जलन – आराधना श्रीवास्तव

वार्षिक परीक्षा होने में केवल  एक महीने शेष रह गए थे, परीक्षा की तारीख दिन- प्रतिदिन करीब आ रही थी, निधि जी- जान से परीक्षा की तैयारी में जुटी थी उसे इस वर्ष भी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होना था l

निधि बहुत ही होनहार चतुर तेजतर्रार लड़की थी वह हर वर्ष परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होती थी, कक्षा में उसकी लग्न एवं मेहनत के सभी कायल थे।

अध्यापक एवं अध्यापिका  भी उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी, वह न केवल कक्षा में ही नही बल्कि विद्यालय में होने वाले निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, खेलकूद प्रतियोगिता ,सभी में अपना सिक्का जमाये थी।
वह पढ़ने के साथ-साथ बड़ी शालीन एवं विनम्र थी

उसकी मां सरोज उसको सदैव प्रोत्साहित करती थी  तथा पढ़ाई में सदैव उसकी सहायता करती थी सरोज ने खुद भी बी, ऐड किया था और ‘सेंट्रल एकेडमी’ स्कूल मे बतौर अध्यापिका के पद पर थी ।

सरोज अपनी बेटी निधि की पढ़ाई का पूरा पूरा ध्यान देती थी.उसके सारी फाइल, प्रोजेक्ट .असाइनमेंट,सब अपनी देखरेख में बनवाती थी ।

उसको जब भी समय मिलता वह निधि के पढ़ाई संबंधित समस्याओं का समाधान करती ,
अब वार्षिक परीक्षा होने वाली थी  ऐसा लग रहा था जैसे सरोज की खुद की परीक्षा होने वाली हो,वह निधि की तैयारी में किसी तरह की कमी नही छोड़ना चाहती थी ,

निधि भी मां की अपेक्षाओं पर खरा उतरना चाहती थी और इस बार तो बोर्ड परीक्षा थी ,
कुछ ज्यादा ही मेहनत और तैयारी करनी थी निधि ने अपना टाइम टेबल बना लिया ।
किस विषय पर कितना समय देना है । कितना रिवीजन बाकी है
सभी का खाका तैयार कर लिया था ।

एक दिन जब वह स्कूल गई तो भूगोल की अध्यापिका कक्षा में प्रवेश की उन्होंने पूछा ?कल उन्हें नक्शा भरने के लिए बताया गया था,,,,,, सभी छात्राएं विश्व का नक्शा भर कर लायी हैं,

उन्होंने निधि से कहा ,,,,,,,सभी छात्राओं का नक्शा जमा कर ले उनके स्टाफ रूम में लाए, वह चेक करेंगी,
जो जमा नहीं करेगा ,   ,,,,,उसे पूरे घंटे खड़ा होना पड़ेगा
निधि ने सभी का नक्शा जमा कर लिया और बताया कि

केवल मेघा और उसकी दो सहेलियों ने नक्शा नहीं जमा किया है अध्यापिका ने इन तीनों को कक्षा से बाहर खड़ा कर दिया, मेधा बदले एवं जलन से तिलमिला उठी।

छुट्टी के समय मेघा निधि के पास गई और बोली तुम्हारी वजह से उन्हें पूरे घंटे बाहर खड़ा होना पड़ा,,,, तुम्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा ,

निधि ने समझाया ,,,इसमें उसका कोई दोष नहीं है ,, ,
लेकिन वह कहने लगी,,,,,  उसी की वजह से   उसकी इतनी बेइज्जती हुई है ,

एक दिन प्रयोगशाला में रसायन विज्ञान की प्रयोगात्मक क्रियाविधि हो रही थी प्रयोगशाला में परखनली लिए हुए निधि पूरे एकाग्र चित्त होकर प्रयोग कर रही थी  तभी मेधा और उसकी सहेलियां उधर से गुजरी  और निधि को धक्का दे दिया ,
निधि के हाथों से परखनली छूट कर जमीन पर गिर गई   उसे उसकी लापरवाही के कारण अध्यापिका से डांट भी पड़ी सब कुछ जानते हुए भी वह चुप थी  ,

मेघा और उसकी सहेलियां बस अवसर ढूंढती रहती थी कैसे निधि को नीचा दिखाया जाए, उनके अंदर जलन एवं बदले की भावना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी ,

स्कूल में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी छात्र छात्राएं स्वतंत्रा दिवस का पावन पर्व मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे  ,
नृत्य ,गायन  ,नाटक सभी का आयोजन होना था ।
निधि एवं उसकी सहेलियों ने लोकनृत्य में भाग लिया था,

मेरे देश की धरती ,,,,,   सोना उगले -उगले हीरे मोती,,,,,,,
मेरे देश की धरती , ,,,,,,,,

तभी संगीत की अध्यापिका ने निधि को अपने पास बुलाया  और कहा संगीत कक्ष से तबला लेकर आए ,
संगीत कक्षअन्य कक्ष से दूर,,,, बिल्कुल कोने में था।

ताकि शोरगुल से दूर छात्राओं को संगीत की शिक्षा दी जा सके निधि जैसे ही संगीत कक्ष में पहुंची और तबला उठाया ही था,
कि बाहर से किसी ने दरवाजा बंद कर दिया,,   ,,,,,

वह दरवाजा खटखटाटी रह गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
उधर ध्वजारोहण के बाद ,

एक के बाद एक मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे थे , तभी इस स्टेज पर संगीत अध्यापिका ने संबोधित किया अब आपके सामने ,,,,, ,,
मेरे देश की धरती,,,,, सोना उगले – उगले हीरे मोती ,,,,
पर लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगी छात्राएं,

निधि के साथ की प्रतियोगी छात्राएं अवाक रह गई ,,,,,,
उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें ?निधि का कहीं पता नहीं चल पा रहा था।
और यह नृत्य जोड़े में होना था, दो -दो छात्राओं का जोड़ा बनाकर प्रस्तुतीकरण करना करना था, तब एक छात्रा दौड़कर संगीत अध्यापिका के पास पहुंची और नीधि के बारे में बताया ,,,,,,,

संगीत अध्यापिका ने कहा उन्होंने उसे तबला लाने के लिए संगीत कक्ष में भेजा था ,
क्या वह नहीं आई ?

छात्राएं दौड़कर संगीत कक्ष की तरफ गई,

निधि लगातार दरवाजा खटखटा रही थी। सभी कार्यक्रम में व्यस्त थे लाउडस्पीकर की तेज आवाज के कारण कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था जब निधि की सहेलियां पहुंची तो दरवाजा खुला,

सभी ने जल्दी-जल्दी निधि को तैयार किया और स्टेज पर पहुंच गई ,
उन सब का लोक नृत्य काफी प्रभावशाली रहा

अंत में जब पुरस्कार वितरण समारोह हुआ, तो उसका पहला पुरस्कार लोकनृत्य,,,,,,,,, 
मेरे देश की धरती सोना उगले- उगले हीरे मोती  ,,,,,,,,,
को मिला ।

निधि और उसके सहयोगियों को स्टेज पर बुलाकर पुरस्कृत किया गया  । यह सब देखकर मेधा और उसकी सहेलियां जलन से कुढ गई………

अब परीक्षा बिल्कुल निकट आ गई थी,

दो दिन शेष रह गये थे

प्रवेश पत्र मिल चुका था ,

मा ने निधि को समझाया कि वह परीक्षा का बहुत ज्यादा दबाव ना ले जो तैयारी हो चुकी है उसका केवल रिवीजन करें बहुत ज्यादा घबराए नहीं,

अठ घंटे की पूरी नींद लें जिससे दिमाग शांत रहेगा  पौष्टिक भोजन ले,किसी तरह नर्वसनेस ना महसूस करें
आत्मविश्वास रखें.।

अपने अंदर इस आत्मविश्वास के साथ परीक्षा कक्ष में जाए कि वह सब प्रश्न अच्छी तरह हल कर लेगी,,,,,,

दूसरे दिन निधि बिल्कुल शांत मन से परीक्षा कक्ष में पहुंची घंटी बजने के साथ सभी में प्रश्न पत्र एवं एव कापिया बांट दी गई निधि ने जब प्रश्न पत्र को उलट-पुलट  कर देखा तो

उसे लगभग सारे प्रश्न आ रहे थे वह एकाग्र चित्त होकर अपने प्रश्नों को हल करने मे लग गयी ,
वह बड़ी गंभीरता से प्रश्नों को पढ़कर उसके उत्तर लिखती, लगभग दो घंटे बीत चुके थे केवल तीन प्रश्न बाकी थे,
तभी कक्ष निरीक्षक  का एक दल निधि के हाल में प्रवेश किया,

ठीक उसी समय कागज की एक मुड़ी हुई पर्ची निधि के सामने आ गिरी…..
निधि ने मेघा को पर्ची फेंकते हुए देख लिया था तभी एक निरीक्षक निधि के सामने से कागज की पर्ची उठा लिए और उसे खड़ा कर दिया और डांटते हुए कहा ,,,,,

तुम नकल कर रही थी मैं तुम्हें परीक्षा से वंचित कर दूंगा और विद्यालय से रिस्टीकेट करवा दूंगा,

निधि, आत्मविश्वास से बोली…….

“सर यह मेरी पर्ची नहीं है…….

आप इसकी हैंडराइटिंग मिला ले, ,, तथा प्रश्न का उत्तर मिला सकते हैं, ,,,, वह मेरे उत्तर से मैच नहीं हो सकता ,,,,,,,  , ,
निरीक्षक ने ऐसा ही किया उसका कोई उत्तर पर्ची से मिल नहीं कर रहा था तथा हैंडराइटिंग भी उसकी नहीं थी,। निरीक्षक ने नीधि से पूछा?


तो बताओ किसने तुम्हारे पास यह नकल की पर्ची फेकी है ?
मैं उसे परीक्षा से वंचित कर विद्यालय के रस्टिकेट करा दूंगा, किसी भी स्कूल में उसका दुबारा दाखिला नहीं हो सकेगा,।

निधि की नजरें मेधा की तरफ गई वह डर से कांप रही थी,
उसे लग रहा था,,,,,,,

कहीं निधि ने उसका नाम बता दिया तो उसे परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा ,,,,,,,स्कूल से भी निकाल दिया जाएगा,,,,,
उसके प्राण सूख रहे थे ,,,वह शर्म एवं आत्मग्लानि से नजरें नीचे किए थी ।

उसकी दोनों सहेलियों को भी लग रहा थानयदि निधि ने उन सबका नाम ले लिया तो बड़ा अनर्थ हो जायेगा,
इधर निरीक्षक नीधि पर लगातार दबाव बना रहे थे कि वह उस छात्रा का नाम बताये जिसने नकल की पर्ची  फेका था ।

बहुत कुछ सोचते हुए निधि ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा…”वह एकाग्र चित्त होकर प्रश्नों का उत्तर लिखने में व्यस्त थी उसे नहीं पता कि ..नकल की पर्ची किस दिशा से आकर उसके पास गिरी” ….

कुछ समय तक जांच पड़ताल के बाद जांच निरीक्षक वहां से चले गए तब जाकर मेधा की जान में जान आई….
प्रश्नपत्र समाप्त होते ही मेघा अपनी सहेलियों के पास पहुंची, सब एक दूसरे से कह रही थी कि आज निधि ने उन्हें बचा लिया….नहीं तो उन सब का भविष्य खराब हो जाता,


आज उन्हें अपने किए पर प्रायश्चित हो रहा था उन्हें आज निधि के साथ किए हुए बर्ताव पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी

वह सब निधि के पास पहुंची,


मेघा और उसकी सहेलियां निधि से माफी मांग रही थी,
मेधा भी रोए जा रही थी,


वह अपने पिछले किए गए बर्ताव के लिए माफी मांग रही थी उसने यह भी स्वीकार किया कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दिन उसने ही जलन एवं वदले की भावना से उसे संगीत कक्ष में बंद किया था,
निधि मुस्कुरा रही थी उसने मेघा को बड़े आत्मीयता के साथ गले लगा लिया……
आज मेघा के मन में निधि के लिए सम्मान और भी बढ़ गया था।

स्वरचित

आराधना श्रीवास्तव

लखनऊ उत्तर प्रदेश

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