रिश्ते की डोर

कैफे के शीशे वाले दरवाजे से बाहर निकलते हुए समीर की पीठ धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही थी, और अंदर बैठी काव्या को ऐसा लग रहा था जैसे उसके शरीर से उसकी रूह निकलकर जा रही हो। उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, लेकिन उसके अंदर का अहंकार उसे रोने भी नहीं दे रहा था।

“आखिर मैंने गलत क्या कहा?” काव्या ने खुद को सांत्वना देते हुए सोचा। “मेरे पापा शहर के सबसे बड़े बिल्डर हैं। अगर वो समीर को अपनी कंपनी में वाइस-प्रेसिडेंट की कुर्सी और रहने के लिए एक आलीशान बंगला दे रहे हैं,

तो इसमें गलत क्या है? क्या वो हमेशा उस पुरानी बस्ती के छोटे से घर में अपनी बीमार माँ और बेरोजगार छोटे भाई का बोझ उठाता रहेगा? क्या मेरी अपनी कोई जिंदगी नहीं है? क्या मैं अपनी सारी सुख-सुविधाएं छोड़कर उसके साथ उस घुटन भरे घर में जाकर रहूँ?”

गुस्से और हताशा से भरी काव्या ने अपना डिज़ाइनर बैग उठाया और तेजी से कैफे से बाहर निकलकर अपनी मर्सिडीज कार की तरफ बढ़ी। उसने गुस्से में कार का दरवाजा खोला ही था कि पीछे से एक जानी-पहचानी आवाज़ ने उसे रोक लिया।

“काव्या? अरे काव्या, तू ही है ना?”

काव्या ने मुड़कर देखा। सामने उसकी कॉलेज की सबसे करीबी दोस्त, अंजलि खड़ी थी। अंजलि को देखते ही काव्या के चेहरे के कठोर भाव थोड़े नरम पड़ गए। “अंजलि! तू यहाँ? कितने सालों बाद मिल रही है यार। कैसी है तू?”

“मैं तो एकदम बढ़िया हूँ, लेकिन तेरी शक्ल देखकर लग रहा है कि किसी ने तेरी पूरी दुनिया लूट ली है। क्या बात है? और तू अकेले? समीर कहाँ है? कॉलेज में तो तुम दोनों एक-दूसरे की परछाई हुआ करते थे। शादी की पार्टी कब दे रही है?” अंजलि ने चहकते हुए पूछा।

शादी का नाम सुनते ही काव्या का चेहरा फक पड़ गया। उसकी आँखों में फिर से पानी भर आया। “अब कोई शादी नहीं होने वाली अंजलि। सब खत्म हो गया… हमारा रिश्ता टूट गया,” काव्या ने रुंधे हुए गले से कहा और फूट-फूट कर रो पड़ी।

अंजलि तुरंत उसके पास आई, उसे गले लगाया और कार का दरवाजा बंद करते हुए बोली, “पागल हो गई है क्या? बीच सड़क पर ऐसे तमाशा करेगी? चल सामने वाले पार्क में बैठते हैं। मुझे तसल्ली से बता कि आखिर हुआ क्या है।”

पार्क की एक शांत बेंच पर बैठकर काव्या ने अंजलि को शुरू से लेकर अंत तक सारी कहानी कह सुनाई। उसने बताया कि कैसे उसके पापा समीर की ईमानदारी से बहुत प्रभावित थे और उन्होंने समीर को अपने साथ बिज़नेस संभालने का ऑफर दिया था। शर्त बस इतनी थी कि समीर को अपना पुराना घर और परिवार छोड़कर काव्या के साथ उस नए बंगले में शिफ्ट होना था, जिसे काव्या के पापा ने उनके लिए खरीदा था। लेकिन समीर ने साफ इंकार कर दिया। उसने कहा कि वो अपने परिवार को नहीं छोड़ सकता। इसी बात पर आज दोनों का बड़ा झगड़ा हुआ और समीर ने रिश्ता खत्म कर दिया।

पूरी बात सुनने के बाद अंजलि ने एक गहरी सांस ली। “काव्या… मुझे माफ करना अगर मेरी बात तुझे चुभे, लेकिन तू सच में दुनिया की सबसे बड़ी बेवकूफ लड़की है।”

काव्या ने चौंककर अंजलि को देखा। “क्या मतलब? अब तू भी मुझे ही गलत ठहराएगी? क्या मेरा अपने भविष्य के बारे में सोचना गलत है?”

“हाँ, तेरी सोच पूरी तरह से गलत है काव्या। और मैं तुझे अभी इसी वक्त यह साबित कर सकती हूँ। बस तू मेरी बातों का जवाब बिना गुस्सा किए, ठंडे दिमाग से देना,” अंजलि ने गंभीरता से कहा।

“ठीक है, पूछ क्या पूछना है,” काव्या ने अपना मुंह बनाते हुए कहा।

“तुझे और समीर को साथ में कितने साल हो गए हैं?” अंजलि ने पूछा।

“लगभग पाँच साल… कॉलेज के फर्स्ट ईयर से ही हम साथ हैं,” काव्या ने जवाब दिया।

“इन पाँच सालों में, क्या कभी समीर ने तेरी दौलत का फायदा उठाने की कोशिश की? क्या उसने कभी तुझे महंगे गिफ्ट्स दिलाने के लिए मजबूर किया या कभी तेरी मर्जी के बिना तुझे छूने की कोशिश की?” अंजलि ने काव्या की आँखों में सीधे देखते हुए पूछा।

काव्या एकदम से शांत हो गई। “पागल है क्या अंजलि! समीर ऐसा लड़का बिल्कुल नहीं है। उसने आज तक मुझे अपनी हद पार करके कभी नहीं छुआ। बल्कि वो तो मेरे पैसों से एक कॉफी तक पीने से कतराता है। हमेशा अपना बिल खुद भरता है। उसने मुझे हमेशा एक राजकुमारी की तरह सम्मान दिया है।”

“यही तो बात है काव्या!” अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा। “आजकल के लड़के जहाँ कुछ हफ्तों के प्यार का नाटक करके लड़कियों का फायदा उठाने की फिराक में रहते हैं, वहीं उस लड़के ने पाँच साल तक तेरे सम्मान की रक्षा की। क्यों? क्योंकि वो तुझसे तुम्हारी दौलत या जिस्म के लिए नहीं, बल्कि तेरी रूह से प्यार करता है। अच्छा ये बता, उसने अपने घर पर तेरी क्या पहचान कराई है?”

“उसने अपनी माँ और भाई से साफ कह दिया है कि वो शादी करेगा तो सिर्फ मुझसे। उसकी माँ ने मुझे अपनी बहू मान भी लिया है,” काव्या ने धीरे से कहा, उसका गुस्सा अब थोड़ा कम हो रहा था।

“देखा! वो तुझे पूरे सम्मान के साथ अपनाने को तैयार है। अब मुझे ये बता, जब तूने समीर को अपने पापा से मिलवाया, तो उनका क्या रिएक्शन था?” अंजलि ने फिर से एक सवाल दागा।

“पापा तो समीर के फैन हैं। वो कहते हैं कि आजकल के जमाने में समीर जैसा ईमानदार, मेहनती और उसूलों वाला लड़का मिलना नामुमकिन है। इसीलिए तो उन्होंने उसे अपनी कंपनी का वाइस-प्रेसिडेंट बनाने का ऑफर दिया था। मैं बस इतना चाहती थी कि वो मेरे पापा के ऑफर को मान ले। उसमें काबिलियत है यार! वो क्यों एक छोटी सी फर्म में आर्किटेक्ट की नौकरी करके अपनी जिंदगी बर्बाद करे? क्यों न वो एक मालिक की तरह शान से जिए? और फिर, मेरा भी तो एक परिवार है, मेरे पापा हैं। अगर वो अपना परिवार नहीं छोड़ सकता, तो मैं अपना लाइफस्टाइल क्यों छोड़ूँ?” काव्या ने फिर से अपनी दलील पेश की।

अंजलि ने हल्की सी हंसी हंसते हुए कहा, “काव्या, अगर आज तेरे पापा की जगह तेरी मम्मी होतीं और वो तेरे पापा से कहतीं कि अपने बूढ़े माता-पिता को छोड़कर मेरे मायके में ‘घर जमाई’ बनकर रहो, तो क्या तू आज अपने दादा-दादी के प्यार और इस मुकाम तक पहुँच पाती? क्या एक औरत सिर्फ इसलिए अपने पति को उसके परिवार से दूर कर दे क्योंकि उसके पास पैसा ज्यादा है?”

काव्या के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। वो चुपचाप जमीन की तरफ देखने लगी।

“अब एक पल के लिए आँखें बंद कर और खुद को समीर की जगह रखकर सोच,” अंजलि ने काव्या का हाथ पकड़ते हुए कहा। “तू काव्या नहीं, समीर है। जिन माता-पिता ने तुझे जन्म दिया, अपना पेट काटकर तुझे पढ़ाया-लिखाया, तुझे इस काबिल बनाया कि तू अपने पैरों पर खड़ा हो सके। आज जब उन्हें तेरी सबसे ज्यादा जरूरत है, तेरी माँ बीमार है, तेरा भाई अभी संघर्ष कर रहा है… क्या तू महज एक बड़े बंगले और रसूख के लिए उन्हें बेसहारा छोड़ सकती है?”

काव्या का दिल जोर से धड़कने लगा।

अंजलि रुकी नहीं, उसने आगे कहा, “अच्छा छोड़, समीर की बात मत सोच। तेरा सगा छोटा भाई है ना, रोहन? कल को रोहन किसी अरबपति लड़की से प्यार कर बैठे और वो लड़की रोहन से कहे कि ‘अपने बूढ़े माता-पिता यानी तेरे मम्मी-पापा को किसी ओल्ड एज होम में डाल दो और मेरे साथ मेरे बंगले में चलो’… तो क्या तुझे और तेरे पापा को अच्छा लगेगा? क्या तू उस लड़की को कभी माफ कर पाएगी जो तेरे भाई को तुम्हारे परिवार से छीन ले?”

काव्या के रोंगटे खड़े हो गए। उसके जेहन में अपने पापा और भाई का चेहरा घूम गया। उसे एहसास हुआ कि वो समीर से कितनी खौफनाक मांग कर रही थी। जो लड़का चंद पैसों के लिए अपनी उस माँ को छोड़ सकता है जिसने उसे जन्म दिया, वो कल को किसी और फायदे के लिए अपनी पत्नी को क्यों नहीं छोड़ देगा?

काव्या की आँखों से अब जो आँसू बह रहे थे, वो अहंकार के नहीं, बल्कि पश्चाताप के थे। उसका शरीर कांपने लगा। “हे भगवान… मैं कितनी अंधी हो गई थी अंजलि। मैंने अपने झूठे रुतबे के चक्कर में एक ऐसे इंसान को खोने की ठान ली थी, जो सच में एक हीरा है। मुझे समीर को नहीं, अपने अहंकार को छोड़ना चाहिए था।”

काव्या झटके से बेंच से उठी और अपनी कार की तरफ पागलों की तरह दौड़ी।

“अरे काव्या! रुक, कहाँ जा रही है इतनी हड़बड़ी में?” अंजलि ने पीछे से चिल्लाकर पूछा।

काव्या ने पलटकर अंजलि को एक सुकून भरी और आंसुओं से भीगी मुस्कान दी। “अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल को सुधारने अंजलि! मैं समीर के घर जा रही हूँ। उसकी माँ से माफी मांगने और उन्हें यह बताने कि उनकी बहू अब और इंतजार नहीं कर सकती। मैं समीर से कहूंगी कि मुझे कोई बंगला नहीं चाहिए, मुझे बस उसका वो छोटा सा घर और उसका बड़ा सा दिल चाहिए।”

अंजलि जोर से हंसी, “ये हुई ना मेरी पुरानी वाली समझदार काव्या! जा, और हाँ, अपनी शादी का कार्ड सबसे पहले मुझे भेजना मत भूलना।”

“शादी का कार्ड ही नहीं, मैं जिंदगी भर तुझे दुआएं दूंगी। आज तूने अगर मुझे ये आईना न दिखाया होता, तो शायद मैं जिंदगी भर के लिए अपनी खुशियों को अपने ही हाथों दफन कर देती। थैंक्यू अंजलि, थैंक्यू सो मच!”

काव्या ने कार स्टार्ट की और तेजी से समीर के घर की दिशा में मुड़ गई। आज मौसम भी सुहाना लग रहा था। रेडियो पर कोई पुराना रोमांटिक गाना बज रहा था, और काव्या के दिल में अब सिर्फ समीर और उसके परिवार के लिए एक अटूट प्यार था। वो जान चुकी थी कि एक मकान को घर उसमें रहने वाले लोग बनाते हैं, पैसे नहीं। जब काव्या समीर के घर पहुंची, तो समीर दरवाजे पर उदास खड़ा था। काव्या को देखते ही वो हैरान रह गया। काव्या ने बिना कुछ कहे दौड़कर उसे गले लगा लिया और उसके कंधे पर सिर रखकर फूट-फूट कर रोने लगी। समीर के सारे गिले-शिकवे उस एक आलिंगन में बह गए। उस दिन एक रिश्ते ने पैसे और अहंकार की दीवार को हमेशा के लिए गिरा दिया था।

क्या आपको लगता है कि सच्चा प्यार और परिवार दौलत से ज्यादा मायने रखते हैं? क्या काव्या ने जो फैसला लिया वो सही था? अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताएं!

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