिना देर लगाए दोनों की सगाई पक्की कर दी थी।
बहुत से रिश्तेदारों को शायद यह सगाई रास ना आ रही हो ,अतः किसी रिश्तेदार ने नीता के पिता को बताया कि नीता की सगाई जिस लड़के से हुई है ,वह तो बेहद आशिक मिजाज और शराबी है।
यह खबर पक्की है और लड़के के दफ्तर के ही किसी आदमी ने दी है। हालांकि वर्मा जी तो बेहद शरीफ आदमी है लेकिन फिर भी आजकल के बच्चे मां बाप पर कहां जाते हैं, नीता के पापा यह सुनकर बेहद घबरा रहे थे कि कहीं जल्दबाजी में उनसे कुछ गलत फैसला तो नहीं हो गया?
इधर रजत और नीता लगातार फोन पर बातें और चैट भी करते रहते थे। शादी की तारीख भी 4 महीने बाद की ही निकली थी। कहीं इसलिए ही तो उन्होंने दहेज के लिए मना नहीं करा ?नीता के पापा के मन में ख्याल आया।घर में नीता की मम्मी से बात करने के उपरांत उन्होंने यह फैसला किया कि यह शादी करके वह नीता की जिंदगी खराब नहीं कर सकते।
अभी केवल उनकी बेटी की केवल सगाई ही हुई है।लेन-देन में जो सामान आया गया है वह वर्मा जी को वापस कर देंगे , वर्मा जी की शराफत के कारण उन्हें पूरा विश्वास था कि वर्मा जी भी उनका सामान वापस कर देंगे लेकिन अगर वह ना भी करें तो कोई बात नहीं ।
हालांकि नीता रजत से ही शादी करना चाह रही थी। वह दोनों एक-दूसरे से बातें करते और मिलते ही थे परंतु नीता के पिता जी को लगता था कि जिस तरह की बातें उन्होंने लड़के के विषय में सुनी है ऐसे लड़के से अपनी बेटी का विवाह करके वह उसका भविष्य अंधकारमय नहीं बना सकते थे। सूचना देकर अगले इतवार को जब वह उनके घर गए तो वर्मा जी, उनकी पत्नी और रजत तीनों ने उनका बहुत अच्छे से स्वागत किया। बिना लाग लपेट के नीता के पिता ने उन्हें सारी बात बताते हुए कहा कि मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि आप हमारे साथ ऐसा धोखा करेंगे आपको तो पता है मेरी लड़की के बारे में ,फिर आपने उसकी शादी की बात करते हुए यह क्यों नहीं सोचा कि मेरी लड़की आपके सिगरेट और शराब पीने वाले आवारा लड़के के साथ कैसे रहेगी?
यह सुनकर शांत स्वभाव वाले वर्मा जी भी बोले हम तो शर्म के कारण चुप रहे थे, आप बिना वजह हमारे लड़के पर लांछन लगा रहे हैं ।यह जानते हुए भी कि आपकी लड़की का एक बॉयफ्रेंड था और उसकी दोस्ती उस लड़के से स्कूल से ही थी उससे ब्रेकअप होने के बाद में आपकी बेटी बहुत डिप्रेशन में भी आ गई थी फिर भी हमने यह सोचते हुए कि बेटियां तो सबकी प्यारी ही होती है अगर हम अब रिश्ता तोड़ने की बात करें तो लड़की कहीं फिर से डिप्रेशन में ना आ जाए हम आपकी बेटी के साथ हुए रिश्ते को आगे चला रहे थे। हम आप का लिहाज कर रहे थे और आप हमारे लड़के पर ही इल्जाम लगाने आ गए।
क्या? नीता के पापा ने पूछा आपको ऐसा किसने कहा? मेरी बेटी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उसके बारे में ऐसी उल्टी सीधी अफवाह कौन फैला रहा है?
आपके ही किसी नजदीकी रिश्तेदार ने बताया है हम नाम नहीं लेना चाहते लेकिन? तभी वर्मा जी ने पूछा हमारे बेटे के बारे में ऐसी गलत बातें आपको किसने बताईं। जी आपके बहुत नजदीकी रिश्तेदार ने ही यह सब बातें बताईं है। रिश्तेदार——–कौन? जी हां दुनिया में आपके ऐसे बहुत से करीबी होगे जो कि आपको ही आगे बढ़ते ,खुश होते नहीं देख सकते, अनजानों पर तो आप विश्वास स्वयं ही नहीं करेंगे परंतु आज समय ऐसा है कि बचना अपनों से ही पड़ेगा।
क्योंकि वह रिश्तेदार दोनों घर के जानकार और बेहद नजदीक के थे इसलिए नाम लिखना तो उचित ना होगा लेकिन पाठकगण आंख मूंद कर भी किसी पर विश्वास ना किया जाए तो ही अच्छा है।
यह तो अच्छा है कि समय से नीता और रजत की शादी हुई और आज वह दोनों बेहद सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अगर दोनों में से कोई भी उस अफवाह पर यकीन करता तो शायद दोनों को जीवनभर बहुत अफसोस ही होता।
मधु वशिष्ठ, फरीदाबाद हरियाणा