और कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा है – मंजू ओमर

और कैसी है मेरी बेटी राजीव जी बेटी श्वेता की  अटैची उठाते हुए बोले, ठीक हूं पापा ।और मेरा आने वाला नवासा  कैसा है, और वह भी ठीक है। तू अकेले आई है दामाद जी नहीं आए।नहीं पापा अच्छा चल ऑटो में बैठ चल तेरी मां इंतजार कर रही होगी बड़ी बेसब्री  से।

श्वेता घर आए तो गायत्री जी ने दरवाजा खोला और बेटी को गले से लगा लिया । और बेटा तू अकेली आई दामाद जी को नहीं लाई। मैंने भी कहा था आने को दामाद जी आप भी आइयेगा अपनी सेवा करने का मौका हमें भी दीजिए। नहीं माँ वह नहीं आए,मैं अकेले आई हूं । आप लोगों से मिलने का बहुत मन कर रहा था।

अच्छा-अच्छा बैठ मै चाय बनाती हूं ,और मैं मनोहर के यहां से तेरी पसंद के समोसे ले आता हूं राजीव जी बोले। अरे पापा बाहर बारिश हो रही है आप भीग जाओगे । अरे नहीं छाता लेकर जाता हूं और पास में ही तो जाना है। राजीव जी समोसे लेकर आ गए।

ले बेटी खा और दामाद जी होते तो कितना अच्छा लगता ,उन्हें भी मैं यहां की सब फेमस चीज ला ला कर खिलाता।अच्छा पापा मम्मी अब बस भी करिए कितना दामाद दामाद करेंगे। कितनी सेवा करेंगे आप दामाद की उन्हें का गाना गाए जा रहे हैं। जब से आए हैं जब देखो जब दामाद जी को फोन करके मेरी बेटी का ख्याल रखना, उसे कोई गलती हो तो माफ कर देना, नादान है मेरी बेटी अभी ।

मेरी बेटी आप लोग ना बस ,,,,,,,,,,।और श्वेता समोसे प्लेट मे छोड़कर कमरे में जाकर लेट गई । देखा ना आपने उसको नाराज कर दिया  आप तो जब से दामाद दामाद ही कहे  जा रहे हैं ऐसी बेटी की अहमियत कम होती है। उसे लगता है कि इस घर में बस दामाद की अहमियत रहेगी मेरी नहीं। उसे मनाएं जाकर नाराज होकर चली गई समोसा भी नहीं खाया। 

                श्वेता गायत्री और राजीव जी की इकलौती संतान थी ।बड़े नाजों  से पाला था बेटी को। श्वेता पढाई  लिखाई में बहुत ही होशियार र्थी । श्वेता ने एम बी ए किया था और और नौकरी कर रही थी। इसी बीच राजीव और गायत्री जी उसके लिए लड़का ढूंढ रहे थे। बहुत- खोज बीन करने पर रोहित उन्हें पसंद आ गया।

और श्वेता और रोहित की आपस में दूसरे को पसंद आ गए थे। रोहित इंजीनियर था किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता था। उसके घर में रोहित के मम्मी पापा और एक छोटी बहन थी। रोहित के पापा नौकरी करते थे और दो-तीन साल में रिटायर होने वाले थे। दोनों बच्चों की शादी  भी करनी थी।सबकुछ पंसद आने पर रोहित और श्वेता की शादी हो गई। 

               रोहित के घर से शादी में काफी लंबी चौड़ी मांग रखी गई थी ।एक ही बेटी होने के नाते राजीव ने खुशी-खुशी सब मांग मान ली थी। लेकिन रोहित की मम्मी पापा कुछ लालची प्रवृत्ति के थे । हर वक्त कोई त्यौहार या रस्म का बहाना बनाकर कुछ न कुछ मांगती ही रहते थे । सब पूरा करते थे राजीव जी की बेटी को कोई परेशानी ना हो।

और वह ससुराल में खुश रहे । ससुराल जाते ही श्वेता की तरह-तरह की सख्ती होने  लगी । सबसे पहले तो नौकरी छोड़ दो घर के काम धाम संभालो। और सारे जेवर उतार कर माँ के पास रख दो आजकल समय नहीं है इतना जेवर पहनकर रहना रोहित ने श्वेता से कहा ।   श्वेता ने सारे जेवर दे दिए उतार कर लेकिन हाथ मे कंगन और गले मे एक चैन डाले रखी। 

     ‌         एक दिन  श्वेता और रोहित कहीं बाहर जा रहे थे। श्वेता ने जींस और शर्ट पहन लिया। रोहित ने कहा श्वेता यह तुम्हारा ससुराल है मायका नहीं, ऐसे  कपड़े यहां नहीं चलेगी उतारो उसको सूट या साड़ी पहनों । और रात में छोटे कपड़े पहन कर सोती हो ना और वही पहनकर के बाहर चली जाती हो सब यहां नहीं चलेगा समझी।श्वेता ने कहा रोहित तुम तो कहते थे कि हम लोग आज के जमाने के हैं कोई बंधन नहीं है ।।जैसे चाहे वैसे रहो हमारे घर।

और मेरे पापा से कहा था तुमने कि आपकी बेटी बहुत खुश रहेगी हमारे घर कोई परेशानी नहीं होगी। तो यह सब क्या है मेरी हर बात में टोका टोकी तुम्हारा भी और मम्मी  का भी ये न करो वो न करो। तुम्हारा मायका नहीं  है जैसा जैसा कह रहा हूं वैसा करो समझी। 

          अभी शादी की 5 महीने हुए थे श्वेता प्रेग्नेंट हो गई। वह अभी  बच्चा नहीं चाहती थी । लेकिन,,,,,श्वेता की तबीयत ठीक नहीं रहती थी उल्टी आती थी उसे। हाथ पैर में दर्द होता था। कोई भी परेशानी होती तो कोई ध्यान नहीं देतायह सब तो प्रेगनेंसी के दौरान होता ही है।श्वेता  सब काम करती रहती है।

इसी बीच एक दिन उसके पेट में अचानक से दर्द उठा और 3 महीने में ही श्वेता का एबार्शन हहो गया। खुश भी हुई  श्वेता क्यों कि उसे अभी  बच्चा चाहिए भी नहीं था। इसलिए वो  मायके आ गई मां से मिलने । तो बड़ी उदास उदास थी ,।।मां गायत्री जी ने कई बार पूछा लेकिन श्वेता ने कुछ ने बताया। गायत्री जी ने राजीव से कहा सुनिए श्वेता बड़ी चुप  चुप सी रहती  है पता नहीं क्या बात है ।

अरे कुछ नहीं अभी-अभी उसके साथ यह हादसा हो गया है ना उसने अपना बच्चा खोया है। इसलिए उदास होगी, थोड़ा समझाओ उसको ससुराल में थोड़ा एडजस्ट करना पड़ता है । नए परिवार नए लोगों के बीच उनके तौर तरीके सीखने में समय तो लगता ही है ना। हां ठीक है ससुराल में एक लड़की को तो यह सब करना ही पड़ता है।

गायत्री जी अब भी श्वेता के पास बैठती  है उसको समझती रहती है देखो बेटा अच्छी  ससुराल है और दामाद जी भी अच्छे हैं । और थोड़े दिन की ही तो बात है सब कुछ ठीक हो जाएगा तू परेशान ना हुआ कर। 

        कुछ नहीं श्वेता एक हफ्ता रहकर वापस ससुराल चली गई ।।और जाते वक्त अपने सोने का कंगन घर पर ड्रेसिंग टेबल पर हीं छोड़ गई। अब जब ससुराल पहुंचे तो खाना परसते समय सास ने देख लिया श्वेता के हाथ में कंगन नहीं है । तो श्वेता से पूछा है क्या कंगन माँ को दे आई क्या, नहीं माँ जी वह गलती से छूट गया। गलती से छूट गया या जानबूझकर छोड दिया

रोहित बोला।श्वेता का मन बहुत दुखी हुआ की मां के साथ रोहित भी श्वेता के ताने मारता रहता है। श्वेता को बहुत बुरा लगता था ,श्वेता का मन ससुराल में नहीं लगता था वह अपने ससुराल से खुश नहीं थी । लेकिन अपनी मम्मी पापा के लिए वह जबरदस्ती मन लगती थी। वहां कुछ भी तो उसके मन का नहीं होता था। ससुराल में श्वेता बहुत चुपचाप सी रहने लगी। 

         अभी 4 महीने ही हुए थे उसके एबआशर्न  के, लेकिन घर में फिर सब बच्चे के लिए जोर देने लगे। श्वेता अभी तैयार नहीं थी लेकिन वहां कहां श्वेता की चलती थी। वह फिर से प्रेग्नेंट हो गई । घर में जब राजीव जी और गायत्री जी को पता लगा तो वह भी थोड़ी निश्चित हो गए कि चलो फिर से श्वेता प्रेग्नेंट हो गई है।

अब श्वेता ठीक हो जाएगी, खुश रहने लगेगी। समय बीतता गया और आज श्वेता 5 महीने की प्रेगनेंसी के दौरान मायके आई हुई थी। बड़ी अनमनी सी थी, तभी गायत्री जी ने पूछ लिया बेटा तुमने गले में कुछ नहीं पहना  और कान में भी कुछ नहीं पहना क्या बात है,

श्वेता बोली वह मम्मी अकेले आ रही थी ना तो रास्ते में डर था कि कहीं कोई घटना ना हो जाए इसलिए मम्मी सास ने चेन और कान  का उतरवा लिया। अच्छा चल कोई बात नहीं। क्या खायेगी मैं तेरी पसंद की सब्जी बना दूंगी । कुछ भी बना लो मम्मी अब मैं सब खा लेती हूं।

मेरी पसंद अब रही कहां। इतनी उदास क्यों हो बेटा अब तो तुम्हें खुश रहना चाहिए । श्वेता कुछ नहीं बोली बोलना बेटा क्यों है इतनी उदास।क्या बोलूं मम्मी आप लोगों ने दामाद जी दामाद जी करके सर पर चढ़ा दिया है  रोहित को।मुझे अभी बच्चा नहीं है चाहिए था।

घर मे सब दिन भर टोकते रहते थे बच्चे के लिए घर में ।  मेरी नौकरी छुडवा  दी मेरे शौक खत्म कर दिए है सब मेरी सारी इच्छाएं मर गई। बस अब तो मैं उन लोगों के मन मुताबिक सब काम करती हूं बस और कुछ नहीं। गायत्री और राजीव एक दूसरे का मुंह देख रहे थे बेटी ससुराल में खुश नहीं थी फिर भी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करें। 

         चार दिन बाद श्वेता ससुराल जाने को बेमन  मन से तैयारी कर रही थी ।राजीव जी उसका सामान लेकर बाहर निकलने वाल वाले थे कि दामाद जी का फोन आ गया। हेलो पापा जी श्वेता निकल  रही है ना आज । हां निकल रही है ,तो पापा जी उसके साथ उसके सोने के कंगन भी भेज दीजिएगा जो छोड़ आई थी पिछली बार।

हां क्यों नहीं और भी कुछ भेज दे रहा हूं तुम्हारे लिए दामाद जी। क्या पापा राजीव जी ने बेटी का हाथ पकड़ कर दरवाजे से अंदर किया और बोले तुम्हारे लिए डायवोर्स पेपर दामाद जी।ये क्या कह रहे  है आप।हां सही कह रहा हूँ मेरी बेटी मन से खुश नहीं है तो मैं अपनी बेटी को अपने पास रख लूगां।मैं उसे वहां नहीं भेजूंगा। ऐसे घुट घुट कर मेरी बेटी नहीं जिएगी।कुछ बंधन तोड़ देना ही बेहतर है

समय पर सही कदम उठा लेना ही समझदारी है। बाद में पछताने से क्या फायदा। श्वेता मुस्कुराकर पापा की गले लग गई । पापा पापा आपने मुझे नया जीवन दिया है। पापा धन्यवाद, कैसा धन्यवाद   ,, बेटा तुम्हे खोने से मै में डर गया था । मैंने सोचा इस तरह सोचते सोचते कहीं बहुत देर ना हो जाए। कहीं मैं अपनी बेटी को खो ना दूं ।

और तुम भी मेरी और मम्मी की इज्जत की खातिर जबरदस्ती बंधन बांधे हुए थी। इसलिए कुछ बंधन को समय पर छोड़ देना ही समझदारी है क्योंकि मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता तो अब तो खुश है ना, पापा श्वेता जोर से पापा के गले लगाती है। हां पापा मैं खुश हूं मैं अब वहां जाना नहीं चाहती हूं और मां बेटी और पापा सब गले लग गए। 

     सच है जब माँ बाप देख रहे है कि बेटी ससुराल मे खुश नहीं है। और वो मम्मी पापा की इज्जत की खातिर जबरदस्ती रिश्ता बनाए हुए है तो, ज्यादा जबरदस्ती सै कहीं बेटी कुछ कर न ले। फिर कितना पछताना पडेगा कि काश समय रहते बेटी को समझ पाते तो आज मेरी बेटी मेरे पास होती। इस लिए जहाँ रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे है तो समझ जाइए देर होने से पहले बेटी को बचा लिजीए। कुछ बंधन समय रहते तोड देना बहुत बेहतर होता है। आपकी क्या राय है पाठकों बताऐगा। 

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

23 अगस्त

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