बहुत अफसोस है मुझे – मंजू ओमर

संजय अजय अरुण अरे कहां हो सब लोग भाई इधर आओ एक खुशखबरी है तुम  सबके रामावतार जी बेटे को आवाज लगा रहे थे। तभी रामावतार की दोनों बहुएं कावेरी और शिखा बाहर निकाल कर आई। बड़ी बहू कावेरी बोली संजय तो बाथरूम में है कोई काम हो तो हमें बता दीजिए बाबूजी।

नहीं तुम सब भी आओ बैठो एक खुशखबरी सुनानी है तुम सबको। धीरे-धीरे तीनों बेटे और दोनों बहुएं सभी इकट्ठे हो गए ड्राइंग रूम में। क्या बात है बाबूजी आज आप बहुत खुश नजर आ रहे हैं । हां मैं बहुत खुश हूं क्या बात है बताएं। अरे मेरा दोस्त अरविंद था ना उसकी बहन का बेटा है, अच्छा पढ़ा लिखा है एम बी ए किया हुआ है अच्छी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है।

अरविंद ने अपने भांजे के लिए अपनी राधिका का रिश्ता मांगा है। घर हमेशा आते रहे है तो राधिका को उनने देखा है।उनको सुशील और घरेलू लड़की चाहिए उन्होंने जवाब मांगा है।

तुम लोग बताओ बेटा तुम लोगों को क्या राय है। अब बाबूजी घर बैठे रिश्ता आया है तो मना करने का तो सवाल ही नहीं उठाता है, और बाबू जी हमारी बहन भी तो अच्छी है पढ़ी-लिखी सुंदर और घर के कामों में दक्ष है । तो फिर क्या कह रहे हो तुम लोग हां कर दूं।हां हां बाबूजी ,मेरे हां कहने पर अरविंद अपने भांजे को लेकर घर आएंगे और राधिका से मिलेंगे। ठीक है बेटा जब मरजी  है तो हां कर दे रहे हैं। 

              रामावतार जी के मित्र अरविंद जी दूसरे दिन अपने भांजे और अपनी बहन को लेकर राम अवतार जी के घर आए। । चाय की ट्रे लेकर जब राधिका सबके सामने आई तो उसकी शर्म से झुकी नजरे अदब और सलीका देखकर सब खुश हो गए। राधिका ने सबसे बड़ी शालीनता से नमस्ते किया।

बैठो बेटी अरविंद जी की बहन मालती जी बोली । कुछ बातचीत के बाद मालती जी ने कहा भाई साहब मुझे तो आपकी बेटी बहुत पसंद है। और बेटे राहुल से पूछा तो उसने भी हां मे गर्दन हीला  दी । अब मुंह मीठा करने का दौर चल पड़ा। तभी रामावतार जी ने पूछ लिया बेटा राहुल शादी के लिए क्या डिमांड है बेटा तुम्हारी ।

अरविंद जी बोले दोस्त मेरी बहन के यहां भगवान का दिया हुआ सब कुछ है मुझे दहेज नहीं चाहिए । आप अपनी बेटी तो दे रहे हैं ना। फिर भी कुछ तो चाहिए होगा ना ,अरविंद यदि कोई मांग है तो बताएं मैं देखूंगा कि मैं पूरा कर सकता हूं कि नहीं।क्योंकि मैं तो एक टीचर रहा हूं और तीन बेटे और एक बेटी की परवरिश की है और कड़ी मेहनत से यह घर बनाया है

बस यही जमा  पूंजी है मेरी अब रिटायर हूं दो बेटों की शादी हो चुकी है और अभी एक बेटे की होनी है। हमने अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए हैं। राधिका के मां के गुजर जाने के बाद मां-बाप दोनों का प्यार मैने अकेले  दिया है बेटी हमारी बहुत संस्कारी और सुशील है उससे आपको कोई शिकायत नहीं होगी। 

                  हां हां राम अवतार वह मुझे पता है राधिका बिटिया के बारे में ,मैं तभी तो उसे बहू बनाने की सोची।हमें दहेज नहीं चाहिए जो कुछ थोड़ा बहुत देना है चाहते हो तो अपनी बेटी को दे देना। लेकिन बारातियों का स्वागत सत्कार अच्छे से कर देना बस यही मेरी डिमांड है । बात पक्की हो गई और फिर 2 महीने के बाद शादी की तारीख भी रखी गई। सभी घर में बहुत खुश थे कि राधिका के लिए घर बैठे इतना अच्छा रिश्ता मिल गया है। 

             घर में सभी खुश थे राधिका की शादी को लेकर।तभी रामावतार जी ने सभी को बुलाकर बैठाया बात करने को और बोले हां भाई देखो 2 महीने बाद की तारीख निकली है।।शादी की बहुत इंतजाम करने हैं ,तभी संजय बोल उठा लेकिन बाबूजी इंतजाम कैसा उन्होंने तो दहेज लेने से मना कर दिया है । हां बेटा दहेज से मना कर दिया है लेकिन एक मां-बाप का क्या फर्ज बनता है, और शास्त्रों में भी लिखा है और हमारे बड़े बुजुर्ग भी कह  गए हैं की बेटियों को मायके से कभी खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए। चलो दहेज नहीं देंगे कोई बड़ा सामान नहीं देंगे लेकिन भाई जेवर कपड़े और कुछ राधिका की जरूरत को सामान तो देंगे । आजकल इतनी महंगाई है जरा जरा सी कामों में इतने पैसे लग जाते हैं। 

             अरविंद जी ने कहा 500 बाराती होंगे और उनके खाने-पीने का अच्छा इंतजाम करना है, जरा हिसाब लगाओ तुम लोग इसमें कितना खर्चा होगा।।तभी बड़ी बहू बोली पापा जी कम से कम 5 लाख तो खर्च होगा इन लोगों के अच्छा खाना देने में अच्छा और बेटा 10 तोला सोना तभी दूसरा बेटा बोला और वाह पापा जी 10 तोला सोना पता है ना कि सोना कितना महंगा है ।हां हां पता है रामावतार जी बोले। एक हिसाब तो लगाओ ,और उसके ससुराल वालों के कपड़े,और फिर इधर उधर के तमाम खर्चे।अपने रिश्तेदारों को रहने खाने की व्यवस्था करना नौकर चा कर टैंट पार्लर आने बहुत कुछ खर्चे। 

                अच्छा सब मिलकर 10 लाख रख लो, बड़े बेटे से पूछा रामावतार जी ने संजय यह बताओ तुम कितना खर्च करोगे  शादी में ,मेरे पास तो बस तीन लाख है इधर उधर से जुगाड करके एक लाख और कर सकता हूँ, अब बचे छै लाख  रामावतार बोले। हाँ तो संजय और तुम तीनों बताओ कितना खर्चे करोगे। अब  सब बेटे और बहू एक दूसरे का मुंह देखने लगे ।बड़ा बेटा संजय बोला बाबूजी मैंने तो अभी अभी गाड़ी उठाई है उसकी किस्त जा रही है, फिर भी मैं 1 लाख कर दूंगा। राम अवतार ने दूसरे बेटे से पूछा तो उसने कहा मेरे पास तो सब फिक्स है मैं 60,7000 कर दूंगा और छोटे तुम बाबूजी मैं एक महीने की सैलरी 40000 दे दूंगा। अच्छा यह सब मिलकर तो बस ढाई लाख हो रहे हैं बाकी के पैसे कहां से आएंगे । तो पापा क्या आपने राधिका की शादी के लिए पैसे नहीं जोड़े हैं क्या । बेटा अपनी नौकरी में चार-चार बच्चों को पढ़ाया लिखया दो की शादी की और मम्मी की बीमारी में कितने पैसे खर्च हुए। एक बहन थी हमने सोचा था कोई बात नहीं तीन-तीन भाई है सब मिलकर कर लेंगे । लेकिन तुम लोगों ने तो हाथ खड़े कर लिए मुझे बड़ा अफसोस हो रहा है तुम लोगों की सोच पर। 

         तो बाबूजी आप अपने दोस्त से शादी के लिए समय ले ले  ना कह दे 1 साल बाद शादी करेंगे ।तो क्या 1 साल बाद तुम लोग पूरे पैसे खर्च करोगे ऐसी क्या गारंटी है। और फिर इतनी अच्छे रिश्ते को  मैं टाल के खराब नहीं करना चाहता। तुम  लोग छोड़ो मैं ही कुछ करूंगा मेरी उम्मीद को तुम लोगों ने तोड़ दिया। दोनों बहू बेटे एक दूसरे का मुंह देखने लगे और मन ही मन बहुत खुश हुए कि जल्दी शादी होगी तो पापा जी ही कुछ करेंगे और क्या करेंगे मालूम नहीं। लेकिन हम लोग तो अपने पैसे खर्च करने से बच जाएंगे । तभी रामावतार जी बोले शादी टाल दूं 1 साल को और यदि उसे समय तक मैं ना रहा तो तो क्या होगा। ठीक है बेटे अब मैं ही कुछ करता हूं। लेकिन आज मुझे बहुत अफसोस हुआ अपनी परवरिश पर ऐसे  वक्त मैं तुम लोगों ने हाथ खींच लिया यह ठीक नहीं हुआ लेकिन यह शादी तो आपने क्या तारीख पर ही होगी। 

           तीनों बेटों की इस व्यवहार से   रामावतार जी बहुत दुखी थे। लेकिन उन्हें तय कर लिया था की शादी अपनी तारीख पर ही होगी और शादी अपनी तारीफ में संपन्न हुई। राधिका अपने ससुराल चली गई शादी के 2 दिन बाद दो अटैची में अपने कपड़े और कुछ जरूरत का सामान पैक करके रामावतार की ड्राइंग रूम में आए । आज रविवार था तो सभी लोग ड्राइंग में बैठे चाय पी रहे थे । इस तरह से पापा जी को अटैची के साथ देखा तो पूछने लगे, अरे बाबूजी आप कहीं जा रहे हैं, हां रामावतार जी बोले और तीन लिफाफे निकाले और तीनों बेटों को और बढ़ा दिए ये तुम तीनों  का दो दो  लाख रुपया। 

             यह क्या है बाबूजी राधिका की शादी के लिए मैंने यह घर बेच दिया और उस पैसे से राधिका की शादी की। और यह दो-दो लाख रुपये तुम तीनों के हैं । और कुछ पैसे से हमने दो कमरे पर एक फ्लैट खरीद लिया है अब मैं उसमें रहूंगा। और अपना खर्चा अपना इंतजाम तुम लोग खुद कर लो अगले तीन दिनों में मकान खाली करना है। और जो मेरी पेंशन आता है उसे मैं अपना गुजारा कर लूंगा चलता हूं। लेकिन बाबूजी सुनिए तो हम लोग कहां जाएंगे। अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है कहां जाओगे मैं तो अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, अब तुम लोग अपनी अपनी जिम्मेदारी पूरी करो। तुम लोग मेरी कसौटी पर खरे नहीं उतरे,इसका अफसोस मुझे उम्र भर रहेगा। और इतना कहके रामावतार जी अपने अटैची उठा कर बाहर निकाल गए।तीनों भाई ने और दोनों बहुएं एक दूसरे का मुंह देखते रह गई ऐसा भी होगा ।      

दोस्तों आप सब बताएं रामावतार जी ने सही किया कि नहीं। कभी कभी बच्चों के व्यवहार से मन बहुत आहत होता है। उस समय ज्यादा जब आप उम्मीद ज्यादा रखे हुए हो। तभी इंसान इस तरह का कदम उठाता है। कैसी लगी मेरी कहानी कृपया बताएं। 

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

3 अक्टूबर

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